आखिर कोरोना ने दूसरी बार भारत को कैसे लिया लपेटे में ?

0 117

वरिष्ठ पत्रकार मुकेश कुमार सिंह का कोरोनानामा

आखिर कोरोना ने दूसरी बार भारत को कैसे लिया लपेटे में ?

देश को बचाने के लिए सरकार को होना होगा तटस्थ, पारदर्शी और बेहद कठोर

दिल्ली : 2020 में जब पहली बार कोरोना महामारी ने वैश्विक स्तर पर, बड़ी तबाही मचाई थी, उस समय भारत सहित कोई भी राष्ट्र कोरोना महामारी को समझने की स्थिति में नहीं था। आलम यह था कि लगभग सभी देश के वैज्ञानिक, डॉक्टर्स और मेडिकल जानकार, यह जानने और समझने में लगे थे कि आखिर यह महामारी आयी किधर से और इसका पूरा चरित्र क्या है ? पूरा मेडिकल साईंस, तरह-तरह से रिसर्च में लगा हुआ था। लेकिन असली तथ्य और कोरोना के बीजक तक पहुँचने में वैज्ञानिक आंशिक रूप से ही सफल हो पाए।

क्या पूर्व सांसद शहाबुद्दीन की मौत के बाद बिहार में टूटेगा माई समीकरण ,शहाबुद्दीन समर्थकों ने RJD की कब्र खोदने की दी धमकी ,तो तेजस्वी ने ट्वीट कर दी सफाई

 

देश के वरिष्ठ पत्रकार मुकेश कुमार सिंह
देश के वरिष्ठ पत्रकार मुकेश कुमार सिंह

किसी भी देश के बड़े से बड़े वैज्ञानिक, कोरोना के मूल तक पहुँचने में, आज तक ना तो कामयाब हो सके और ना ही उसका स्थायी निदान ही निकाल पाए हैं। 2020 की इस बड़ी विपदा ने भारत में भी बर्बादी की बड़ी लकीर खींच डाली थी। भारत अपने संस्कारों से मारा और सताया हुआ राष्ट्र है। देश के विभिन्य प्रांत, केंद्र सरकार से बिना कोई तारतम्य बिठाए, अपने-अपने तरीके से कोरोना से जंग में जुट गए। सभी प्रदेश, अपना-अपना मॉडल को बेहतर साबित करने में लगे रहे। इसका बड़ा नतीजा यह हुआ कि जंग साझा नहीं रहा और कई प्रदेशों ने इसका बेहद बुरा नतीजा झेला है। अभी कोरोना का दूसरा फेज, सबसे अधिक भारत के लिए काल बना हुआ है। इस कड़ी में यह बताना बेहद लाजिमी है कि रॉयटर्स कि एक रिपोर्ट, जो उन वैज्ञानिकों के हवाले से लिखी गई है जिसका गठन मोदी सरकार ने बीते दिसंबर माह में किया था। इस रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से लिखा गया है कि रिसर्च में जुटे वैज्ञानिकों को, फरवरी और मार्च में ही कोरोना के नये स्ट्रेन (जो अभी भारत में जानलेवा बना हुआ है) का पता चल गया था। हद तो इस बात की है कि इसकी तमाम जानकारी वैज्ञानिकों ने तत्काल ही मोदी सरकार को दे दी थी। इसके बावजूद, मोदी सरकार ने वैज्ञानिकों की बात की उपेक्षा, आखिर किस वजह से की, यह गहन जाँच का विषय है। हमारी समझ से, अगर केंद्र सरकार दूरदर्शिता दिखाती और अपने ठोस आत्मबल से, इस वायरस के फैलाव को रोकने के लिए बड़े स्तर पर तत्काल प्रतिबंध लगाती, तो आज का मंजर बिल्कुल बदला हुआ होता। जानकारी के बाबजूद, बिना मास्क लगाए लोगों ने, ना केवल धार्मिक आयोजन और राजनीतिक रैलियों में हिस्सा लिया बल्कि सार्वजनिक जगहों पर भी लोग बगैर मास्क के ही, लगातार नजर आते रहे। कुम्भ का मेला चलता रहा। आज की जो भयावह स्थिति है, यह इन्हीं वजहों से हुई है।

