पटना: महर्षि अध्यात्म विश्‍वविद्यालय’ द्वारा पेय पदार्थों पर शोध लंदन की अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक परिषद में प्रस्तुत !_*

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बिहार न्यूज़ लाइव l पटना डेस्क: *महर्षि अध्यात्म विश्‍वविद्यालय की प्रेस विज्ञप्ति !*

दिनांक : 20.11.2021

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*योग्य पेय पीने पर सकारात्मकता निर्माण होती है !* – शोध का निष्कर्ष

    सकारात्मक प्रभामंडलवाले पेय पदार्थों का हम पर विलक्ष्ण सकारात्मक प्रभाव होता है । इसलिए शारीरिक और मानसिक दोनों स्तरों पर स्वास्थ में सुधार होता है और रोगों का संकट अल्प होता है, साथ ही नकारात्मक कष्ट होने की संभावना भी अल्प होती है, *ऐसा प्रतिपादन महर्षि अध्यात्म विश्‍वविद्यालय के श्री. शॉन क्लार्क ने किया ।* लंडन, युनाइटेड किंगडम में आयोजित ‘सेवनटीन इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन न्यूट्रिशन एंड हेल्थ’ इस अंतरराष्ट्रीय परिषद में वे बोल रहे थे । इस परिषद का आयोजन ‘अलाईड एकॅडमीज, यूके’ ने किया था । श्री. क्लार्क ने *’पेय पदार्थों का व्यक्ति पर आध्यात्मिक दृष्टि से होनेवाला परिणाम’*, यह शोधनिबंध प्रस्तुत किया । इस शोधनिबंध के लेखक महर्षि अध्यात्म विश्‍वविद्यालय के संस्थापक परात्पर गुरु डॉ. जयंत बाळाजी आठवलेजी तथा सहलेखक श्री. शॉन क्लार्क हैं ।

    महर्षि अध्यात्म विश्‍वविद्यालय की ओर से प्रस्तुत यह 84वां प्रस्तुतीकरण था । महर्षि अध्यात्म विश्‍वविद्यालय की ओर से अब तक 15 राष्ट्रीय और 68 अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक परिषदों में शोधनिबंध प्रस्तुत किए गए हैं । इनमें से 9 अंतरराष्ट्रीय परिषदों में शोधनिबंधों को ‘सर्वश्रेष्ठ पुरस्कार’ प्राप्त हुआ है ।

1. श्री. क्लार्क ने अपने प्रस्तुतीकरण में पेय पदार्थों से संबंधित महर्षि अध्यात्म विश्‍वविद्यालय का निम्न शोध प्रस्तुत किया । ‘अन्न और पेय पदार्थों में  सकारात्मक अथवा नकारात्मक स्पंदन होते हैं । इसलिए उनके सेवन के उपरांत व्यक्ति के प्रभामंडल पर तत्काल उनका परिणाम होता है । महर्षि अध्यात्म विश्‍वविद्यालय ने 8 पेय पदार्थों का  व्यक्तियों के प्रभामंडल पर होनेवाले  सूक्ष्म परिणाम का अध्ययन किया । 11.4 प्रतिशत अलकोहलवाली रेड वाईन की प्रभामंडल सर्वाधिक नकारात्मक थी । तदुपरांत क्रमश: व्हिस्की, बियर और कोला यह पेय नकारात्मक प्रभामंडलवाली थी । बोतल बंद पानी का प्रभामंडल भी नकारात्मक था । नारियल पानी, संतरे का रस, देसी गाय का दूध और आध्यात्मिक शोध केंद्र का पानी इनमें नकारात्मक प्रभामंडल नहीं था, केवल सकारात्मक प्रभामंडल था ।

2. मुंबई के एक ही भाग के दो घरों के जल के नमूनों का अध्ययन करने पर दिखाई दिया कि ‘जिस घर में व्यक्ति आध्यात्मिक साधना करनेवाले होते हैं, उस घर के जल का प्रभामंडल  सकारात्मक होता है तथा जिस घर में कोई भी आध्यात्मिक साधना नहीं करता, वहां के जल का प्रभामंडल नकारात्मक होता है ।’ इसलिए घर के सात्त्विक वातावरण का सकारात्मक परिणाम जल पर भी होता है, यह दिखाई दिया ।

