भागलुपर: भारत कोरोना महामारी के दूसरी लहर की चपेट में आ रहा, हम लोगों ने कोरोना महामारी के जीत की खुशी में तोड़ दिया संयम, भुगतने पड़ सकते हैं दुश्वारियां

वैक्सीन रूपी संजीवनी के साथ-साथ महामारी के दूसरी लहर को रोकने के लिए पहले से भी ज्यादा एहतियात बरतें, फेस मास्क लगाए, हैंड सेनीटाइजर का करे प्रयोग, भीड़भाड़ वाले जगहों पर जाने से बचे, ताकि कोरोना का दूसरा लहर जो तेजी से फैल रहा उसमें गिरावट हो दर्ज

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एस के झा/ मोहित कुमार की रिपोर्ट
भागलपुर: भारत कोरोना महामारी की दूसरी लहर की चपेट में पूरी तरह आ चुका है. हर दिन मामले बढ रहे है. तमाम गाइडलाइन एक बार फिर बेअसर हो रहे हैं. महाराष्ट्र, कर्नाटक, पंजाब, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, राजस्थान, दूसरी लहर के प्रकोप मे अधिक आ चुकी है. पहले की तुलना में मरीज बढ़ने की रफ्तार देखे तो तस्वीर और भी डरावनी नजर आ रही है. एक महीने पहले देश में रोज मिलने वाले मरीजों की संख्या वर्तमान समय की तुलना में काफी कम था. अब एक दिन में संक्रमित मरीजों की संख्या एक लाख से ज्यादा मिल रही है. यह स्थिति पिछले वर्ष सितंबर माह में थी.

सबसे चिंताजनक बात यह है कि इलाज करा रहे मरीजों की संख्या आठ लाख पार कर गई है. जो फरवरी में डेढ़ लाख से भी कम था. कहीं ना कहीं हम लोग कोरोना को हराने की जीत की खुशी में फिर से दुश्वारियां झेलने की दहलीज पर आकर खड़ा हो चुके हैं. हमलोगों को संयम तोड़ने का परिणाम कहीं फिर से बहुत बड़ी कुर्बानियां देकर ना चुकानी पड़े. देश के सभी राज्यों में फिर से गाइडलाइन जारी होने लगे हैं. बंदीशे फिर से अपने वापसी की ओर अग्रसर हो चुकी है. इससे साफ पता चलता है कि हम लोगों ने कोरोना को हराने की खुशी में बड़ी चूक कर रहे और लापरवाह होकर चलने लगे हैं. वैक्सीन आने के बाद हम लोग थोड़ा और सचेत रहते तो दूसरी लहर की नौबत नही आती.

– हम सतर्क रहते तो नजारा कुछ और होता,अनदेखी से बढी मुश्किल,कही लाचारी,बेबसी का मंजर ना लाकर सामने खड़ा के दे दूसरी लहर
कोरोना महामारी का दंश झेलते झेलते लोगों ने एक वर्ष का समय गुजार दिया. फिर भी वायरस से छुटकारा मिलने का नाम नहीं है. लोगों की लापरवाही फिर से डराने लगा है. इतना समय बीत जाने के बाद यदि हम पहले की तरह सतर्क रहते तो वायरस की बरसी होती. लेकिन लापरवाही ने सब कुछ चौपट कर दिया. वापस लॉकडाउन ना आ जाय.उसकी डर लोगों में सताने लगा है. काम की तलाश में दूसरे प्रदेश के लिए निकले प्रवासी मजदूर एक बार फिर अपने अपने घर की ओर लौटने लगे हैं. क्योंकि उन्होंने 2020 में लगे लॉक डाउन की वजह से हजारों मिल की पैदल यात्रा, लाचारी और बेबसी और भूख से तड़पते बच्चों का खौफनाक मंजर अपने दिलों में कहीं ना कहीं जिंदा रखा है. ठीक उसी तरह हम लोगों को भी लॉकडाउन में जिस संयम के साथ घरों में रह कर सीमित संसाधनों के बीच जीवन यापन कर कोरोना को हराने का संकल्प लिया था.
कुछ ऐसी ही स्थिति में रहकर चलना था. लेकिन एक बार फिर कहानी कुछ और बयां कर रही है. एक वर्ष की लड़ाई का दंश झेलते झेलते पूरी तरह लापरवाह हो गये. बीते एक वर्ष में कोरोना लड़ाई में हम लोगों ने जो दर्द के पहाड़ लांघे, संकट के समुद्र नापे, और बेबसी के घने अंधेरे में भी उम्मीदों के दीए जलाए बस इन्हीं बातों को दिलों जान में जिंदा रखते हुए एकजुटता दिखानी है. फिर से संयम के साथ पूर्ण रूप से दूसरी लहर से पार पाना है. अब हम लोगों के साथ कोरोना की वैक्सीन भी आ गई है. जो काफी कारगर साबित हो रही है. देश के बड़े-बड़े नेता, महामहिम, प्रधानमंत्री कोरोना की वैक्सीन लेकर इसकी पुष्टि भी कर चुके हैं. इसलिए वैक्सीन रूपी संजीवनी के साथ-साथ महामारी के दूसरी लहर को रोकने के लिए पहले से भी ज्यादा एहतियात बरतें. फेस मास्क लगाए, हैंड सेनीटाइजर का प्रयोग करें, भीड़भाड़ वाले जगहों पर जाने से बचे. ताकि कोरोना का दूसरा लहर जो तेजी से फैल रहा है उसमें कहीं ना कहीं गिरावट दर्ज किया जा सके.

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