भारत को स्वर्ण पदक के लिए हरिकेश कर रहे अमेरिका में ओलम्पिक की तैयारी उनकी कहानी उसी की जुबानी

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नई दिल्ली : ओलंपिक 2021 की तैयारी चल रही है . जुलाई 2021 में होगा ओलंपिक। भारतीय युवा एथलीट हरिकेश मौर्य अमेरिका में रहकर वर्ल्ड के टॉप एथलीट के कांटेक्ट में बने है और बहुत ही हार्ड ट्रेनिंग कर रहे है। कोरोना कॉल में आर्थिक संकट की वजह से प्रशिक्षण बन्द करने की सोच रहे थे। एथलीट हरिकेश मौर्य चारों तरफ से निराश हो चुके हरिकेश को संजीवनी देने का कार्य किया। पत्रकार देवेन्द्र प्रताप सिंह कुशवाहा ने, सोशल मीडिया के माध्यम से एथलीट हरिकेश मौर्य का सम्पर्क जलालाबाद जनपद शाहजहांपुर उत्तर प्रदेश निवासी पत्रकार एवं आपका साथ हेल्पलाइन फाउंडेशन के राष्ट्रीय सचिव देवेन्द्र प्रताप सिंह कुशवाहा से हुआ, हरिकेश मौर्य ने अपने ऊपर आये आर्थिक संकट के बारे में श्री कुशवाहा को अवगत कराया। कुशवाहा ने इस बात को गम्भीरता से लिया और एक खबर देशवासियों से अपील किया। सोशल मीडिया पर पोस्ट की खबर का असर हुआ और दिल्ली में एक अखबार के संपादक श्री रतिराम कुशवाहा ने उनके लेख को दिल्ली से प्रकाशित कर दिया।

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देवेन्द्र भी लखनऊ से प्रकाशित एक हिंदी दैनिक समाचार पत्र के रिपोर्टर है। उन्होंने अपने संपादक से अनुरोध कर अपने समाचार पत्र में भी खबर प्रकाशित करा दी, खबर का असर हुआ। देशवासियों ने हरिकेश के शुभचिंतकों से सम्पर्क कर हरिकेश के बैंक अकाउंट में सहयोग राशि भेजना शुरू कर दिया। इससे हरिकेश में नया जोश पैदा हुआ खुद हरिकेश ने फ़ेसबुक पर लाइव आकर बताया की हमे देशवासियों की तरफ़ से आर्थिक सहयोग किया गया। कुछ भारतीय जो विदेश में रहते है उन्हें वाट्सएप और टेलीग्राम के माध्यम से सूचना भेजी गई। उन्होंने भी सहयोग किया। मुख्य रूप से अरविंद कुमार यह सिंगापुर में रहते है, उन्होंने सपोर्ट किया ।प्रशांत कुमार जी और , रंजन जी जोकि फ्रांस में रहते है उनका भी सहयोग मिला कुछ भारत की संस्था सम्राट अशोक क्लब और आपका साथ हेल्पलाइन फाउंडेशन (एनजीओ) भी सहयोग किया। यूपी, एमपी और गुजरात के लोगों ने सहयोग किया। ओलंपिक खेल में आज तक बिना मेडल के ही भारतीय वापस आये है। हरिकेश का सपना है कि देश को ओलंपिक में गोल्ड दिलाकर भारतवासियों को लम्बे समय से ओलंपिक में गोल्ड का सपना पूरा करना चाहते है। हरिकेश की रेस करने की स्पीड आज की तारीख में बहुत ही अच्छी चल रहा है ।हरिकेश का कहना है कि बड़े एथलीट के बीच में भागने का एक्सिपिरेंस होना चाहिए ।हमारे सारे एथलीट जो ओलंपिक जैसे खेलो में गलती करते है वैसे गलती हरिकेश नहीं करना चाहते। इसलिए वो अमेरिका में हर तरह से तैयारी वर्ल्ड के टॉप क्लास एथलीट जो गोल्डमेडल जीत चुके है हरिकेश के कांटेक्ट में बराबर बने है। हरिकेश की टाइमिंग में काफी सुधार हो रहा है। हरिकेश ने अपनी फेसबुक आईडी पर एक पोस्ट लिखी जिसका टाइटल था।

