कृषि क्षेत्र को विकसित किए बगैर संभव नहीं विकसित राष्ट्र का सपना

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एक तरफ रोजगार मांगते देश के युवा तो वहीं दूसरी और रोजगार के अवसर उत्पन्न करने में अक्षम हमारी सरकार। एक तरफ बाजारों में महंगे बिक रहे अनाज,फल और सब्जियों से बने उत्पाद,तो वहीं दूसरी ओर भूखे मरने को विवश हमारे किसान।एक रुपए के आलू के चिप्स दस रुपए या उससे भी महंगे में मिल रहे हैं,तो एक रुपए के मक्के से बने पॉपकॉर्न 10 या 20 रुपए में बाजार में मिल रहे हैं।विभिन्न अनाजों से बने फूड प्रोडक्ट बाजार में काफी महंगे मिलते हैं।होर्लिक्स, बोर्नविटा,दलिया,ओट्स वगैरह-वगैरह।जबकि हमारे देश के किसान आज इतने मजबूर हैं कि आत्महत्या कर रहे हैं।इतने विवश हैं कि बच्चों को अच्छी शिक्षा नहीं दे पा रहे,बेटियों की शादी अच्छे से नहीं कर पा रहे हैं,पैसों के अभाव में इलाज नहीं करवा रहे हैं।ये सच है कि आज हिन्दुस्तान का किसान सबसे अधिक मजबूर,लाचार और बेचारा है।कृषि उत्पादों से प्रोडक्ट्स तैयार करने वाली फैक्ट्रियों को सरकार की ओर से कई तरह की सुविधाएं दी जा रही हैं।ऐसे उद्योगों को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार बहुत कुछ करती है।वहीं दूसरी ओर आज पूरे देश में किसान विभिन्न प्रकार की समस्याओं के लिए आंदोलन कर रहे हैं,जिसको सरकार कोई तवज्जो नहीं दे रही।उल्टे इन आंदोलनों को राजनीतिक रंग देकर अपना उल्लू सीधा कर रही है।

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बिहार में पिछले छह माह से मक्का उत्पादक किसान विभिन्न प्रकार से शांतिपूर्वक धरना, जल सत्याग्रह और अन्य लोकतांत्रिक तरीके से विरोध प्रदर्शन कर रहे थे।लेकिन उनकी मांगों की ओर सरकार ने कोई ध्यान नहीं दिया।किसानों को मक्के की सही कीमत नहीं मिली और लागत से भी कम मूल्य में किसानों को मक्का बेचना पड़ा।सरकार की एमएससी की बात हवा-हवाई साबित हुई।पिछले कुछ वर्षों से दलहन उत्पादक किसानों की हालत भी दयनीय है।केंद्र सरकार की नीतियों की वजह से किसानों को काफी कम कीमत में मसूर बेचना पड़ा और किसान खून के घूंट पीकर रह गए।एक लाख छह हजार हेक्टेयर में फैला मोकामा-बड़हिया टाल क्षेत्र,जो दलहन उत्पाद के लिए पूरे विश्व में जाना जाता है।आज वहां के किसान परेशान हैं,चिंतित हैं,क्योंकि बुआई का समय आ जाने के बाद भी टाल क्षेत्र जलमग्न है।ये समस्या कोई नई नहीं है।बावजूद प्रदेश सरकार या केंद्र सरकार ने इसके स्थाई समाधान के लिए आज तक कुछ भी नहीं किया। पिछले वर्ष भी टाल क्षेत्र के करीब दस हजार एकड़ में बुआई नहीं हो पाई थी और किसान कर्ज तले दबे जा रहे हैं।आने वाले वर्षों में ये समस्या और बढ़ने की सम्भवना है।सरकार वर्षों से टाल समस्या के स्थायी समाधान की बात तो करती है लेकिन वो बात से आगे नहीं बढ़ पाई है।बिहार के धान उत्पादन करने वाले क्षेत्र में भी किसानों की कई समस्याएं हैं।सबसे बड़ी दिक्कत बाजार की है।सरकार ने एमएसपी तो लागू किया हुआ है, लेकिन एक तो एमएसपी पर सरकार सारे किसानों का अनाज खरीदती नहीं है,दूसरी उन्हें भुगतान सहित कई अन्य समस्याओं का सामना करना पड़ता है।सरकार की ओर से किसानों के लिए कई प्रकार की घोषणाएं की जाती है।लेकिन उसका कितना लाभ किसानों को मिल पाता है,ये देखना महत्वपूर्ण है।बिहार में आज पूरा का पूरा तंत्र भ्रष्टाचार में आकंठ डूबा है।जिससे सरकारी योजनाएं किसानों तक पहुंच ही नहीं पाती हैं।

