सारण:अक्षय सुहाग की कामना को सुहागिन महिलाओं ने वट सावित्री की पूजा-अर्चना

अक्षय सुहाग की कामना को सुहागिन महिलाओं ने वट सावित्री की पूजा-अर्चना

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सारण

बरगद के पेड़ में धागा बांध 108 बार परिक्रमा कर अखंड सुहाग की कामना

रिविलगंज।अक्षय सुहाग व पति की दीर्घायु और सेहत नेमन कि कामना को ले सुहागिन महिलाओं ने गुरुवार को वट सावित्री पूजा पर्व घुमधाम से मनाया। सुबह से ही सुहागिन महिलाओं ने शुभ मुहूर्त में पूजा-अर्चना करने के लिए सज-धजकर हाथों में पूजा के डाली,पकवान और बांस के बने पंखे के साथ बरकद के पेड़ के नीचे बैठकर पूजा-अर्चना की।

 

रिविलगंज नगर पंचायत के वार्ड नं 13 गोदना ब्रह्मटोली शिव मंदिर के प्रांगण में स्थित वट वृक्ष सहित प्रखंड क्षेत्र के बिभिन्न ग्रामीणों एवं नगर पंचायत क्षेत्रों के बरगद के पेड़ के नीचे दिन भर सुहागिन महिलाओं ने पेड़ में धागा बांध 108 बार परिक्रमा कर अखंड सुहाग की कामना की।पूजन अर्चन के दौरान सुहागिन महिलाओं में कोरोना संक्रमण की चिंता नहीं देखी गई।ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे इन महिलाओं ने पति की दीर्घायु के लिए कोरोना के डर को भी मात दे दिया हो।महिलाओं के चेहरे पर मास्क या फेस कवर भी नहीं दिखा।

 

आमतौर पर कोरोना संक्रमण को लेकर ज्यादा संजीदा रहने वाली महिलाएँ इस दौरान संक्रमण के भय से पूरी तरह मुक्त होकर पूजा अर्चना में लीन दिखी।इस दौरान कई जगहों पर पंडितों ने पूजा-अर्चना की और महिलाओं को सावित्री सत्यवान की कथा सुनाई।वही दूसरी ओर जिन सुहागिन महिलाओं को कोरोना का डर था, वो अपने अपने घरों में ही वट वृक्ष के डाली के साथ पूजा अर्चना कर पति के लंबी उम्र के साथ सुख-शान्ति और समृद्धि की मंगल कामना की।ज्योतिष साहित्य रत्न विशेषज्ञ कुंडली दर्पण पंडित श्री योगेंद्र द्विवेदी ने कहा कि वट सावित्री व्रत का पूजा-अर्चना अनादि काल से होता आ रहा हैं।

 

उन्होंने कहा कि यह उस वक्त से प्रारंभ हुआ जब सावित्री अपने पति सत्यवान की जीवन लौटाने के लिए यमराज पर विजय प्राप्त की थी।उसी वक्त से सौभग्य वती स्त्रियां अपने पति की लंबी उम्र व सुख-शांति व समृद्धि के मंगल कामना के लिए यह व्रत करती आ रही हैं।उन्होंने कहा कि सुहागिन महिलाओं के लिए यह योग विशेष फलदायी था।वट वृक्ष के पूजा अर्चना करने से सुहाग की रक्षा होती हैं एवं पति दीर्घायु होते हैं।

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