बिहार समस्तीपुर 

समस्तीपुर: दीवाली पर अपने घर की सफाई दूसरों की परेशानी का सबब।

सुमन मिश्रा/रविन्द्र ठाकुर

समस्तीपुर:-हाल ही मे एक कार्यक्रम मे प्रधान मंत्री महोदय् ने कहा था कि हजारों महात्मा गांधी लाखों नरेन्द्र मोदी मिलकर भी चाहे तो देश साफ नहीं हो सकता जब तक कि भारत के सवा लाख लोग न चाहे। दीपावली ज्यों-ज्यों नजदीक आ रही है,

लोग अपने घरों के साफ सफाई में व्यस्त हैं।घर तो लोग साफ कर रहे हैं लेकिन घर से निकले कूड़े-कचड़े फेंकते कहाँ है? सड़कों पर ही न।घनी आबादी के कारण शहर में कुड़े-कचड़े का निष्पादन भी एक समस्या बनी हुई है।ऐसे में नगर-निकाय भी अब अमुमन कुड़े कचड़ो को नदी अथवा एसएच के किनारे  ही फेंकती हुई

दिखाई दे रही है।जबकि बड़े-बड़े शहरों में कुड़ों से खाद एवं बिजली बनाए जानेकी योजना है। सड़क अथवा नदी किनारे फेंके गए कुड़े कचड़े की दुर्गंध वातावरण में फैल कर बीमारी प्रदूषण फ़ैलाने के साथ ही बीमारी पैदा कर रही है।ऐसे में हमे सिबाये नगर-निकाय से अपेक्षा न रख कर अपने स्तर पर भी इसके निपटान की व्यवस्था करनी होगी।समस्या विकट है,

समाधान दिख नहीं रही।सबसे विकट स्थिति तब होती है जब लोग मकान बनाने के क्रम में मकान बनाने की सामग्री रोड पर ही रख कर मकान बनाते है। आजकल चर्म रोग और हृदय रोग के साथ ही श्वास सम्बन्धी रोग महामारी का रूप ले चुका है।

जिसके मूल मे धूल कण और प्रदूषण ही है। अगर हजारो लोगों की टोली अगर आगे- आगे सफाई करता जाए और सिर्फ एक व्यक्ति पीछे से कचड़ा फेंकता हुआ चला आए तो आप सहज अनुमान लगाए कि सफाई किस प्रकार की और कैसी होगी?

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