राज्यपाल ने ‘बौद्ध धर्म और पर्यावरण’ नामक पुस्तक को लोकार्पित किया

0 17
Above Post 640X165 Desktop
Above Post 320X100 Mobile

पटना:‘‘भारतीय संस्कृति पर्यावरण के संतुलन और शुद्धि के प्रति शुरू से ही सजग-सचेत रही है। हमारी वैदिक ऋचा में पृथ्वी को माता और मनुष्य को उसका पुत्र कहा गया है। प्रकृति के साथ मनुष्य के रागात्मक रिश्ते और साहचर्य को सम्पूर्ण वैदिक वांगमय में पर्याप्त सम्मान मिला है।

‘यत पिंडे तत् ब्रह्माण्डे’ की भावना से प्रेरित भारतीय मनीषा और चिन्तन-धारा ने सम्पूर्ण प्रकृति और मनुष्य के निकट संबंध को पूरी संवेदनशीलता के साथ ग्रहण किया है। बौद्ध-धर्म भी प्रकृति के साथ मनुष्य की सन्निकटता का सार्थक संदेश देनेवाला एक प्रेरणादायी पथ-प्रदर्शक है।’’ -उक्त उद्गार, महामहिम राज्यपाल श्री लाल जी टंडन ने राजभवन में आयोजित ‘बौद्ध धर्म और पर्यावरण’ नामक पुस्तक को लोकार्पित करते हुए व्यक्त किये।

डॉ॰ ध्रुव कुमार लिखित इस पुस्तक को विमोचित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि आज पर्यावरण-संतुलन पर विभिन्न तरह के खतरे मँडराने लगे हैं। उन्होंने कहा कि दुनियाँ के सामने सबसे बड़ा आगामी संकट ‘जल’ को ही लेकर आनेवाला है। जलाशय सूख रहे हैं, मिट रहे हैं। पृथ्वी से जल-निकासी कर हमने इसकी उर्वरता छीनने का अपराध किया है। अगर हम अब भी नहीं सँभले तो प्रकृति का प्रकोप झेलने को अभिशप्त होंगे। राज्यपाल ने कहा कि शुद्ध जल और प्राणवायु के बगैर मानवीय अस्तित्व की ही परिकल्पना नहीं की जा सकती।

कार्यक्रम में अपने विचार रखते हुए राज्यपाल ने कहा कि आज वायु-प्रदूषण भी एक गंभीर समस्या बनता जा रहा है। रात में स्वच्छ चाँदनी और भोर की सुगंधित मंद बयार एक सपना होती जा रही है। पूरा वायुमंडल प्रदूषित होते जा रहा है। मशीनी विकास के दौर में ध्वनि-प्रदूषण भी खतरनाक बनता जा रहा है। ऐसे में आवश्यक है कि हम बौद्ध-दर्शन में बताये गये पर्यावरण-संतुलन के संदेशों को पूरी श्रद्धा और आत्मीयता के साथ ग्रहण करें।

Middle Post 640X165 Desktop
Middle Post 320X100 Mobile

राज्यपाल ने कहा कि भगवान बुद्ध के जीवन-चरित्र से भी हमें प्रकृति के साथ अपनी निकटता बरकरार रखने की प्रेरणा मिलती है। उन्होंने कहा कि भगवान बुद्ध को संबोधि पावन पीपल वृक्ष तले मिली। कुशीनगर के समीप उपवत्तन शालवन में ही उन्होंने ‘महापरिनिर्वाण’ भी प्राप्त किया। बुद्ध सभी जीवों के प्रति अहिंसा और करूणा का भाव रखने की सीख देते हैं।

राज्यपाल ने कहा कि हमारे शास्त्रों में भी अंतरिक्ष, पृथ्वी, वनस्पति, औषधि -सबके प्रति शांति और सुव्यवस्था की कामना की गई है। राज्यपाल ने कहा है कि चिंतनपरक एवं शोधपरक साहित्य ही बहुमूल्य होता है और लोकार्पित पुस्तक में नव चिंतन और शोधपरकता-दोनों हैं, जिसके लिए लेखक बधाई के पात्र हैं।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पटना विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो॰ रास बिहारी प्रसाद सिंह ने कहा कि भगवान बुद्ध जब पाटलिपुत्र आए थे तो उन्होंने आग और पानी से इस शहर को सबसे बड़ा खतरा बताया था। प्रो॰ सिंह से संपूर्ण बौद्ध धर्म को प्राकृतिक संचेतना से जुड़ा धर्म बताया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो॰ गुलाबचन्द राम जायसवाल एवं पुस्तक के भूमिका-लेखक डॉ॰ ओ॰पी॰ जायसवाल ने भी विचारपूर्ण लेखन के लिए लेखक को बधाई दी। ‘बिहार गीत’ के रचयिता श्री सत्यनारायण ने भी लेखक के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

पुस्तक के लेखक डॉ॰ ध्रुव कुमार ने बौद्ध धर्म की प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता को व्यापक संदर्भों में रेखांकित किया। कार्यक्रम में स्वागत-भाषण प्रभात प्रकाशन के डॉ॰ पीयूष कुमार ने किया, जबकि धन्यवाद-ज्ञापन राज्यपाल के आप्त सचिव श्री संजय चौधरी ने किया।

Below Post 300X250 Mobile
Below Post 640X165 Desktop

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

Before Author Box 640X165 Desktop
Before Author Box 300X250 Mobile
Before Author Box 320X250 Mobile
After Related Post 640X165 Desktop
Comments
Loading...

This website uses cookies to improve your experience. We'll assume you're ok with this, but you can opt-out if you wish. Accept Read More