पटना:लॉकडाउन से उपजे मानवीय त्रासदी पर 01 जून को शोक दिवस

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पटना:स्वराज इंडिया की बिहार प्रदेश इकाई लॉकडाउन से उपजे मानवीय त्रासदी पर 01 जून को शोक दिवस के रूप में मना रहा है। विदित है कि सरकार द्वारा कोरोना महामारी को रोकने को लेकर अचानक घोषित किए गए लॉक डाउन ने देश भर में एक गंभीर संकट खड़ी कर दी। जिसमें बड़ी संख्या में प्रवासी मज़दूरों का पलायन, भूख से मौत, सड़क हादसे और श्रमिक एक्सप्रेस में श्रमिकों की मौतें हुई। बिना किसी मुकम्मल तैयारी के एक के बाद एक लॉक डाउन ने प्रवासी मज़दूरों का रोज़गार छीन उन्हें घर जाने पर विवश कर दिया। हज़ारों किलोमीटर का पैदल सफ़र करते बच्चे, बुजुर्ग और स्त्री के दृश्य ने पूरे देश की संवेदना को झकझोर दिया।

सरकार की नाकामी की वजह से पैदा हुए इस ऐतिहासिक त्रासदी पर शोक व्यक्त करते हुए हम मांग करते हैं कि:

1. लॉकडाउन के दौरान विस्थापन भूख बीमारी से अपनी जान गवांने वाले प्रत्येक व्यक्ति के लिए दो लाख रुपये का मुआवजा, और उनके परिवार के लिए एक सरकारी नौकरी दिया जाए।
2. प्रवासी मजदूरों जिन्होंने रेल से यात्रा की और जो स्वगत चले आये — के यात्रा खर्च के छतिपूर्ति के रूप में ₹ 5000 का पुनर्भुगतान किया जाए।
3. वापसी की इच्छा रखने वाले सभी प्रवासी श्रमिकों के लिए 10 दिनों के भीतर मूल स्थान पर सुरक्षित और गरिमापूर्ण वापसी सुनिश्चित करने की केंद्र सरकार पूरी जिम्मेदारी ले।
4. खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लंबित आवेदनों का निपटान कर नए राशन कार्ड तुरंत जारी किये जायें।
5. राशन कार्ड पर प्रत्येक व्यक्ति के लिए खाद्य राशन 10 किलोग्राम अनाज, 1.5 किलोग्राम दाल, 800 मिलीलीटर खाना पकाने का तेल, 500 ग्राम चीनी प्रति माह तक बढ़ाया जाए।
6. जब तक सभी को राशन कार्ड नहीं मिल जाता, तब तक प्रत्येक विद्यालय में भूखों के लिए सामुदायिक रसोई की व्यवस्था की जाए।
7. COVID-19 से पीड़ित सभी मरीजों के लिए निःशुल्क चिकित्सा उपचार और जेनेरिक मेडिकल स्टोरों पर मुफ्त मास्क वितरित किए जाएं।
8. दो महीने के लिए प्रत्येक गरीब परिवार के लिए ₹ 7000 का भत्ता दिया दिया जाए।

एक तरफ देश बदहाल है, अर्थव्यस्था बेहाल, मजदूर लाचार, किसान परेशान, लोग मर रहे हैं, भूख से भी बीमारी से भी, अनाज गोदामों सड़ रहा, वायरस बढ़ रहा, मानवीय संकट की इस घड़ी में स्वराज इंडिया बिहार अपनी संवेदना व्यक्त करते हुए हर पीड़ित परिवार के साथ खड़ा है। और आशा करता है कि सरकार उपरोक्त मांगों को पूरा कर इन परिवारों के दुख तकलीफ़ को कम करेगी।

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संगम बाबा
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