कोशिशें हुयी सफल, शबनम खातून ने स्वीकारा परिवार नियोजन की जरूरत

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• 9 बच्चों के बाद लगवाया ‘अंतरा’ इंजेक्शन
• स्वास्थ्य विभाग तथा केयर इंडिया के निरंतर प्रयास से मिली सफ़लता

बिहार न्यूज लाइव टीम।
पटना/सहरसा।

बच्चे तो कुदरत की देन होते हैं। इसे रोकने का हक़ हमें नहीं हो सकता है। कुछ ऐसे ही तर्क सौर बाजार ब्लॉक के समदा गाँव की शबनम खातून दिया करती थी। जब कोई स्वास्थ्य विभाग का कार्यकर्ता उनसे परिवार नियोजन के साधन अपनाने के लिए कहता वो मना कर देती। परिवार नियोजन साधनों के इस्तेमाल नहीं करने के कारण शबनम खातून के 9 बच्चे भी हो गए. जिसमें 3 बच्चों की मौत भी हो गयी।

शेष 6 बच्चे भी काफ़ी कमजोर हो गए। इन तमाम परेशानियों के बाद भी शबनम खातून ने सामाजिक एवं सांस्कृतिक भ्रांतियों के कारण परिवार नियोजन साधनों को नहीं अपनाया। यद्यपि गाँव की आशा ने शबनम खातून को अपने स्तर पर समझाने की काफ़ी कोशिशें की लेकिन आशा को भी असफलता ही मिली। केयर इंडिया के परिवार नियोजन समन्वयक श्रवण कुमार ने इसे काफ़ी गंभीरता से लिया। निरंतर 1 महीने तक प्रत्येक दिन शबनम खातून के घर जाकर उन्हें परिवार नियोजन के साधनों की जरूरत पर समझाया। इससे शबनम खातून में बदलाव आया और उन्होंने ‘अंतरा’ इंजेक्शन लगवाकर परिवार नियोजन के उद्देश्यों की प्राप्ति में महत्वपूर्ण योगदान दिया। 

काश पहले ही कोई साधन अपनायी होती– 

शबनम खातून ने बताया जागरूकता के आभाव में वह परिवार नियोजन साधनों को अपनाने से इंकार करती रही। इससे परिवार में 9 बच्चे भी हो गए, जिसमें 3 बच्चों की मौत भी हो गयी। उन्होंने बताया काश पहले ही परिवार नियोजन के साधन अपनाई होती तो ऐसी स्थिति का सामना नहीं करना पड़ता। अंतरा इंजेक्शन लगाने के बाद वह अब 3 महीने के लिए निश्चिंत हो गयी है। इसलिए वह आगे भी परिवार नियोजन के साधन को अपनाएगी। 

परिवार नियोजन पर लोगों को जागरूक करने का निरंतर प्रयास– 

केयर इंडिया के परिवार नियोजन के जिला समन्वयक श्रवण कुमार ने बताया शबनम खातून जैसी अभी भी समुदाय में कई महिलाएं हैं जो परिवार नियोजन के फायदों से अवगत नहीं है। इसको लेकर वह स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से निरंतर लोगों को जागरूक करने का प्रयास करते हैं। कुछ सामाजिक भ्रांतियों के कारण लोग परिवार नियोजन के साधनों को अपनाने से मना करते हैं।

इसके पीछे कारण यह है कि लोग परिवार नियोजन को सिर्फ जनसंख्या स्थिरीकरण से ही जोड़ कर देखते हैं। लेकिन परिवार नियोजन का उद्देश्य सिर्फ जनसंख्या स्थिरीकरण तक ही सीमित नहीं है बल्कि यह बेहतर प्रजनन स्वास्थ्य के लिए भी जरुरी है। दो बच्चों के जन्म में 2 साल से कम अंतराल रहने से माता के साथ जन्म लेने वाले शिशु के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल असर पड़ता है। इसलिए परिवार नियोजन के स्थायी साधनों के साथ अस्थायी साधनों को लेकर भी समुदाय में जागरूकता बढ़ाने पर ज़ोर दिया जा रहा है।

बदलाव का मिल रहा संकेत– 

समदा गाँव की आशा अर्पणा कुमारी ने बताया शबनम खातून द्वारा परिवार नियोजन साधन को अपनाना एक अच्छी ख़बर है। इससे आस-पास के लोगों में भी परिवार नियोजन साधनों के इस्तेमाल पर एक मजबूत संदेश जाएगा। ऐसे धीरे-धीरे समुदाय में लोगों का परिवार नियोजन के साधनों के प्रति भ्रांतियाँ ख़त्म हो रही है। उन्होंने बताया वह गृह भ्रमण के दौरान महिलाओं को परिवार नियोजन के सभी स्थायी एवं अस्थायी साधनों के बारे में जानकारी देती है।

इससे बदलाव भी दिख रहा है, महिलाएं परिवार नियोजन साधनों की माँग भी करने लगी हैं।

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