गोपालगंज: बाबू साहब ने देवापुर से मुखिया के रूप में बनाई अपनी राजनीतिक पहचान- हरिवंश

सूबे के पूर्व मंत्री व बैकुंठपुर के पूर्व विधायक स्व. ब्रजकिशोर नरायण सिंह उर्फ बाबू साहब के जयंती समारोह में शामिल हुए राज्य सभा के उप सभापति

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बैकुंठपुर- मुखिया के रूप में ब्रजकिशोर नारायण सिंह ने देवापुर से अपनी राजनीतिक पहचान बनाई और राज्य के मंत्री तक का पद हासिल किया। उक्त बातें राज्य सभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह ने पूर्व विधायक व मंत्री स्व. ब्रजकिशोर नारायण सिंह की 85 वीं जयंती समारोह के अवसर पर दिघवादुबौली में एक सभा को सम्बोधित करते हुए कही। इसके पूर्व बाबू साहब के प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धा सुमन अर्पित की। उन्होंने कहा कि ब्रजकिशोर बाबू ने विपरीत परिस्थितियों में समाज को बदलने का काम किया। इससे आने वाले पीढ़ियों को स्मरण करने से ही ताकत मिलेगी। राजनीति में धैर्य रखना सबसे बड़ी बात है। ब्रजकिशोर बाबू ने देवापुर से मुखिया के रूप में अपनी राजनीतिक पहचान बनाई और लंबे समय तक विधायक व दो-दो बार मंत्री रहे। उनकी पकड़ गांव की बुनियादी चीजें व उसका विकास उनका सपना बना रहा।

जब देश ने खासकर बिहार ने एक नया सपना देखा, कि समाज किस जकड़ में फंस गया है। वहां से समाज आगे कैसे जाए। इसी बीच गुजरात से आंदोलन शुरू हुआ लेकिन वह ठहर सा गया। जयप्रकाश बाबू को इस आंदोलन में एक रोशनी दिखी और जयप्रकाश जी ने आंदोलन शुरू किया। संपूर्ण क्रांति का इतिहास कम होता है कि एक व्यक्ति को दो बड़े बदलावों का नायक बनने का मौका मिलता है। जेपी 1942 के वे नायक थे, जिन्हें दिनकर ने कहा- “आग देखी कहां कि आने वाला भविष्य तुम्हारा है। अखत समां के बुझते हैं भावी इतिहास तुम्हारा है।” जयप्रकाश नारायण 74 वर्ष के उम्र में जब यह आह्वान किया कि हमारे विधायक इस्तीफा दें तो ब्रजकिशोर बाबू पहले विधायक थे, जिन्होंने इस्तीफा दिया। इससे सबसे ताकतवर प्रधानमंत्री की कुर्सी चली जाएगी यह किसी को ज्ञात नहीं था। एक मामूली पार्षद का पद भी छोड़ने के लिए कोई तैयार नहीं होगा। लेकिन बाबू साहब ने बिना किसी चिंता के विधायक की कुर्सी छोड़ दी। इससे आने वाले लोगों को सीख लेना होगा।

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उन्होंने कहा कि 1995 में बिहार आ करके एक दूसरे चक्र में फंस गया। आज जो बिहार में विकास देख रहे हैं। जो सड़कें इंफ्रास्ट्रक्चर थी, हमारी वही रही होती तो बिहार कहां होता। अगर विकास नहीं हुआ होता तो जनसंख्या के हिसाब से हम सड़कों पर चल नहीं पाते और पटना जैसे शहर में रह नहीं पाते। ब्रजकिशोर बाबू 1995 में कांग्रेस छोड़ने और नीतीश कुमार में प्रतिभा देखने का काम किया। 1974 के जेपी और 1995 में जो राजनीति की बदलाव के लिये उनमें राजनीति की बेचैनी और साहस था। वो आज के लोगों में कम दिखाई देती है। उन्होंने बाबू साहब के कार्यों के प्रति उनके नाम पर एक पुस्तक का विमोचन करने की सलाह दी। ताकि आने वाली पीढ़ी को उनका इतिहास पता चल सके और उससे सीख मिल सके। वहीं उन्होंने कहा कि लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई जयंती को पूरा देश एकता दिवस के रूप में मना रहा है। सरदार बल्लभ भाई पटेल नहीं होते तो पांच सौ बासठ लगभग रियासतों को एक करने का काम हजार वर्षों बाद भी पूरा नहीं होता।

वहीं पूर्व सांसद काली प्रसाद पांडेय ने बाबू साहेब के व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए उनके पद चिन्हों पर चलने की अपील की। साथ ही पूर्व विधायक मंजीत कुमार सिंह ने कहा कि मैं विधायक रहूं ना रहूं जनता की सेवा करना मेरा लक्ष्य है। साथ ही क्षेत्र में अपने प्रयास से किये गए कई विकास कार्यों को गिनाया। उन्होंने बताया कि 28 कड़ोर की लागत से सोनवलिया से बाबर अली के पम्प तक की सड़क का जीर्णोद्धार किया जाएगा। उस सड़क को आरईओ से पीडब्लूडी में बदलाव करा दिया गया है। मौके पर प्रदेश सचिव शैलेन्द्र प्रताप सिंह, गोपालगंज कॉपरेटिव बैंक के अध्यक्ष महेश राय, बाबर अली, अर्जुन जी, संजय पांडेय, रत्नेश कुमार सिंह, दीपक द्विवेदी शम्भूनाथ सिंह, अभय पांडेय, ललन मांझी आदि उपस्थित थे। सभा की अध्यक्षता पूर्व विधायक विद्याभूषण सिंह व मंच संचालन राजेश्वर प्रसाद राज ने किया।

रिपोर्ट:- नीरज कुमार सिंह
गोपालगंज (बिहार)

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