सारण: बिहार में शराबबंदी कुछ कमियों के बावजूद सफल

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बिहार न्यूज़ लाइव डेस्क:

जयप्रकाश विश्वविद्यालय, छपरा के राजनीति विज्ञान विभाग में ‘बिहार में शराबबंदी कानून:सफल या विफल ‘विषय पर एक वाद-विवाद प्रतियोगिता का आयोजन किया गया जिसमें मूल रूप से प्री-पी-एच डी कोर्स वर्क के प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।प्रतिभागियों को दो समूह -पक्ष एवम विपक्ष में बांटकर प्रतियोगिता का आगाज किया गया।सबसे पहले विभाग के वरीय शिक्षक प्रो संजय कुमार ने बिहार में शराबबंदी कानून निर्माण की पृष्ठभूमि, कानून के मुख्य प्रावधान, इस कानून में समय समय पर किये गए संशोधन पर संक्षेप में प्रकाश डाला ।डॉ रणजीत कुमार ने इस कानून के सामाजिक,आर्थिक एवम राजनीतिक निहितार्थ एवम इसके सकारात्मक तथा नकारात्मक पहलुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला।प्रतिभागियों में मुकुल कुमार सिंह,सुशील चौबे,मुकेश सिंह, मृणालिनी सिंह,राजमाला,शाम्भवी झा,जबरुल रब्बानी, ताहा, रेनुकुमारी,आरती,मलका बेगम आदि ने शराबबंदी के पक्ष में तर्क प्रस्तुत करते हुए कहा कि अप्रैल 2016 से लागू इस कानून की वजह से राज्य में आपराधिक वारदातों की संख्या घटी है,

 

 

घरेलू हिंसा में कमी आयी है, गरीब मजदूर, किसान तथा निम्न आय वर्ग के बचत में इज़ाफ़ा हुआ है और इस बचत का इस्तेमाल बच्चों की पढ़ाई पर किया जा रहा है।उस कानून की वजह से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की लोकप्रियता महिलाओं के बीच बढ़ी है।शशि कुमार,उज्ज्वल सिंह,रणविजय सिंह,ज्योति कुमार सिंह,दिलीप रस्तोगी,दिग्विजय सिंह,अम्बरीष राय,राजकुमार,प्रफुल्ल पांडेय आदि ने शराबबंदी कानून के विपक्ष में तर्क प्रस्तुत करते हुए कहा कि यह लोगों के खान-पान की आजादी के खिलाफ है।पुनः इस कानून को समाज की स्वीकृति हासिल नहीं है।शराबबंदी के बावजूद शराब आसानी से उपलब्ध है, होम डिलीवरी हो रही है, पूरे बिहार में एक समानान्तर अर्थ व्यवस्था तैयार हो गई है।प्रतिबंधों की वजह से जहरीली शराब पीकर हर माह दर्जनों लोग अपनी जान दे रहे हैं।पुलिस इस कानून को लागू करने में नाकाम रही है और सबसे बढ़कर बिहार जैसे राज्य को हर साल अरबों रुपये का राजस्व का नुकसान हो रहा है।जो पीने वाले हैं, वे बाजार मूल्य से अधिक कीमत पर खरीदकर पी रहे हैं

 

कानून के क्रियान्वयन में बहुत सारी खामियां हैं।देश के बहुत कम राज्यों में शराबबंदी कानून लागू है।बिहार के पड़ोसी राज्यों में शराबबंदी कानून लागू नहीं होने की वजह से सीमावर्ती जिलों के लोग सीमा पार कर शराब का सेवन करते हैं।अतः सरकार की नीति एवम नीयत सही होने के बावजूद जमीनी स्तर पर कानून का प्रवर्तन बहुत ही कमजोर है।प्रो विभु कुमार ने पक्ष-विपक्ष के तर्कों को सूत्रबद्ध करते हुए कहा कि यह कानून महिलाओं एवम मेहनतकश जनता के हित में है तथा समाज पर इसका सकारात्मक प्रभाव दिखाई दे रहा है।सरकार की नीति एवम नीयत सही है।यदि इसका क्रियान्वयन सही हो जाए तो यह अपने उद्देश्यों को हासिल कर सकता है।डॉ विकास चौहान ने अंत में सभी प्रतिभागियों को धन्यवाद ज्ञापित किया।

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