नीतीश सरकार में कहां होगा पशुओं का इलाज,जब पशु अस्पताल ही है बदहाल

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अरविंद कुमार सिंह की एक रिपोर्ट।

मोतिहारी।

मोतिहारी के केसरिया प्रख़ड मुख्यालय स्थित परिसर में करोडौं की लागत से बने पशू चिकित्सालय पशुओं के ईलाज के लिये निर्माण कराया गया था। लेकिन इस समय आलम यह है कि पशुओं के इलाज को तो छोड़िए, डॉक्टर नहीं है। ऐसे में सुदुर ग्रामीण क्षेत्रों से लोग अपने पशू का बेहतर ईलाज कराने के लिये आते है। डॉ0 के अभाव के कारण बैरंग लौट जाते है। पशू चिकित्सालय में फोन करने पर भी डॉ0 पशू का ईलाज करने जाना मुनासीब नही समझते है। पशुओं के इलाज व कृत्रिम गर्भाधान सहित अन्य सुविधाएं न के बराबर हो गई हैं। जिससे क्षेत्र में बीमार हो रहे पशु इलाज के अभाव में दम तोड़ रहे हैं।

पशु अस्पताल की देखभाल के लिए आज तक विभाग द्वारा कोई उचित कार्यवाई नही की गई। इस आलीसान अस्पताल की हालत देखकर खुद अस्पताल अपने किस्मत पर आंसू बहा रहा है । इसे अस्पताल कहें या नूमाईस का नमूना । जो महज एक शो पिस बनकर स्थानीय प्रखंड परिसर में अपना मुकद्दर का सिकंदर होने का दावा पेश करती है। हालांकि इसमें उपस्थित सहायक चिकित्सक जनार्धन प्रसाद भी अपने आपको चिकित्सक से कम नही समझते हैं। डाक्टर के दफ्तर टेबल पर पैर रख कर बैठते हैं। मानो कि मुगल सलतनत के बादशाह बैठे हो। इस संदर्भ में स्थानीय बीडीओ आभा कुमारी को पूछने पर बात को टाल दिया गया। चिकित्सक के अनूपस्थिति पर भी कुछ कहने से परहेज किया। वहीं राजद के प्रखंड अध्यक्ष मो0 हातिम खां ने तत्कालीन सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि स्थानीय पशु चिकित्सालय में कभी भी किसी पशूओं को इलाज करते नहीं देखा गया है। वहीं बरसात के महीने में यह अस्पताल जलमग्न हो जाता है। वहीं चिकित्सक भी मौजूद नहीं रहते है जो उच्चस्तरीय जांच का विषय है। हलांकि सरकार द्वारा पशुओं की हालत सुधारने के लिए कई अलग अलग नियम व शर्तें लगा रही है। लेकिन उनके इलाज के लिए क्षेत्र का एकमात्र पशु अस्पताल जो चिकित्सक के आभाव में बदहाली पर आंसू बहा शिकार बना है।

चिंता का विषय है कि जब पशु अस्पताल की हालत नहीं सुधरेगी तो वहां पशुओं की हालत कैसे सुधारी जाएगी।

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siwan
Farbisganj
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