चतुर्दिक विकास के लिए तरस रहा है छपरा शहर व जिला

0 75

 

बिहार न्यूज लाईव\ डॉ. विद्या भूषण श्रीवास्तव छपरा कार्यालय। उत्तर बिहार का प्रमुख शहर चतुर्दिक विकास को लेकर आज भी तरस रहा है।
कई संभावित योजनाएं ऐसी है जो कई वर्षों से लंबित है। इस शहर को कौन कहे जिला को जो भी सौगात मिली है वह राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद की देन है।हालांकि एन डी ए से जुड़े नेताओ की प्रयास तो अवश्य रहती है मगर सफलता नहीं मिल पा रही है। अभी तक सुव्यवस्थित तरीके से छपरा से दिघवारा तक राष्ट्रीय मार्ग को संवारा नहीं गया ।छपरा से डोरीगंज,अवतारनगर तक तो सड़क और खराब है।
वैसे,स्थानीय भाजपा सांसद एवं पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव प्रताप रूडी इसके लिए काफी प्रयासरत है। इस शहर की जो माली हालात है वह यहां की बुनियादी समस्या है। नगर निगम होने के बाद भी साफ् सफाई न के बराबर है।कई नालियां जल जमाव से त्रस्त है बज बजाती नालियां यहां की जटिल समस्या बन गई है।सभी मुहल्लों एवं मुख्य सड़कें अतिक्रमण की भेंट चढ़ गई है प्रशासनिक शिकंजा का भी कोई भय नहीं है।सड़को के किनारे एवं नालियों के ऊपर फुटपाथी दुकानें यहां दुल्हन की तरह सजती व संवारती दिखती है।स्थानीय पुलिस मूकदर्शक बनी रह्ती है। सदर अस्पताल तो दलालों के अड्डा बना हुआ है।यूं कहें ,एम्बुलेंस चालको की खास रॉब रहता है।सौ मे साठ से अस्सी प्रतिशत यहां से मरीज रेफर होते है।सुविधा और उपलब्धि गिनाएं अवश्य जाते है मगर धरातल पर कुछ और है।
कई ट्रेनों का घोर अभाव

 

आज भी छपरा जंक्शन से देहरादून,हरिद्वार ,केरल,पूणा भुवनेश्वर,बंगलुरू आदि प्रमुख शहरों के लिए कोई खास ट्रेन नहीं है यहां तक प्रतिदिन यात्रा करने के लिए सुबह शाम इंटरसिटी ट्रेन नहीं है। ।छपरा ग्रामीण स्टेशन पर ट्रेनों का ठहराव तक नहीं हो पाया है।जिससे यात्रियों व विद्यार्थियों को काफी परेशानी होती है।इस स्टेशन पर ट्रेनों के ठहराव के लिए जय प्रकाश विश्वविद्यालय,छपरा के कुलपति प्रोफेसर फारूक अली ने रेल प्रशासन को पत्र भी भेजा था ,कई सामाजिक,सांस्कृतिक साहित्यिक एवं राकनीतिक संगठमो से जुड़े प्रतिनिधियों ने भी पत्र लिखा था मगर अब तक कोई सकारात्मक परिणाम सने नहीं आया।छपरा जंक्शन का उत्तरी दिशा में कोई न तो रास्ता निकला और न ही रेलवे काउंटर खुला। कई रेलवे फाटक पर उपरिगामी पल नहीं बना ।श्यामचक के पास निर्माणाधीन है।
दो योजनाओं ने शहर के कई मुहल्लों की सड़कों को किया जीर्ण शीर्ण