इधरमद्रास हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणियों के खिलाफ चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। आयोग ने एक याचिका दाखिल की है जिसमें मद्रास हाईकोर्ट की अपमानजनक टिप्पणी को हटाने की मांग की गई है। चुनाव आयोग ने याचिका में कहा है कि हाईकोर्ट खुद एक संवैधानिक एवं स्वतंत्र संस्था है जबकि चुनाव आयोग भी संवैधानिक संस्था है, इसलिए हाईकोर्ट की इस तरह की अपमानजनक टिप्पणी से हमारी छवि खराब हुई है। बता दें कि बीते 26 अप्रैल को एक सुनवाई के दौरान मद्रास हाईकोर्ट ने कहा था कि देश में कोरोना की दूसरी लहर का जिम्मेदार कोई और नहीं बल्कि आपकी संस्था है, यानि चुनाव आयोग है। कोर्ट ने आरोप लगाते हुए कहा था कि इस लापरवाह रवैये के लिए आपके अधिकारियों पर हत्या का मुकदमा दर्ज होना चाहिए। यह बात कठोर भले लगे लेकिन यह कहीं से भी गलत बात नहीं लगती है। हाईकोर्ट ने कहा था कि जब एक नागरिक जिंदा रहेगा, तभी जाकर वो उन अधिकारों का इस्तेमाल कर पाएगा, जो उसे एक लोकतंत्र में मिलते हैं। आयोग के वकील अमित शर्मा ने कहा कि हमने उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ अपील दाखिल की है। निर्वाचन आयोग ने याचिका में कहा है कि मद्रास उच्च न्यायालय की ऐसी टिप्पणी से आयोग की छवि धूमिल होती है। मद्रास उच्च न्यायालय ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा था कि चार राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेश में चुनाव के दौरान कोविड-19 नियमों का अनुपालन कराने में असफल निर्वाचन आयोग के अधिकारियों पर संभवत: हत्या का मुकदमा चलना चाहिए। यह सही है कि चुनाव के लिए कोई एक राजनीतिक पार्टी, या देश के प्रधानमंत्री भर दोषी नहीं होते हैं। इसके लिए कई राजनीतिक पार्टियाँ और चुनाव आयोग की सहमति होती है। अभी कोरोना से भारत के हालात बेहद खराब हैं। कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्यां करीब 35 लाख है, जबकि करीब सवा दो लाख कोरोना पीड़ित मरीजों की मौत हो चुकी है। कोरोना के पहले फेज के बाद, भारत लगभग कोरोना मुक्त देश की दौर में शामिल होने वाला था। लेकिन ऐसा संभव नहीं हो सका और कोरोना के दूसरे फेज का सबसे बड़ा शिकार भारत ही बन रहा है। कोरोना के पहले और दूसरे फेज के बीच केंद्र सरकार को पर्याप्त समय मिले थे। अगर सरकार गम्भीरता से चाहती, तो देश भर का मेडिकल सिस्टम, आज बेहतरीन हो जाता। सारे विकास कार्य को रोक कर, देश को चिकित्सा क्षेत्र में पूरी तरह से आत्मनिर्भर बनाया जा सकता था लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हठधर्मिता, या फिर उनके अतिवाद ने देश को पूरी तरह से मौत के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया। देश के अधिकांश सरकारी अस्पताल में या तो आईसीयू नहीं हैं, अगर कहीं हैं भी तो वे बंद पड़े हुए हैं। किसी को वेंटिलेटर का प्रयोग करना नहीं आता है। देश में, पूर्व में ही ऑक्सीजन प्लांट के जाल बिछाए जा सकते थे। हांलांकि देश के बड़े उद्योगपति घराने, विभिन्य तरीके से आम लोगों को इस संकट से उबारने में अपनी भूमिका रख रहे हैं। इसी कड़ी में, टाटा द्वारा, जहाँ रोजाना 600 टन मेडिकल आक्सिजन की जा रही है, वहीँ अब नीता अंबानी ‌भी नि:शुल्क 1000 बेड का हॉस्पिटल दे रही हैं। क्रिकेटर महेंद्र सिंह धोनी ने ऑक्सीजन सिलिंडर के लिए 15 करोड़ रुपये दिए हैं। यही नहीं, कई मंदिर ट्रस्टों ने भी ऑक्सीजन सिलिंडर और अन्य चिकित्सीय उपकरणों के लिए अरबों रुपये, सरकार को दिए हैं। इस साल भर के कालखंड पर गौर करें, तो यह साफ-साफ झलकता है कि अगर सरकार की वृहत्तर सोच होती, तो इतने समय सरकार को जरूर मिले, जिसमें नर्स और दक्ष मेडिकल कर्मियों की बड़ी खेप तैयार की जा सकती थी लेकिन जिद और अकर्मण्यता की वजह से, ऐसा कुछ भी सम्भव नहीं हो सका। देश के लोगों को यह बात बिल्कुल भी समझ में नहीं आ रही है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार, आखिर कोरोना को लेकर क्या चाह रही है? अभी देश में ऑक्सीजन प्लांट लगाने की कवायद चल रही है। यह प्लांट कब तक तैयार हो सकेगा, इस पर संसय बरकरार है। बड़ा सवाल तो यह है कि सरकार को, बीच के कालखंड में पर्याप्त समय मिला लेकिन सरकार काम करने की जगह सोई रही। अभी सिंगापुर, सऊदी अरब, भूटान और फ्रांस से ऑक्सीजन मंगाए जा रहे हैं। विश्व के 17 देश, कोरोना से जुड़ी दवाईयां भारत को मुहैया करा रही हैं। भारत को इस कोरोना संकटकाल में, अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, आयरलैंड,बेल्जियम, रोमानिया, पुर्तगाल, स्वीडन, थाईलैंड, आस्ट्रेलिया,भूटान, सिंगापुर, सऊदी अरब, हांगकांग, लक्जमबर्ग सहित कई अन्य देश मदद कर रहे हैं। कुछ भी हो और मदद कहीं से भी मिल रही है लेकिन हम यह ताल ठोंककर कहेंगे कि इस पूरी खतरनाक, बेलगाम और दर्दनाक स्थिति के लिए केंद्र सरकार का अल्पज्ञान और मनमौजीपन, पूरी तरह से जिम्मेवार है।

