अपनी 15 सूत्री मांगों को लेकर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता करेंगी 8 जनवरी को एक दिवसीय राज्यव्यापी हड़ताल

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बिहार राज्य आंगनबाड़ी संयुक्त संघर्ष समिति ने एक दिवसीय हड़ताल हेतु निदेशक, मुख्यमंत्री,मंत्री समाज कल्याण,प्रधान सचिव, सभी जिला पदाधिकारियों व जिला प्रोग्राम पदाधिकारी  को पत्र प्रेषित कर किया है सूचित।

सी.के.झा ।

पटना।
बिहार राज्य आंगनबाड़ी संयुक्त संघर्ष समिति के तत्वावधान में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की 15 सूत्री मांगों की पूर्ति हेतु 8 जनवरी 2020 को एक दिवसीय राज्यव्यापी हड़ताल की जानकारी समिति के प्रदेश महामंत्री कुमार विन्देश्वर सिंह ने पत्र संख्या- 1/20आ दिनांक- 02/01/2020 द्वाारा प्रेषित कर दी है। बता दें कि पत्र में कहा गया है कि एक ओर  केंद्र व राज्य सरकार समाज के सभी वर्गों को समेकित विकास हेतु विभिन्न प्रकार की योजनाएं चला रही है, वहीं दूसरी ओर आंगनबाड़ी सेविका व सहायिकाओं बहुत निम्न मानदेय पर अपनी सेवाएं दे रही है।

बढ़ती हुई भयंकर महंगाई में सरकार के अंतर्गत आने वाले विभिन्न कार्यालयों में अधिकारियों एवं कर्मचारियों को सातवें वेतन आयोग की अनुशंसानुसार वेतन वृद्धि के साथ साथ समय-समय पर उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के आधार पर महंगाई भत्ता की बढ़ी राशि भी दी जा रही है। इसमें  विडंबना यह है कि सेविका-सहायिकाओं द्वारा की गई संघर्षों के बावजूद भी उनके मानदेय वृद्धि नहीं किया जाना सरकार की सोच पर प्रश्नचिन्ह खड़ा कर रहा है?

सेविका-सहायिका का होता है शोषण–

♥️जिसमें अनेक प्रकार से सेविकाओं-सहायिकाओं को  डरा धमकाकर काम करवाना।

♥️शोषण उत्पीड़न के नाम पर आरोपित करते हुए चयन मुक्त करना।

♥️निर्धारित 4 घंटे की जगह 8 घंटे से अधिक काम लिया जाना।

♥️सभी प्रकार के कार्यों में पदाधिकारियों के आदेश पर रोक देना।

उक्त परिस्थितियों में एआईटीयूसी (एटक) एवं सीआइसटीयू (सीटू) से संबंध आंगनबाड़ी संगठनों द्वारा गठित बिहार राज्य आंगनबाड़ी संघर्ष समिति बिहार पटना के तत्वावधान में इनके हक के लिए आवाज देने हेतु तैयार है।

हड़ताल और प्रर्दशन क्यों ?

आंगनबाड़ी सेविका-सहायिका को सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने, जब तक दर्जा नहीं मिलती ₹21000 मानदेय राशि देने सहित 15 सूत्री मांगों को लेकर आगामी 8 जनवरी 2020 को राज्यव्यापी एकदिवसीय हड़ताल व विशाल प्रदर्शन करने का निर्णय दिनांक 23/12/ 2019 को संयुक्त संघर्ष समिति की राज्य स्तरीय बैठक में लिया गया है।

समिति की 15 सूत्री मुख्य मांगे–

♦️आंगनबाड़ी सेविका-सहायिका को सरकारी कर्मचारी का दर्जा देते हुए सेविका को समायोजित किया जाए।

♦️जब तक सरकारी कर्मचारी का दर्जा नहीं मिलता सेविका को मानदेय राशि दिया जाए।

♦️ 16 मई 2017 को हुए समझौता के आलोक में लंबित मांगों का शीघ्र निष्पादन किया जाए ।

♦️गोवा और तेलंगाना तथा अन्य राज्यों की भांति बिहार सरकार द्वारा 10,000 रू सेविका एवं 8000 रु सहायिका को अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि दिया जाए।

♦️सेविकाओं को पर्यवेक्षिका एवं सहायिकाओं को सेविका के पद पर शत-प्रतिशत रिक्त पदों पर पदोन्नति दिया जाए एवं उम्र सीमा समाप्त किया जाए।

♦️सेवानिवृत्ति के पश्चात मासिक सहायता राशि का लाभ सुनिश्चित किया जाए ।

♦️ आंगनबाड़ी सेविका-सहायिका का चयन मार्गदर्शिका एवं दंड प्रक्रिया कानून बनाया जाए।

♦️4 घंटे से अधिक काम के लिए मजबूर ना किया जाए अन्यथा काम का समय 8 घंटा निर्धारित किया जाए ।

♦️समान काम के लिए समान वेतन प्रणाली लागू किया जाए तथा मिनी आंगनबाड़ी केंद्रों की सेविका को भी समान मानदेय दिया जाए ।

♦️हड़ताल अवधि का मानदेय ना काटकर छुट्टी एवं कार्य में समायोजन किया जाए।

♦️निर्धारित कर्तव्यों के अतिरिक्त अन्य कार्यों में प्रतिनियुक्त नहीं करने से संबंधित विभागीय परिपत्र संख्या 768 दिनांक 27/02/ 2012 का अनुपालन सुनिश्चित किया जाए।

♦️यदि हो तो प्रति नियुक्ति संबंधी लिखित आदेश एवं कार्य अनुरूप पारिश्रमिक का भुगतान अनिवार्य रूप से किया जाए।

♦️डीबीटी से पूर्व जो बाकी मानदेय है उसे एकमुश्त उपलब्ध किया जाए ।

♦️सेविका-सहायिका के आश्रितों को चार लाख की अनुग्रह राशि समय 3 महीने के अंदर दिया जाए।

♦️विलंब करने वाले पदाधिकारियों पर कार्यवाही सुनिश्चित की जाए ।

♦️मोबाइल की जवाबदेही से सेविकाओं को मुक्त किया जाए, क्योंकि मोबाइल की आपूर्ति घटिया किस्म की है और बैलेंस तथा सिम का पैसा भी उपलब्ध नहीं कराया जाता है।

♦️आंगनबाड़ी का किसी तरह का निजीकरण नहीं किया जाए और जीविका, गैर सरकारी संगठनों एवं सहायता समूह तथा कारपोरेट आदि को सौंपने की साजिश पर रोक लगाई जाए।

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संगम बाबा
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