फेसबुक पर छाया रहता है चुनावी चर्चा,समझे फेसबुक पर किसकी बन रही सरकार

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डॉ.विद्या भूषण श्रीवास्तव/सुनील पांडेय
सिताबदियारा (छपरा):लोकसभा चुनाव की घाेषणा जब नही हुई थी तब से अब तक तमाम उम्मीदवारों के लिए उनके चहेते दिन भर फेसबुक पर एक-दूसरे दल को भला-बूरा कहने वाले फेसबुक नेताओं (युवाओं) की बड़ी फौज चुनावी मैदान को सजाने में कोई कसर बाकी नहीं रखी है। सैकड़ो युवा फेसबुक पर बहस के क्रम में विकास की चर्चा संग 70 सालों के विकास का हिसाब भी मांग रहे हैं। वहीं कुछ नोटा पर अड़े हैं और वर्तमान सरकार को भला-बूरा कह रहे हैं। इस दौरान कामेंट में सवाल-जवाब भी वे खुद अलग-अलग दलों का प्रतिनिधि बनकर कर रहे हैं। खुद के समर्थन के दल की उपलब्धि बताने का दौर तो इस कदर चल रहा है मानो टीवी डिवेट हो रहा हो। दलगत सोच वाले युवा भारी संख्या में देर रात एक-दूसरे से भिड़े नजर आ रहे हैं। विरोधी प्रत्‍याशी के लिए ऐसे शब्‍दों का प्रयोग कर रहे हैं कि पूरे कुनबे में बवाल मच जाए। वहीं खुद के समर्थन के प्रत्‍याशी की तारीफ में मोटी पुस्‍तक की रचना करते भी उन्हें देर नहीं लग रही। राहुल गांधी, पीएम मोदी और अन्य शीर्ष नेताओं पर भी खुले तौर पर असहनीय टीप्पणी की जा रही है। बुद्धिजीवी मानते हैं कि नई युवा पीढ़ी अपने कैरियर से ज्‍यादा राजनीत‍ि में ही अपनी दिलचस्‍पी रख रही है। यहीं कारण है कि अधिकांश युवा भावनात्मक रूप से भी दलगत बंट चुके हैं। देश-प्रदेश की राजनीत‍ि से लेकर लोकल स्‍तर पर भी बहस में एक-दूसरे को ऊंचा और नीचा दिखाने के क्रम में वे गुस्‍से से लाल होकर वे अपनी भंड़ास इस फेसबुक पर ही निकाल रहे हैं।

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–गिरती जा रही राजनीत‍ि की गरिमा

फेसबुक पर नजर रखने वाले बहुत से बुद्धिजीवी मानते हैं कि फेसबुक किसी को भी बदनाम करने का अच्‍छा जरिया बन चुका है। यह सही नहीं है। इससे समाज में तनाव बढ़ रहा है। किसी भी राजनीति का ऐसा स्‍वरूप नहीं होना चाहिए। इससे राजनीति की गरिमा गिर रही है। यदि कोई किसी दल या पार्टी प्रत्‍याशी का समर्थक ही है तो वह अपने समर्थन के प्रत्‍याशी का बेहिचक इस माध्‍यम से भी साकारात्‍मक तरीके से प्रचार करे लेकिन किसी पर अभद्र टीप्‍पणी, असहनीय पोस्‍ट या फोटो अपलोड कर समाज या पूरे कूनबे को तनाव की आग में झोंकने का काम न करे। यूवा वर्तमान राजनीति का हिस्‍सा हैं। उन्‍हें अपने पूर्वजों के मुताबिक राजनीति के मैदान को संभालना चाहिए। न कि राजनीतिक आंगन को इतना बदरंग कर देना चाहिए कि पूरा समाज ही विषमता की आग में जलने लगे। पुलिस प्रशासन को भी ऐसे पोस्‍ट पर पैनी नजर रखने की जरूरत है। जिससे की समाज में शांति की वातावरण बनी रहे।

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