मधेपुरा। जिले के दर्जनों आंगनबाड़ी केंद्रों पर सेविकाओं ने स्थानीय भोजन व खाद्द सामग्रियों का किया प्रदर्शन, दी पौष्टिक आहार की जानकारी

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🔼आंगनबाड़ी केंद्र पर सेविकाओं ने स्थानीय भोजन व खाद्द सामग्रियों का किया प्रदर्शन।

🔼पौष्टिक एवम् संतुलित आहार की दी गई जानकारी, स्लेट पर स्लोगन लिखकर किया गया जागरूक।

मधेपुरा । मधेपुरा जिला में दर्जनों आंगनबाड़ी केन्द्रों पर सेविकाओं द्वारा बच्चों को खिलाए जाने वाले पौष्टिक आहार के बिषय में गर्भवती माताएँ, शिशुवती माताएँँ अथवा धातृ माताओं को जानकारी प्रदान की गई ।

इसी कड़ी में मुरलीगंज प्रखंड के आंगनबाड़ी केंद्र संख्या 33 पर स्थानीय भोजन व खाद्द सामग्रियों की प्रदर्शनी लगाई गई। इस दौरान सभी सेविका ने अपने-अपने पोषक क्षेत्र के गर्भवति महिलाओं एवं छः माह की उम्र पार करने वाले बच्चों को खिलाए जाने वाले पौष्टिक आहार की जानकारी प्रदान की।  आंगनबाड़ी केंद्र पर अभिभावकों को बच्चे के 6 माह के बाद ऊपरी आहार की विशेषता बताते हुए अन्नप्राशन के महत्व की विस्तार से जानकारी भी दी गई। ताकि बच्चे के स्वस्थ शरीर का निर्माण हो सके। वहीं, गर्भवती  महिलाओं एवं बच्चों के सर्वांगीण शारीरिक और मानसिक विकास के लिए उचित पोषण की जानकारी दी गई और कुपोषण मुक्त समाज निर्माण को लेकर जागरूक किया गया। जिसमें बताया गया कि कुपोषण को मिटाने के लिए उचित पोषण  बेहद जरूरी है।

🔼स्लेट पर स्लोगन लिखकर किया जागरूक –

कार्यक्रम के दौरान आंगनबाड़ी केन्द्र पर महिला पर्यवेक्षिका प्रियंका कुमारी व सेविका शांति कुमारी भारती ने स्लेट पर पोषण संबंधित जागरूकता स्लोगन लिखकर अभिभावकों को जागरूक करने का कार्य किया। कार्य का पर्यवेक्षण प्रियंका कुमारी द्वारा किया गया। प्रियंका कहती है कि अन्नप्राशन के तहत 6 माह पार कर चुके बच्चों को संतुलित मात्रा में ऊपरी आहार देना जरूरी होता है। स्लेट पर सही पोषण देश रौशन स्लोगन लिखकर एवम् हरी सब्जियों की रंगोली बनाकर तथा पौष्टिक अनाजों से आंगनबाड़ी केंद्र को सजाया गया था।  प्रियंका व उसके क्षेत्र की सेविकाएं लगातार अपने अपने क्षेत्र की महिलाओं को बच्चे के सही पोषण एवम्  साफ सफाई का ध्यान रखने के लिए लगातार प्रेरित करती है।

 

🔼अन्नप्राशन के साथ दो वर्षों तक स्तनपान भी जरूरी –

बता दें कि अन्नप्राशन के साथ साथ बच्चों की माताओं को बच्चे के स्वस्थ शरीर निर्माण को लेकर आवश्यक जानकारियाँ आंगनबाड़ी केंद्रों पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के द्वारा दी जाती है। कार्य का पर्यवेक्षण प्रखंड की एल एस के द्वारा किया जाता है। बच्चों को अन्नप्राशन के साथ कम से कम दो वर्षों तक स्तनपान भी कराना जरूरी होता है। छः माह तक के बच्चों को स्तनपान ही कराए। तभी बच्चे का स्वस्थ शरीर निर्माण हो पाएगा।

⚫️इन बातों का रखें ख्याल : –

🔼6 माह बाद स्तनपान के साथ अनुपूरक आहार शिशु को दें।

🔼स्तनपान के अतिरिक्त दिन में 5 से 6 बार शिशु को सुपाच्य खाना दें।

🔼शिशु को मल्टिंग आहार (अंकुरित साबुत अनाज या दाल को सुखाने के बाद पीसकर) दें।

🔼माल्टिंग से तैयार आहार से शिशुओं को अधिक ऊर्जा प्राप्त होती है।

🔼शिशु यदि अनुपूरक आहार नहीं खाए तब भी थोड़ा-थोड़ा करके कई बार खिलाएं।

रिपोर्ट : डेस्क बिहार न्यूज लाइव।

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