जिन्दा रहने के लिए देना होगा,हर पल का रेन्ट,क्योंकि आपका जीवन अब हो गया है पेटेंट

अजगैवीनाथ नाथ साहित्य मंच ने आयोजित किया संध्या कालीन कवि गोष्ठी

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एसके झा की रिपोर्ट सुलतानगंज: अजगैवीनाथ नाथ साहित्य मंच,सुलतानगंज के बैनर तले मंच के संस्थापक सदस्य डॉ श्यामसुंदर आर्य की अध्यक्षता में संध्या कालीन कवि गोष्ठी का आयोजन स्थानीय अशोका ग्रांट होटल सुलतानगंज में किया गया.कार्यक्रम की शुरूआत वरिष्ठ कवि रामस्वरूप मस्ताना की कविता से हुआ.उन्होंने कहा -जवां नजर जवानी भरी है चाल मेरे ,ये उमर के हैं पके,न धूप के हैं बाल मेरे. उसके बाद युवा कवि शायर एम सलमान बी ने गजल पढ़कर सबको आनंद से सराबोर कर दिया. वो शख्स हंसता बहुत है,अंदर से टूटा है क्या.अक्सर खुद से बातें करता है,जमाने से रूठा है क्या.
मंच के संस्थापक सदस्य डा. श्यामसुंदर आर्य ने गरीबों की व्यथा को अंगिका भाषा मे व्यक्त किया – दुनिया में गरीब्बो के कौने सुनै छै,भुक्खे मरै छै कपाडे धुनै छै.कवि अमरेन्द्र कुमार ने अंगिका में चुनाव पर प्रासंगिक रचना पढ़ी – आबि गेलै चुनाव के मौसम,बढी गेलै जनता के मान,पांच साल के छिकार निकालो,जे होलो छौं अपमान.कवि भावानन्द सिंह प्रशांत ने पेटेंट रचना पढ़कर वर्त्तमान में हर चीज के पेटेंट होने पर दुनिया के ग्लोबल मार्केट को रेखांकित किया – जिन्दा रहने के लिए देना होगा,हर पल का रेन्ट ,क्योंकि आपका जीवन अब हो गया है पेटेंट.
वहीं कवियित्री उषा किरण साहा ने कविता में कहा – मामूली मैं चीज नहीं हूँ, बहुत अनमोल धीरे-धीरे भेद बताकर खोलूंगा मैं पोल.तिलकामांझी राष्ट्रीय सम्मान 2020 से सम्मानित कवि मनीष कुमार गूंज ने अंगिका भाषा में कहा – केकरो जे लगलै नजरिया,ससरी के फुटलै गगरिया.युवा शायर कुणाल कनौजिया ने अपनी गजल में दर्द को यूं बयां किया – जिस दर दर्द मिला हम उस दर के हो गये,दर्द सहते -सहते दर-बदर के हो गये.संचालन मंच के अध्यक्ष भावानन्द सिंह प्रशांत ने किया.कार्यक्रम में मास्क और सेनिटेशन से युक्त सभी कवियों ने सोशल डिस्टेंनसिंग में रहकर कविता पाठ किया.

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संगम बाबा
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