सारण: मैथिली शरण गुप्त की 136 वी जयंती मनाई गई

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बिहार न्यूज़ लाइव डेस्क:

आज दिनांक 03.08.22 को जय प्रकाश विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर हिंदी विभाग में जयंती समारोह की द्वितीय कड़ी में राष्ट्रकवि श्री ‘मैथिली शरण गुप्त’ की 136 वीं जयंती मनाई गई।आद्योपांत विद्यार्थियों द्वारा संचालित यह कार्यक्रम विभागाध्यक्ष डॉ. अनीता की अध्यक्षता में संपन्न हुआ । मंत्रोच्चार के साथ दीप प्रज्ज्वलन द्वारा आयोजन का शुभारंभ करने के पश्चात राष्ट्रकवि को पुष्पांजलि प्रदान की गई। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में रमेश झा महिला महाविद्यालय , सहरसा की अवकाश प्राप्त प्राचार्य एवं – विश्वविद्यालय की कुलगीत रचयिता डॉ. रेणु सिंह की गरिमामयी उपस्थिति रही। शोध छात्राओं लक्खी पासवान एवं नीतू सिंह ने मधुर गायन से आगतों का स्वागत किया। राजू पासवान ने अपनी अलंकृत भाषा से अतिथियों का स्वागत किया।

 

शोधार्थी बालकिशोर, इला कुमारी ने मैथिलीशरण गुप्त के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डाला।सोनी बाला,नीतू सिंह ,मंजू भारती द्वारा प्रस्तुत राष्ट्रकवि की रचना ‘ भारत भारती ‘ के सुर – सज्जित गायन ने सबको मोहित किया तथा कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। अतिथि के रूप में उपस्थित पूर्व अध्यक्ष डॉ. सुधा बाला, डॉ.अशोक कुमार सिन्हा ने अपने अपने विचार प्रस्तुत किए।विनय कुमार विश्वकर्मा , भरत शाह ,निकी कुमारी ने स्वरचित काव्य पाठ किया ।मुख्य अतिथि डॉ.रेणु सिंह ने अपने विशिष्ट व्याख्यान द्वारा उपस्थित विद्यार्थियों को मैथिलीशरण गुप्त के साहित्यिक सोपानों एवं अवदानों से अवगत कराते हुए कहा कि उनकी रचनाओं के पुनर्पाठ की आवश्यकता है।समय और परिस्थिति से विमर्श की दृष्टि बदल जाती है। राष्ट्र और राजनीति से उनके परिष्कृत लगाव को नैतिकता का मानदंड बताया। रचनाओं के माध्यम से संस्कृति और राष्ट्रवाद के संरक्षक के रूप में वे आज भी प्रासंगिक एवं स्मरणीय हैं।अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ. अनीता ने बताया कि मैथिलीशरण गुप्त की रचनाएं न केवल राष्ट्रभाव से लबरेज़ हैं वरन् मानवीय भाव की प्रेरक एवं रक्षक भी हैं । उर्मिला, यशोधरा की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि राष्ट्रकवि ऐकांतिक साधिकाओं की तपः पूत भावनाओं के संरक्षक भी थे ।इतना ही नहीं ‘ नर हो न निराश करो मन को ‘ कविता तो संपूर्ण मानव जीवन का गुरु मंत्र है।

 

अंतिम प्रस्तुति गुप्त जी की रचनाओं पर आधारित भाव नाट्य थी।।कार्यक्रम का सफल संचालन पंकज कुमार एवं राजू पासवान ने किया। धन्यवाद ज्ञापन शोधार्थी विजय कुमार ने किया ।कार्यक्रम में विभागीय सहायक राकेश कुमार के अतिरिक्त दिग्विजय कुमार,, सर्वेश कुमार, राकेश कुमार,बेचू सरोज ,शिवाकांत गुप्ता, चंद्रकांत कुमार अपराजिता , रूबी भगत,रवि यादव,आदि विद्यार्थियों की उपस्थिति रही।
विभागीय कार्यक्रम के पश्चात् विश्वविद्यालय के सीनेट हाल में संध्या समय कुलपति महोदय की अध्यक्षता में आगत अतिथि प्रो. रेणु सिंह के एकल व्याख्यान का आयोजन हुआ।राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त की जयंती को उनके गंभीर उद्बोधन ने सार्थक बनाया।सभा में विश्वविद्यालय के कुलसचिव रवि प्रकाश बबलू ,वित्तीय परामर्शी अशोक कुमार पाठक, डॉ.धनंजय कुमार, प्रो.विश्वामित्र पाण्डे के साथ कई शिक्षकेत्तर सहयोगी एवं विद्यार्थीगण उपस्थित थे

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