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शरद यादव और अली अनवर की राज्यसभा की सदस्यता समाप्त,जेडीयू ने कसा तंज

संजय कुमार सुमन

समाचार सम्पादक@बिहार न्यूज़ लाइव

जदयू के बागी नेता शरद यादव और अली अनवर को बीती रात राज्यसभा से अयोग्य करार दिया गया तथा तत्काल प्रभाव से उनकी राज्यसभा की सदस्यता समाप्त कर दी गयी। राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू की तरफ से बीती रात शरद यादव को भेजे गये पत्र में यह जानकारी दी गयी।राज्यसभा में जदयू संसदीय दल के नेता आरसीपी सिंह ने पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के कारण यादव और अनवर की सदस्यता रद्द करने की सभापति से अनुशंसा की थी। सभापति ने दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद कल देर शाम यह फैसला दिया है। शरद गुट के नेता जावेद रजा ने कहा कि उन्हें कल देर रात इस फैसले की प्रति मिली है। इसके कानूनी पहलुओं पर आज विशेषज्ञों से विचार विमर्श कर आगे की रणनीति तय की जायेगी।राज्यसभा के सभापति जदयू के इस तर्क से सहमत थे कि दोनों वरिष्ठ नेताओं ने पार्टी के निर्देशों का उल्लंघन करते हुए और विपक्षी दलों के कार्यक्रमों में शामिल होकर स्वेच्छा से अपनी सदस्यता त्याग दी।जदयू के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और बगावती नेता शरद यादव और अली अनवर की राज्यसभा सदस्यता खत्म होने के बाद अब उनकी सीट को लेकर अटकलों का बाजार गर्म हो गया है।

शरद -अली अनवर की राज्यसभा सदस्यता जाने के बाद अब क्या ?

 

मालूम हो कि जदयू अध्यक्ष और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के महागठबंधन से हटने और भाजपा के साथ गठबंधन करने के बाद जदयू के पूर्व अध्यक्ष यादव ने विपक्ष से हाथ मिला लिया था।शरद यादव को पिछले वर्ष सदन के लिए चयनित किया गया था और उनका कार्यकाल वर्ष 2022 में खत्म होने वाला था। अनवर का कार्यकाल अगले वर्ष की शुरुआत में खत्म होने वाला था।

जेडीयू ने कसा तंज 

जेडीयू के बागी नेता बने रहे शरद यादव और अली अनवर की अब राज्यसभा की सदस्यता खत्म पर जेडीयू ने तंज कसा है। जेडीयू प्रवक्ता संजय सिंह ने कहा कि शरद यादव अब बैग एंड बैगेज बुक हो गए हैं और अब उन्हें घर गृहस्थी संभालने के लिए जबलपुर चले जाना चाहिए।शरद यादव और अली अनवर की राज्यसभा सदस्यता समाप्त होने के बाद जदयू प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा कि अब दोनों बैठकर शंख बजाएं।

क्या शरद यादव की खाली सीट पर केसी त्यागी जाएंगे राज्यसभा? लग रहे कयास
क्या कहते हैं शरद यादव 

वरिष्ठ समाजवादी नेता शरद यादव ने राज्यसभा की सदस्यता से अयोग्य ठहराये जाने के बाद कहा है कि उन्हें लोकतंत्र की खातिर बोलने की सजा मिली है।शरद यादव ने राज्यसभा के कल के फैसले पर अपनी प्रतिक्रिया में आज कहा कि उन्हें बिहार में बने महगठबंधन को तोड़ने संबंधी अपनी पार्टी के फैसले की खिलाफत करने के कारण संसद की सदस्यता गंवानी पड़ी है।

शरद यादव ने ट्वीट किया है, मुझे राज्यसभा की सदस्यता से अयोग्य घोषित किया गया है। बिहार में राजग को हराने के लिए बने महागठबंधन को 18 महीने में ही सत्ता में बने रहने के मकसद से राजग में शामिल होने के लिए तोड़ दिया गया ।अगर इस अलोकतांत्रिक तरीके के खिलाफ बोलना मेरी भूल है तो लोकतंत्र को बचाने के लिए मेरी ये लड़ाई जारी रहेगी।

