केसरिया :उप स्वास्थ्य केन्द्र स्वास्थ्य विभाग खुद अस्वस्थ,करोडो खर्च के बाद नतीजा शून्य

करोडो खर्च के बाद भी लोगों के उम्मीद पर खरा नहीं उतर सका उप स्वास्थ्य केन्द्र

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असरफ आलम संवाददाता
केसरिया(पूर्वी चम्पारण)

बिहार में लोगो की बेहतर स्वास्थ्य के लिए स्वास्थ्य विभाग प्रत्येक वर्ष लाखो नहीं बल्कि करोडो खर्च कर रहा है लेकिन क्या करोडो खर्च के बाद भी आम लोगो तक वो सुविधायें पहुँच रही है तो इसका जवाब आएगा नहीं। आज भी बिहार के पूर्वी चम्पारण जिला स्थित केसरिया प्रखंड़ ग्रामीण इलाको में रहने वाले लोगो को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। आज हम आपको ले चलते है,केसरिया प्रखंड़ के ताजपूर पटखौलिया गांव में जहां लाखो की लागत से बने उप स्वास्थ्य केन्द्र रख रखाव के कारण खंडहर में तब्दील हो गया है।ऐसा लग रहा है की यहां के उप स्वास्थ्य केन्द्र में लगे ताले कभी खुलते भी हैं या फिर महज एक कागजी खानापूर्ती यह कहना इसके शान के खिलाफ होगा।

वहीं इसके चारो तरफ घास फूस से गंदगी का अंबार सहित बड़ी बड़ी झाड़ियों ने इसे अपने आगोश में ले लिया है।लेकिन इस फोटो को देख कर साफ जाहिर होता है,कि यह उप स्वस्थ्य केन्द्र कभी खुलता भी है या नहीं।इसी तरह केसरिया प्रखंड के अनेकों उपस्वास्थ्य केन्द्र अपनी बदहाली का रोना रो रहा है।इस विषय पर शायद उच्च स्तरीय जांच कभी हुई हीं नहीं।गौरतलब हो कि प्रखंडों में जहाँ ग्रामीण क्षेत्रो में रह रहे लोगो को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने करोडो तो खर्च कर दिया लेकिन उसका नतीजा शून्य है।

प्रखंड़ में पंचायत स्तर पर आम लोगो को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मिले इसको लेकर बिहार सरकार और स्वास्थ्य विभाग ने बड़े पैमाने पर खर्च कर पंचायत में उप स्वास्थ्य केंद्र की परिकल्पना करते हुए लाखो करोडो रुपये की खर्च से भवन तो बना दिया लेकिन आज भवन की स्थिति ऐसी है कि उप स्वास्थ्य केंद्र पशु बांधने , चारा रखने सहित कई अन्य कार्यो के लिए उपयोग किया जा रहा है।जो प्रखंड़ समेत जिले के स्वास्थ्य महकमा को चूनौती दे रहा है।वहीं प्रखंड स्थित सुन्दरापूर पंचायत में लाखो रुपये की लागत से निर्मित यह उप स्वास्थ्य केंद्र की बात कि जाय तो भवन निर्माण के साथ साथ इसके संचालन में प्रयुक्त होने वाले सभी तरह के उपकरण और व्यवस्था से लैस किया गया , लेकिन निर्माण के चंद महीनों बाद से यहाँ न कोई चिकित्स्क आये और नहीं कोई एएनएम। ऐसे अनगीनत उप स्वास्थ्य केन्द्र का अपना भवन है ,कही किराये के मकान मे भी उप स्वास्थ्य केन्द्र बनाये गयें हैं।जो महज एक दिखावा है।वहीं स्वास्थ्य विभाग का यह उपकेंद्र आज अपनी बदहाली की दंश झेल रहा है।

कुछ ऐसा ही हाल कथवलीया में बने प्राथ्मिक उप स्वास्थ्य केन्द्र का है।आज स्वास्थ्य विभाग का यह उप केन्द्र खुद अस्वस्थ्य है,और कड़ोरो खर्च के.बावजूद भी जन मानस के लिये नतीजा शून्य निकला।स्थिति यह है,कि इसके निर्माण के बाद अनेको उप स्वास्थ्य केन्द्र में न तो चिकित्सक आयें और नही यह अस्पताल लोगों के उम्मीद पर खरा उतर सका।विदित हो केसरिया प्राथ्मिक स्वास्थ्य केन्द्र के पूर्व चिकित्सा पदाधिकारी डा0.प्रमेश्वर ओझा भी विभागीय पदाधिकारी के रवैये से उब चूके हैं।और वे भी नजराने की राशी नहीं देकर विभागीय अधिकारियों की मनमानी का दंश झेल रहे हैं।जिसके कारण रिटायरमेंट के बाद कागजी प्रक्रिया में जांच के नाम पर मोतिहारी सिविल सर्जन के कथनानूसार फंसाने की बात भी अधिकारीयों के द्वारा किया जाता है। और पचास हजार रुपये कि नजराने की राशी कि मांग कि जाती है।इसकी लिखित शिकायत स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव बिहार सरकार पटना तथा उप सचिव को आवेदन देकर सूचनार्थ किया।इस संदर्भ मे केसरिया प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी से पूछने पर उन्होंने बताया कि ऐसा स्टाफ के कमी कारण होता है।वही कैथवलीया उप स्वास्थ्य केन्द्र के प्रभारी डा0 शतिस कुमार ने बताया कि रविवार को डा0 उप स्वास्थ्य केन्द्र पर नही रहते हैं ।रविवार को सिर्फ प्रशव का काम किया जाता है और उसके लिए एक एएनएम हमेशा उपस्थित रहती है।बहरहाल रविवार को दिन के ग्यारह बजे तक उपस्वास्थ्य केन्द्र बंद देखा गया।

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