——मेरी आखरी पोस्ट आप लोग ज़रूर पढ़े

एक नॉर्मल फैमिली से आने के बावजूद हमने कभी अपने सपने को टूटने नहीं दिया ।एक छोटे से परिवार जिसमें दो भाई और दो बहन पिता एक माध्यम वर्ग के किसान जो अर्थिक हालत खराब होने के के कारण मुझे स्कूल में अच्छी पड़ाई करने का मौका नहीं दे पाए। मेरे सपने थे कि में आईएएस बनकर देश की सेवा करू। इस बारे में मै अपने पापा से हमेशा बात करता था। लेकिन मेरे पापा हमको गुस्से में बुरा भला कहते थे कि हमारे पास इतना पैसा नहीं है, की तुम आईएएस की तैयारी करो ।मन में ये सपना लेकर सोचा की मैं स्पोर्ट्स में अगर इंडिया के लिए गोल्ड जीतकर लाऊँ तो मेरे आईएएस का सपना पूरा हो सकता है। मैने अपने लाइफ में किसी काम को छोटा नहीं समझा। मेरा घर गोरखपुर जिले से 20 किमी दूर एक छोटे से गांव में हुआ था ।बचपन में हम जिस स्कूल में पढ़ते थे। उस स्कूल के सामने गेट पर हम सब्जी भी बेचते थे। स्कूल के सभी बच्चे हमें देखते थे, इस कारण हमें स्कूल के बच्चे एक गलत भावना से देखते थे। क्योंकी मैं सब्जी बेचता था, हम मौर्यवंशी है तो हम सब्जी उगाते थे। अपना स्कूल और परिवार का खर्चा निकाल सके बड़ा बेटा होने के नाते परिवार की सारी जिम्मेदारी मेरे ऊपर रहने के बाद भी मैने अपने सपने को कभी मरने नहीं दिया । आर्थिक तंगी के कारण मेरे पापा ने मुझे घर से निकाल दिया।

आज से 10 साल पहले ताकि में परिवार के लिए कुछ कमा सकूं, जैसे यूपी बिहार के बच्चों के साथ होता है। मैने बहुत कोशिश की कि मैं घर रिटर्न जाऊंगा , लेकिन मेरे पापा मुझे घर के अंदर कभी आने नहीं दिया। गुस्से में हमने अपने रिश्तेदार के घर गया, और अपनी व्यथा सुनाई कि आप लोग तो मुझे सपोर्ट करें । मैं पढ़ना चाहता हूं लेकिन किसी ने मेरी बात नहीं सुना।जैसे सबको पता है कि लोग ये सोचते है की कही मेरे सपोर्ट से हमसे आगे ना निकला जाए फिर हमें अपने दिल में दर्द पाला और स्पोर्ट्स की दुनिया में कदम रखा ।पैसा ना होने के कारण मुझे कोई कोच ट्रेनिंग नहीं देना चाहता था । ऐसे दुखी होकर में खुद ही ट्रेनिंग में सोचता था कि मेरे अंदर उतना देर तक दौड़ने करने की क्षमता होनी चाहिए । और मैं ये सोचकर रात में ट्रेनिंग करता था, और दिन में काम 2 साल मैं दुखी होकर ना परिवार से कांटेक्ट रखा ना रिश्तेदार से। 2011 में अपने कड़ी मेहनत से नागपुर में मैने पहली रेस किया और जीता । पूरे उत्तर प्रदेश का नाम रोशन किया। तब मुझे सब लोग ढूढने लगे और स्कूल के 5000 बच्चो के सामने हमें बेस्ट स्टूडेंट और बेस्ट एथलीट होने का अवॉर्ड दिया गया। उसे देखकर मेरे पिता जी के आँखो में आंसू आ गये वो खुशी से रोने लगे और बोले बेटा अगर तू मेरा बेटा नहीं होता तो हम तुम्हारे पैर पर गिर जाते। मैने बोला पिता जी गलती इंसान से होती है। आपने मुझे जन्म दिया वो मेरे लिए बहुत है। 2012 में मुझे माननीय सभापति गणेश शंकर पाण्डेय जी के हाथों से पुरस्कृत किया गया। बेस्ट ऐथलिट होने के नाते और मेरे पिता जी मेरे घर के लोग उस टाइम मौजूद थे। सबके आखो में आंसू भर गये ।अपने जिंदगी और देश का नाम इतिहास के पन्नों में दर्ज करना मेरा जिंदगी का मकसद बन गया । मैने ये सोचा कि में वो मुकाम हासिल करके आज के जो बच्चे है । उनके लिए में मोटीवेशन बनकर उभरेंगे सिर्फ हमारे टैलेंट को देखकर मुझे हर देश से ऑफर आना स्टार्ट हो गया । 2014 में वियतनाम में रेस किया 2016 में श्रीलंका में रेस किया 2017 में भूटान में किया 2017 में अमेरिका में किया 2017 में मेक्सिको में किया।