शहर में नल जल योजना व गैस पाइप लाइन अवश्य उपयोगी व सकारात्मक कदम है मगर इन दो योजनाओं ने शहर की सड़कों को तहस नहस कर दिया इसमें कोई शक नहीं है। नगर निगम की आय होने एवं राज्य एवं केंद्र सरकार की तमाम योजनाओं से लाभ होने कर बाद भी कोई उचित कदम नहीं उठा पा रहा है।नगर निगम के संभावित चुनाव को देखते हुए कई समाजसेवी एवं राजनीतिक कार्यकर्ता मेयर ,उप – मेयर एवं वार्ड पार्षद पद को लेकर सक्रिय अवश्य हैं गर नगर निगम के वार्ड वासियों की तरफ एक आईने से अवश्य देखना चाहिए। सुंदर शिशु पार्क,क्रीड़ा मैदान,संगोष्टी सेमिनार परिचर्चा लायक हॉल का आज भी घोर अभाव है।

राजद सुप्रीमो ने दी थी कई सौगात
राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद ने जिला में रेल पहिया कारखाना, रेल इंजन फैक्ट्री,जय प्रकाश विश्वविद्यालय,छपरा आरा पुल तो एक सौगात के रूप में अवश्य दी है मगर उनकी सभी स्कूलों व कॉलेजों को दी गई बसें बेकार हो गई।इस बीच सांसद राजीव प्रताप रूडी ने कई महत्वपूर्ण सड़को की सौगात देकर एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है यही नहो कई महत्वपूर्ण पल पुलिया भी दी ही है।उनकी एम्बुलेंस सेवा काफी सार्थक सिद्ध हो रही है।मगर शहर को विकसित करने ले लिए एक पहल की आवश्यकता है।उनके संसदीय क्षेत्र के कई धार्मिक,सांस्कृतिक,पौराणिक एवं ऐतिहासिक धरोहर है जो जीर्ण शीर्ण अवस्था में है जिनमे रिविलगंज,छपरा शहर,डोरीगंज चिरांद,दिघवारा,सोनपुर,मढ़ौरा एवं अमनौर के मठ मंदिर और तालाब है जिसे संवारने की आवश्यकता है।अब तो कई लोग एवं धार्मिक व सामाजिक मंच उपेक्षापूर्ण नीति के कारण आगे आने लग्र है।रिविलगंज के उदय नारायण सिंह,अभिषेक शर्मा,धनंजय उदय,भवर किशोर, संतोष कुमार सिंह,रूपेश कुमार श्रीवज़तव,छपरा के सत्यप्रकाश यादव,डॉ संजीव कुमार सिंह ,अरुण सिंह, संतोष कुमार महतो, डॉ हरेन्द्र सिंह,ओम प्रकाश गुप्ता , चिरांद के श्रीराम त्तिवारी,के अलावा कई लोग अपने अपने क्षेत्र में दे है।

: इस बीच सारण जिला निवासी एवं ऋषिकेश स्थित रानी मंदिर ( देवराहा संत बाबा आश्रम) के प्रबंधक बीरेंद्र कुमार सिंह ने एक मुलाकात के दौरान बताया कि सारण जिला का धार्मिक ,पौराणिक ,ऐतिहासिक इतिहास पुराना है यह ग्रंथो में उल्लेखित है इस क्षेत्र को जितना विकास होना चाहिए उतना नहीं हो पाया।अयोध्या,काशी,मथुरा,वृंदावन,हरिद्वार,ऋषिकेश की तरह विकसित होना चाहिए। प्रमुख नदियों गंगा,सरयू गंडक से घिरा सारण जिला में नदियो के किनारे सड़क एवं पड़ाव स्थल बनाना चाहिए ताकि पर्यटन का स्वरूप दिख सके। मठ मंदिरों को विकसित करना चाहिए।
बहरहाल,आज भी छपरा शहर समुचित विकास के लिए तरस रहा है।एक उचित मार्ग दर्शक के रूप में उद्धारक की बाट जोह रहा है चाहे वह सामजसेवी हो या जन प्रतिनिधि ही क्यों न जो।कई लोगों ने स्थानीय सांसद सहित बिहार सरकार से भी उम्मीद बांधे रखे है।देखना है छपरा शहर या जिला की तस्वीर कब संवरती है यह तो समय बताएगा।

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

Leave A Reply

This website uses cookies to improve your experience. We'll assume you're ok with this, but you can opt-out if you wish. Accept Read More

Managed by Cotlas