अंचल कार्यालय में बैठे दलाल जमीन के कागजात उल्टा-पुल्टा कर किसानों को परेशान करते हैं।वक्त के साथ किसानों को आधुनिक खेती की जानकारी नहीं हो पाई है।लेकिन सरकार ने भी इसके लिए कोई प्रयास नहीं किए।प्रदेश के कृषि अनुसंधान केंद्र और कृषि विज्ञान केंद्र सुविधाओं का रोना रो रहे हैं।कृषि वैज्ञानिक किसानों तक पहुंच नहीं रहे।किसान कहीं महंगे बीज के नाम पर ठगे जाते हैं तो कहीं महंगे और गैर आवश्यक रसायन के नाम पर ठगे जाते हैं।

पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने ‘जय जवान-जय किसान’ का नारा दिया था,तो वर्तमान प्रधानमंत्री ने किसानों की आय दोगुनी करने का वादा किया था।लेकिन ये हकीकत है कि किसी भी सरकार ने आज तक किसानों की सुध नहीं ली,न ही देश में कृषि को उद्योग की तरह विकसित करने का प्रयास किया।पिछले दो दशक में सोने-चांदी और विलासिता के अन्य चीजों की कीमत आसमान छू रही है।वहीं किसानों के उत्पाद की कीमत थोड़ी बहुत ही बढ़ी है।जबकि कृषि में खर्च लगातार बढ़ता जा रहा है।बीज,रसायन और अन्य चीजें काफी महंगी हो गई हैं और खेती में किसानों की लागत काफी बढ़ गई है।जबकि उन्हें अनाज की उचित कीमत नहीं मिल पा रही है।
आज देश में बेरोजगारी सबसे बड़ी समस्या है।सरकार युवाओं को रोजगार देने में नाकाम साबित हुई है।जबकि सरकार को ये समझना चाहिए कि कृषि क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं।जितनी गंभीर सरकार गैर जरूरी चीजों के लिए है,यदि उतनी गंभीर हमारी सरकार किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए होती तो न केवल रोजगार की समस्या दूर होती,बल्कि हमारा देश आज समृद्ध होता।

सरकार को करना क्या है,बस किसानों को सुविधा देनी है।किसानों को उसकी जमीन के मालिकाना हक के कागज दुरुस्त करना है,जिससे किसानों को जमीन के कागजात के लिए बेवजह सरकारी कार्यालयों के चक्कर न लगाना पड़े,न ही दलालों को रिश्वत देनी पड़े।हर खेत में सरकार की ओर से सिंचाई की समुचित व्यवस्था की आवश्यकता है।किसानों को सरकारी केंद्रों से उचित मूल्य पर हर फसल के उत्तम क्वालिटी के बीज उपलब्ध कराने की आवश्यकता है।खाद एवं रसायन के उचित मूल्य पर उपलब्ध होने की आवश्यकता है।कृषि यंत्रों पर सब्सिडी के साथ ही साथ सरकार की ओर से भी कृषि यंत्र उपलब्ध करवाए जाने की आवश्यकता है।हर पंचायत में कृषि वैज्ञानिक या कृषि विशेषज्ञ और कृषि पैथोलॉजी के स्थापना की आवश्यकता है।किसानों के उत्पाद के खरीद की उचित व्यवस्था हो और उन्हें समय पर उसका भुगतान हो जाए, इसकी व्यवस्था करने की आवश्यकता है।फिर देश का किसान खुशहाल होगा तो ही पूरा देश खुशहाल होगा।खेती में भी उचित लाभ होगा तो नई पीढ़ी खेती से जुड़ पाएगी और तभी बेरोजगारी की समस्या दूर होगी।कृषि को प्रोत्साहित कर एक साथ देश की कई समस्याओं को दूर किया जा सकता है।बावजूद सरकार इसके लिए क्यों उदासीन है,ये समझ से परे है। हमारे देश के,हमारे प्रदेश के नीति निर्माताओं को गंभीरता पूर्वक इस पर विचार करना चाहिए।हमें मंदिर की भी आवश्यकता है,हमें मस्जिद की भी आवश्यकता है,हमें पार्क,म्यूजियम, सरदार पटेल की मूर्ति और बुलेट ट्रेन की भी आवश्यकता है।लेकिन प्राथमिकता यदि किसान हो,कृषि हो तो ही ये सारी चीजें शोभा देती हैं।सरकार को गम्भीरता पूर्वक कृषि क्षेत्र को विकसित करने पर विचार करना चाहिए।तभी देश आगे बढ़ेगा, बेरोजगारी की समस्या सहित एक साथ कई समस्याएं दूर हो सकेगी।

अनुभव सिंह,
वरिष्ठ पत्रकार।

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संगम बाबा
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