मुझे बोलने की मिली सजा, लड़ाई जारी रखूंगा : शरद यादव
शरद यादव ने पार्टी विरोधी गतिविधि में शामिल होने के बारे में कहा मुझे राज्यसभा के लिये अयोग्य घोषित किया गया है क्योंकि मैंने लोकतांत्रिक मूल्यों का सम्मान किया है, पार्टी के संविधान का पालन किया और बिहार के 11 करोड़ लोगों के महागठबंधन के पक्ष में दिये गये जनादेश का सम्मान किया। मैं इस सिलसिले को न सिर्फ बिहार बल्कि देश की खातिर जारी रखूंगा।
राज्यसभा के सभापति के फैसले के लिए शरद यादव स्वयं जिम्मेवार : JDU
क्या कहते हैं जदयू के प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह
जदयू के प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह ने कहा कि शरद यादव पार्टी के नेता रहे पर उन्होंने सरेआम पार्टी की नीतियों और निर्देशों का उल्लंघन किया।  पार्टी के निर्देश के बावजूद वे कार्यक्रमों में शामिल नहीं हुए और जिस दिन यहां पार्टी का कार्यक्रम था उस दिन दूसरे कार्यक्रम में शामिल हुए।  ऐसा करके उन्होंने स्वेच्छा से दल का त्याग कर दिया। जदयू के वरिष्ठ नेता ने कहा कि उन्होंने जिस प्रकार का व्यवहार किया और पार्टी के निर्देशों का उल्लंघन किया उसी के अनुसार राज्यसभा के सभापति का फैसला आया है और इसके लिए वह स्वयं जिम्मेवार हैं। यह पूछे जाने पर कि क्या उनके अलग होने से पार्टी को नुकसान होगा, वशिष्ठ ने कहा कि पार्टी में उनका जनाधार नहीं होने के बावजूद उन्हें पार्टी द्वारा सम्मान दिया गया और ऐसे में जब उन्होंने स्वयं इसका उल्लंघन किया तो नुकसान किस बात का, पार्टी तो यथावत है।

शरद -अली अनवर की राज्यसभा सदस्यता जाने के बाद अब क्या ?

अब पार्टी के अंदर सवाल उठने लगा है कि शरद यादव की सीट पर अब पार्टी की तरफ से राज्यसभा कौन पहुंचेगा?अब अली अनवर और शरद यादव की राज्यसभा सदस्यता समाप्त हो जाने के बाद, जदयू की वह सीट खाली हो गयी है। शरद यादव का कार्यकाल 8 जुलाई 2016 से 7 जुलाई 2022 था।  अब उनकी सदस्यता खत्म होने के बाद किसी का चुना जाना तय है।  शरद यादव की सीट पर राज्यसभा पहुंचने वाले दावेदारों में कई नाम हैं लेकिन सूत्रों के मुताबिक इस पद के लिए जदयू के राष्ट्रीय महासचिव के सी त्यागी का नाम सबसे आगे है।  इस रेस में पार्टी के महासचिव संजय झा का भी नाम है लेकिन विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक के सी त्यागी की दावेदारी ज्यादा मजबूत है।  दोनों नेता नीतीश कुमार के काफी करीबी हैं और पार्टी के लिए दोनोें हमेशा संकटमोचक साबित हुए हैं।  केसी त्यागी को खुले मंच पर भी नीतीश कुमार के साथ अक्सर देखा जाता है लेकिन संजय झा पर्दे के पीछे से पार्टी के लिए काम करते हैं।  इतना ही नहीं बिहार जदयू के अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह के अलावा अनिल कुमार साहनी और डॉ महेंद्र प्रसाद का भी अप्रैल 2018 में राज्यसभा सीट का कार्यकाल खत्म हो रहा है।  क्या पार्टी इन लोगों को दोबारा राज्यसभा भेज पायेगी ? यह प्रश्न अभी हवा में तैर रहा है।  राजनीतिक जानकार मानते हैं कि जदयू कि इन सीटों के लिए जदयू में एक बार फिर घमसान मचने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता ?
                       आपको बता दें कि इससे पहले जुलाई 2016 में भी राज्यसभा के दो सीटों के लिए के सी त्यागी और संजय झा मजबूत दावेदार थे लेकिन पार्टी ने शरद यादव और आरसीपी सिंह पर भरोसा जताया था।  हालांकि,अली अनवर की भी सदस्यस्ता खत्म हुई है लेकिन उनका कार्यकाल 2 अप्रैल 2018 को समाप्त हो रहा है और ऐसे में उनकी सीट पर चुनाव होनेे की उम्मीद नहीं है।  महागठबंधन से नीतीश कुमार ने अलग होकर भारतीय जनता पार्टी के साथ मिलकर सरकार बनायी तो शरद यादव और अली अनवर अंसारी बिदक गए थे।  दोनों ने खुलेआम न सिर्फ नीतीश कुमार के महागठबंधन से अलग होने के फैसले की आलोचना की बल्कि नीतीश कुमार के दूसरे फैसलों का भी विरोध किया।  इतना भी नहीं राष्ट्रीय जनता दल अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव द्वारा बुलाई गई भाजपा भगाओ देश बचाओ रैली में शरद यादव और अली अनवर अंसारी ने भाग लिया था। जनता दल यूनाइटेड के राष्ट्रीय नेतृत्व द्वारा मना किए जाने के बावजूद दोनों नेताओं ने न सिर्फ रैली में भाग लिया बल्कि केंद्र और बिहार सरकार को लेकर सवाल भी खड़े किए थे।

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