ईश्वर के सानिध्य से सद्गति तो संत के अपमान से जीव की होती है दुर्गति,

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भागवत भूषण दाशरथि शास्त्री,बिहटा में संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा श्रवण के लिये उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

किशोर चौहान,बिहटा(पटना)।बिहटा के शिवशक्ति नगर में गुरुवार से शुरू श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के दूसरे दिन अयोध्या से पधारे भागवत भूषण श्री दाशरथि शास्त्री जी महाराज ने सुखदेव जी के आगमन,भगवान के अवतारों का उपक्रम व राजा परीक्षित को एक संत द्वारा दिया गया श्राप के बारे में बताया।उन्होंने श्रीमद्भागवत कथा का संगीतमय प्रस्तुति करते हुए कहा कि जीव को जाने-अनजाने में भी किसी संत का अपमान नहीं करना चाहिए।राजा परीक्षित के द्वारा संत का अपमान करने के कारण ही श्राप मिला था।उन्होंने कहा कि भागवत कथा पाप से मुक्ति का मार्ग है।इसके श्रवण से जीव पाप से मुक्ति पाता है।उन्होंने नारद जी के चरित्र का वर्णन करते हुए कहा कि उन्हें संतो के आशीर्बाद से ही भगवान का पार्षद बनने का अवसर प्राप्त हुआ।भीष्म पितामह के चरित्र के माध्यम से उन्होंने बताया कि जीव की सद्गति तभी संभव है,जब उसको भगवान का सानिध्य प्राप्त हो।उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण के स्वधाम गमन का वर्णन किया।उन्होंने।कहा कि कलयुग में मनुष्य अपने संसारिक कार्य में इतना व्यस्त हो गया है कि न तो उसे सांसारिक सुख मिल रहा है और न ही मानसिक आराम।भक्ति के मार्ग से भटककर अधिकांश लोग परेशान है। कारण यह है कि नहीं उनके पास सुबह उठकर घरों में श्री मद्भागवत कथा, गीता, रामायण, हनुमान चालीसा का पाठ करने और मंदिरों में जाकर माथा टेकने का भी समय नहीं है।इंसान गुरु मंत्र धारण कर उसका जाप करे, जिससे उसका कल्याण होगा।उन्होँने कहा कि श्रीमद् भागवत कथा जीवन को श्रेष्ठ बनाने वाली सर्वोतम कथा है।इसलिये कथा श्रवण कर श्रद्धालु पुण्य के भागी बने। जिस नगरी में श्रीमद भागवत कथा सुनी जाती है वह भगवान की नगरी हो जाती है। श्रीमद भागवत कथा सुनने से वैराग व भक्ति आती है। जिस प्रकार से बीमार आदमी को दवा की जरूरत होती है। उसी प्रकार से श्रीमद भागवत इंसान की मूल जरूरत है। कार्यक्रम में मुख्य यज्ञमान पूनम शर्मा ,सहजानंद शर्मा,चंद्रावती देवी,रजनीश शर्मा ,पुष्पा देवी,गौरव कुमार,आशा कुमारी,अरबिंद सिंह,राजीव कुमार,अविनाश कुमार ,मधुबाला देवी,रम्मी कुमारी सहित सैकड़ों भक्तों ने हिस्सा लिया।

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