3. एक जांच में एक पुरुष और एक महिला दोनों को प्रतिदिन एक पेय इस प्रकार आठ भिन्न-भिन्न पेय पीने के लिए दिए गए । प्रतिदिन पेय पीने के 5 मिनिट और 30 मिनिट उपरांत उन दोनों की युनिवर्सल ऑरा स्कैनर (यूएएस) द्वारा जांच की गई ।

    इस जांच से प्राप्त निष्कर्षों के अनुसार व्यक्ति के प्रभामंडल पर  सकारात्मक परिणाम करनेवाले पेय में से देसी गाय का दूध पीने पर दोनों की सकारात्मक प्रभामंडल में 500 से 600 प्रतिशत वृद्धि हुई और नकारात्मक प्रभामंडल लगभग 91 प्रतिशत अल्प हुई, अर्थात दोनों प्रकार की प्रभामंडल पर सर्वाधिक सकारात्मक परिणाम देसी गाय के दूध का हुआ । नारियल पानी पीने पर एक की सकारात्मक प्रभामंडल 900 प्रतिशत और दूसरे की 291 प्रतिशत बढी । संतरे का रस पीने पर सकारात्मक प्रभामंडल में 358 प्रतिशत वृद्धि हुई और नकारात्मक प्रभामंडल 85 प्रतिशत अल्प हुई । आध्यात्मिक शोध केंद्र के पानी के कारण नकारात्मक प्रभामंडल विलक्ष्ण प्रमाण में अल्प हुई ।

   व्यक्ति के प्रभामंडल पर नकारात्मक परिणाम करनेवाले पेय में से व्हिस्की, बियर और वाईन इन अल्कोहलवाले पेयों के कारण जांच के दोनों व्यक्तियों की सकारात्मक प्रभामंडल पेय पीने के पांच मिनिट उपरांत ही पूर्णत: नष्ट हुई । उन पर सर्वाधिक नकारात्मक परिणाम बियर का हुआ । बियर पीने के उपरांत दोनों में से एक का नकारात्मक प्रभामंडल 5000 प्रतिशत बढा । वाईन पीने के 30 मिनिट उपरांत की गई जांच में महिला का नकारात्मक प्रभामंडल 3691 प्रतिशत और पुरुष का 1396 प्रतिशत बढा था । कोला पेय का भी दोनों पर नकारात्मक परिणाम हुआ ।

4. जीडीवी बायोवेल उपकरण का उपयोग कर किए गए अध्ययन में वाईन पीने के पूर्व व्यक्ति के सभी कुंडलिनी चक्र लगभग सीधी रेषा में और उचित आकार में थे, अर्थात वह व्यक्ति स्थिर आणि ऊर्जावान थी; परंतु वाईन पीने के उपरांत उसकी कुंडलिनी चक्र अव्यवस्थित और कुछ चक्र आकार में छोटे हुए, अर्थात वह व्यक्ति अस्थिर हुई तथा उसकी क्षमता भी घट गई ।

5. एक पार्टी में सहभागी हुए दस लोगों पर की गई एक जांच में अल्कोहलवाले पेय पीनेवाले और बिना अल्कोहल का पेय पीनेवाले सभी का सकारात्मक प्रभामंडल नष्ट हुआ पाया गया । उस पार्टी में आध्यात्मिक दृष्टि से सकारात्मक ऊर्जा में वृद्धि करनेवाली कोई भी कृति न होने से वातावरण के नकारात्मक स्पंदनों का परिणाम बिना अल्कोहलवाले पेय पीनोंवालों पर हुआ और उनकी नकारात्मक प्रभामंडल में वृद्धि हुई ।

6. सकारात्मक स्पंदनवाले गाय का दूध, नारियल का पानी, संतरे (फलों) का रस  यह पेय भी व्यक्ति और समाज के लिए आध्यात्मिक दृष्टि से लाभदायक होते हैं, यह इन शोध द्वारा ध्यान में आया । 

आपका,
*श्री. रुपेश लक्ष्मण रेडकर,*
शोधकार्य विभाग, महर्षि अध्यात्म विश्‍वविद्यालय,
(संपर्क : 95615 74972)

 

 

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