गोपालगंज: गांव में स्वास्थ्य उपकेंद्र होने के बावजूद इलाज के लिए दर-दर भटक रहे ग्रामीण

जमीन दान देने के बाद पूरा हुआ गांव में स्वास्थ्य उपकेंद्र बनने का सपना पर ग्रामीणों के स्वास्थ्य सुरक्षा की ख्वाहिश रह गई अधूरी

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गोपालगंज – आजादी से पहले जिले के बैकुंठपुर प्रखंड अंतर्गत चमनपुरा पंचायत के लोगों ने जो सपना देखा था वह आज भी उनके लिए सपना ही बना हुआ है। आजादी भी एक स्वप्न की तरह ही थी। जिसे लोगों ने घोर संघर्ष के बाद साकार कर ही लिया। परंतु वह सपना सपना ही बना रह गया, जिसे लोगों ने अपनी खुली आंखों से देखा था। वह कैसा सपना था यह जानने कि उत्सुकता मन में आ रही होगी। बताते चलें कि चमनपुरा पंचायत के ग्रामीणों ने स्वस्थ रहने का सपना देखा था और इसे सूबे का स्वास्थ्य विभाग रौंद रहा है। विभाग की लापरवाही के चलते चमनपुरा पंचायत के हजारों ग्रामीणों को इलाज के लिए दरबदर भटकना पड़ रहा है। विदित हो कि बैकुंठपुर प्रखंड अंतर्गत चमनपुरा पंचायत के वार्ड संख्या तेरह में देश के आजादी के बाद स्वास्थ्य उपकेंद्र का भवन बनकर तो तैयार हो गया, लेकिन ग्रामीणों के स्वास्थ्य सुविधा की ख्वाहिश अबतक अधूरी है।

प्रखंड मुख्यालय से करीब आठ किलोमीटर की दूरी पर बसा दक्षिणी छोर एवं सिवान जिले के सीमा से सटे इस पंचायत में कुल 15 वार्ड एवं चार गांव चांदपुर, मंगरु छपरा, हरदियां व मौजे चमनपुरा आते हैं। करीब 45 वर्ष पहले चमनपुरा गांव के ही पशुराम सिंह, उमा देवी एवं ब्यास देवी ने अपने हिस्से का सात कट्ठा जमीन गांव में अस्पताल बनवाने के नाम पर बिहार सरकार को दान दे दिया। उसके बाद से यहां जैसे-तैसे स्वास्थ्य उपकेंद्र स्थापित किया गया। गांव में स्वास्थ्य उपकेंद्र बनने से ग्रामीणों में खुशी की लहर दौड़ गई। कुछ ही दिनों में इस स्वास्थ्य उपकेंद्र में स्वास्थ्यकर्मियों की नियुक्ति हो गई। पूरे पंचायत के लोग स्वास्थ्य सुविधा का लाभ लेने लगे। लेकिन आगे चलकर धीरे-धीरे यह व्यवस्था चरमराने लगी। जिसका नतीजा हुआ कि स्वास्थ्य उपकेंद्र से कर्मी गायब हो गए। हालांकि इस स्वास्थ्य उपकेंद्र में भवनों की कमी नहीं है। केंद्र संचालन के लिए नए भवन का निर्माण कराया गया है।

इसके अलावे जल-जीवन हरियाली योजना के तहत करीब तीन वर्ष पूर्व एक अतिरिक्त भवन का निर्माण हुआ है। परन्तु यह भवन देखने भर के लिए है। यहां स्वास्थ्य सम्बंधित सेवाएं नदारद हैं। चमनपुरा गांव निवासी व सेवानिवृत फौजी 78 वर्षीय रामसेवक पांडेय ने बताया कि करीब 15 वर्षों से इस स्वास्थ्य उपकेंद्र में चिकित्सक नहीं आते हैं। जिससे गांव के लोगों को इलाज के लिए जहां- तहां भटकना पड़ता है। जिन्होंने गांव में अस्पताल खोलने की होड़ में जमीन दान दिया। उनमें पशुराम सिंह तथा उमा देवी का देहांत हो चुका है। स्वास्थ्य विभाग की कुव्यवस्था उन भूमिदाताओं के अरमानों पर पानी फेर रहा है। चमनपुरा गांव के ही हरेन्द्र पांडेय एवं रूपेश पांडेय ने बताया कि स्वास्थ्य उपकेंद्र पर स्थायी रूप से चिकित्सकों की नियुक्ति के लिए कई बार विभाग से मांग की गई। बावजूद इसके विभाग द्वारा ग्रामीणों के मांग की अनदेखी की जाती रही है।

रिपोर्ट:- नीरज कुमार सिंह
गोपालगंज (बिहार)

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