आखिर लॉकडाउन क्या है और क्या है इसकी उपयोगिता ?

लॉकडाउन शब्द का प्रयोग, पिछले वर्ष कोरोना आपदा के समय अधिक किया गया। इस शब्द का व्यापक अर्थ होता है “तालाबंदी” । यानि मानव-बसाव वाले जिस इलाके में लॉकडाउन किया जाता है, उस इलाके में निर्धारित सीमा के लिए आवश्यक वस्तुओं की खरीददारी भर की ईजाजत होती है। आप अनावश्यक रूप से कहीं घूम नहीं सकते हैं। यह किसी भी समय के डिजास्टर से निपटने के लिए किया जाता है। लॉकडाउन एक आपातकालीन व्यवस्था है, जो किसी आपदा या महामारी के वक्त लागू की जाती है। जिस इलाके में लॉकडाउन किया गया है, उस क्षेत्र के लोगों को घर से बाहर निकलने की अनुमति नहीं होती है। भारत में पिछले वर्ष सबसे पहले महाराष्ट्र और फिर उसके बाद राजस्थान के कुछ हिस्सों में लॉकडाउन का प्रयोग किया गया। लेकिन हमारा पिछला अनुभव यह बताता है कि लोगों ने लॉकडाउन का अर्थ पुलिस और प्रशासन से आंख-मिचौली भर समझा। इसका नतीजा यह हुआ कि लॉकडाउन, बेहद आंशिक रूप से कारगर साबित हुआ, जिसका सही फायदा किसी को नहीं मिल सका।

अभी की स्थिति में कर्फ्यू या फिर आपातकाल की है जरूरत ?

अभी देश जिस स्थिति से गुजर रहा है इसके लिए कम से कम 25 दिनों के लिए 24 घण्टे की शख्त कर्फ्यू की जरूरत है। कुछ आवश्यक सेवाएं पुलिस, प्रशासन, डिजास्टर मैनेजमेंट के लोग, सेना और अन्य वॉलेंटियर्स से लोगों को घर तक पहुंचाने की जरूरत है। लोगों को पूरी तरफ से घर में बंद रख कर, कोरोना के पूरे चेन और उसकी मारक क्षमता को खत्म करना होगा। सरकार को इस बीच पर्याप्त समय मिलेगा। इस दौरान, सरकार देश के भीतर, सर्वोत्तम चिकित्सीय व्यवस्था का ऐतिहासिक इंतजाम कर सकती है। अगर कोरोना से लोगों को बचाने के लिए, सरकार की नीयत थोड़ी भी साफ है, तो सरकार को पूरे कठोर और शख्त कदम उठाने होंगे। एक ऑक्सीजन प्लांट से ही कुछ भी होने वाला नहीं है। छोटे-छोटे चिकित्सीय प्रशिक्षण की भी जरूरत है। मशीनों को ऑपरेट करने के लिए, बहुत कुछ सीखने की जरूरत है। सरकार हंसी, ठिठौली और मजाक को बंद कर के, लोगों की जान बचाने के लिए संकल्पित होकर काम करे, तभी लोगों का जीवन महफूज रह सकेगा।

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

Leave A Reply

Your email address will not be published.

This website uses cookies to improve your experience. We'll assume you're ok with this, but you can opt-out if you wish. Accept Read More

Managed by Cotlas