केन्या एथिपिया कई सारे देश से मुझे ऑफर मिला । मैने गवर्मेंट से कई बार मिला कई अधिकारी से मिला लेकिन मेरे जुनून का किसी ने कद्र नहीं किया। ना ही कभी कोई आर्थिक सपोर्ट नाम की चीज मिली। मैं माननीय योगी आदित्यनाथ से भी मिला जब वो सांसद थे गोरखपुर में लेकिन वहा भी निराशा हाथ लगी ।उसके बाद भी मैं अपने देश के लिए अपने जुनून को खोने नहीं दिया। मै 2016 में ओलंपिक की तैयारी केन्या में कर रहा था । लेकिन गवर्मेंट से कोई सपोर्ट नहीं मिला ना मुझे ट्रायल देने का मौका मिला। वो दर्द आज भी है इसलिए मेंने इन्टरनेशनल एथलेटिक एसोसिएशन के कुछ मेंबर से कांटेक्ट किया। और अपने टैलेंट के बारे में बताया उसके बाद मैं जिस भी देश में गया। वहां सपोर्ट मिला और हम अपनी तैयारी करते रहे। और अब ओलंपिक गेम्स नजदीक आ गया है। वर्ल्ड एथलेटिक गेम है। जिसका सपना लेकर में अमेरिका में ट्रेनिंग कर रहा हूं । लेकिन आज बहुत दुखी होकर मेरे प्यारे भाई और दोस्तो मैं ये कहना चाहता हूं कि मैं अब अपने जिंदगी से अपने सपने से आज हार मान गया । मैने अपने लाइफ देश के सिवा कभी कुछ नहीं सोचा लेकिन अब हकीकत ये है कि ये बनावटी दुनिया है, दिखावटी दुनिया है यहां टैलेंट की कोई कदर नहीं होती जिसका कारण आपको पता है। आज तक हमारे देश में कोई भी ओलंपिक में मेडल नहीं है न हीं उसकी कोई पहचान करता है। और देश की ना जाने कितनी प्रतिभाएं ऎसे दफन हो जाते है । आखरी में सभी भाई और दोस्तो को बहुत -बहुत शुक्रिया और धन्यवाद आप लोगो का आभारी हरिकेश मौर्य अमेरिका।

इस पोस्ट को पढ़कर देशवासियों ने हरिकेश से सम्पर्क किया और बात की आज हरिकेश मौर्य में नया जोश नई उमंग फिर जग चुकी है और कड़ी मेहनत कर रहे है।

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संगम बाबा
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