अमनौर(सारण)अमनौर के इंटर कॉलेज के कीड़ा मैदान में प्रारम्भ सात दिवसीय श्रीमद भागवत कथा के पाचवे दिन

अमनौर(सारण)अमनौर के इंटर कॉलेज के कीड़ा मैदान में प्रारम्भ सात दिवसीय श्रीमद भागवत कथा के पाचवे दिन पर हजारो की संख्या में उपस्थित श्रद्धालु भक्तो को जूनापीठाधीस्वर आचार्यमहामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरी जी महाराज ने कथा में प्रवचन करते हुए कहा।सूर्य के आगमन से अंधकार भाग जाता है,अंदर की तारे अदिरिष्य हो जाते है।जब योग अपनी स्वरूप में होता है तो जी शोक रहित हो जाता है कोई भय नही रहता है कोई चिंता नही रहती है।

अध्यात्म में वह शक्ति है जो आपके यथार्थ को प्रकट कर देगा।वेद शास्त्र पढ़ने की चीज नही है,सुनने एवं सिखने की चीज है।मनुष्य जिस दिन से सत्यकर्म करने लगेंगे तो परमात्मा अदृश्य होकर तुमारी मदद करेगी ।हम में आध्यात्म आ जाये तो जीवन सुधर जाएंगे।लक्ष्मी पुष्प,फल,सिंदूर,हल्दी,जंल,अन्न में वास करती है,इसका दरुपयोग न करे। लक्ष्मी क्रोध,अनिंद्रा,आलस्य,पाप से नही रहती है,इसका त्याग करो।समुन्द्र मंथन कथा में बताया कि अमृत की प्राप्ति के लिए देव एवं दैत्य एक हो गए।समुन्द्र मंथन में पहले विष निकला।तो दैत्य एवं देव देखकर घबरा गए,दैत्य के गुरु शंकराचार्य,एवं देव के गुरु वृहस्पति ने तपश्या कर,भगवान शिव को प्रकट किया।जो की देव एवं दैत्य दोने के गुरु थे।प्रकट होने पर देव और दैत्यों ने पूछा की हे भोले नाथ आपको प्रसन्न करने के लिए क्या उपाय है।तो शिव ने कहा मुझे कुछ नही चाहिए।मुझे श्रद्धा पूर्वक एक बेलपत्र,सम्मी पत्र,तुलसी पत्र,मंजरी,धतूर लेकर शिव रात्र प्रदोष के दिन मेरा स्मरण करें तो सभी दुखो से छुटकारा पता है।एक बार में मुक्ति  दे दूता हूं,दूसरे बार में ऋणी हो जाता हूँ।उससे न हो एक लोटा जल बहुत है जिस दिन तेरे आँखों से आँसू आ जाये वही दो बूंद चढ़ा देना उसी से प्रसन्न हो जाऊँगा।भगवान ने विष का पान किया।उसी दिन से निकण्ठेश्वर मह्म देव नाम पड़ा।इसके बाद उच्चश्रेया नामक सफेद घोड़ा, ऐरावत हाथी,कौस्तुमणि नामक हीरा, कल्यवृक्ष पेड़, धन की देवी लक्ष्मी,देवो के चिकितष्क धनंवतर निकले।इससे से अधिकांश वस्तुओं देवताओं के हाथ लगी।दैत्य इस दरमियान अमृत के निकलने का इंतजार करते रहे लेकिन अमृत को पिलाना घातक हो सकता है।इसलिए देवो और दैत्यों के बीच विवाद उत्पन हो गया।देवताओं चाहते थे की अमृत के प्याले में से एक घुट दैत्यों का न मिल पाया,नही तो अमर हो जाएंगे।वही दैत्यों अपनी शक्तियों को बढ़ाने और अमक्ष्वर रहने के लिए अमृत का पान किसी भी रूप में करना चाहते है।भगवान विष्णु ने लिया मोहनी का अवतार की दैत्यों के अमृत का प्याला न लग सके।इसलिए स्वयं भगवान विष्णु को मोहनी का रूप लेना पड़ा।ताकि वे दैत्यों का ध्यान अमृत से हटाकर देवो को पिला सके।ऐसा ही हुआ देवतागण अमृत पी गये और अपने आत्यसंयम को खो चुके दैत्यों के हाथ अमृत का घुट नही लगा।कथा में मुख्य रूप से भाजपा प्रवक्ता शहनवाज हुसेन,पूर्व केंद्रीय मंत्री राजीव प्रताप रूडी,पूर्व विधायक कृष्ण कुमार मंटू सिंह,विनय सिंह,नीलम प्रताप सिंह,प्रभा सिंह,राज्य परिषद सदस्य राकेश सिंह,मंडल अध्यक्ष संतोष सिंह,संजीव सिंह,कामेश्वर ओझा,कुंदन सिंह,बलिराम तिवारी,ओमप्रभात सिंह,अंगद सिंह,त्रिलोकी तिवारी,अजीत सिंह,चमन तिवारी उपस्थित थे।

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