होती है हर मुरादें पूरी माता सती हीरमती के दरबार में, सालों भर लगा रहता है श्रद्धालुओं का तांता

गुमनामी की मार झेल रहा है सदियों पुराना किला, बगल में ही है, माता सती हीरमती महारानी का दिव्य स्थान

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दो बार उठा ले गए थे चोर, फिर भी यथा स्थान पर स्थापित है माता की मूर्ति

जी हां आज मैं उसी दिव्य स्थान के बारे में बताने जा रहा हूँ। जिसे लोग माता सती हीरमती महारानी के स्थान के नाम से जानते हैं। वैसे तो माता के संबंध में कई किवदंतियां प्रचलित है पर इसके इतिहास के विषय में शायद कम ही लोगों को पता होगा।

तो चलिए जानते हैं क्या है इस चमत्कारी स्थान का इतिहास

पंचदेवरी- आप की जानकारी के लिए बता दें कि माता के स्थान के नीचे एक बहुत बड़े भवन का भग्नावशेष दबा पड़ा है। जिसके वर्गाकार ईंटें व चौड़ी-चौड़ी दिवारें हम आज भी देख सकते हैं। कुछ लोगों का मानना है कि किले का इतिहास मौर्य काल से भी पुराना है, पर यहां किसका है। इसकी सटीक जानकारी नहीं मिल पाती। यदि हम इतिहास की ही बात करें तो आज से लगभग ढाई हजार वर्ष पहले मौर्य काल का समय माना गया है। यानी ईसा से 322 वर्ष पूर्व ? वैसे भी बिहार का इतिहास काफी समृद्धशाली रहा है। चीनी यात्री व्हेनसांग ने अपनी पुस्तक ‘सी-यू-की’ में लिखता है कि मैं जब मगध (पटना) पहुंचा तो मुझे ऐसा लगा कि मैं किसी दूसरे लोक में आ गया हूं। वर्तमान में तो अभी उस समृद्धसाली इतिहास के हमारे पास भग्नावशेष ही बचे हैं। तो कहीं वह भी नहीं।

हां, कुछ साक्ष्य के रूप में टीले- चबूतरे बचे हुए हैं। जो आज भी गुमनामी की मार झेल रहे हैं। उन्हीं में से एक है गोपालगंज जिले के आमेया गांव में माता सती हीरमती रानी का स्थान ? यह वही स्थान है जहां की मूर्ति चोर दो बार जड़ से उखाड़ ले गए। फिर भी माता की मूर्ति यथा स्थान स्थित है। आपको बता दें कि सबसे पहले इसे चोरों ने वर्ष 1997 में उखाड़ लिया था। जिसके बाद उत्तर प्रदेश व बिहार पुलिस की संयुक्त टीम ने, जिसकी पटहेरवा थानाध्यक्ष कासिम अली अगुवाई कर रहे थे। इसे विदेशी तस्करों से वर्ष 2000 में बरामद कर लिया। उसके कुछ ही वर्षों बाद वर्ष 2013 में चोरों ने छेनी- हथौड़ी से मूर्ति को निशाना बनाया पर कामयाबी नहीं मिली।

तीसरी बार वर्ष 2017 में तो चोरों ने सारी हदें पार कर दी। जब माता की मूर्ति हिला न सके तो उन्होंने उसे खंडित कर दिया और उठा ले गए पर इस बार भी वे नहीं बच पाए। पंद्रह दिनों के भीतर एसडीपीओ इम्तियाज अहमद, इंस्पेक्टर बी. पी. आलोक व कटेया थानाध्यक्ष कुमार रजनीकांत ने सघन तलाशी कर मूर्ति बरामद कर ली और चोर सलाखों के पीछे चले गए। यह माता का चमत्कार नहीं तो और क्या? बताया जा रहा है कि जिन लोगों ने मूर्ति को हाथ लगाया। आज वह कहीं के नहीं रह गए हैं। यही वजह है कि यहां हर वक्त श्रद्धालुओं का जमावड़ा लगा रहता है और माता उनकी हर मुरादें पूरी करती हैं।

रिपोर्ट:- रंजीत कुमार मिश्र
पंचदेवरी (गोपालगंज)

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siwan
Farbisganj
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