प्यार कौन सी बला है,दशरथ मांझी को पर्वत पुरूष बना दिया,कलिया को कालीदास बना दिया…..पर आनंदित हुए श्रोता

अजगैवीनाथ साहित्य मंच सुलतानगंज के तत्वावधान में कवि-गोष्ठी सह सम्मान समारोह का हुआ आयोजन अंगिका के ख्याति लब्ध कवि स्व कैलाश झा किंकर सम्मान से सम्मानित हुए कवि

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एस के झा की रिपोर्ट
सुलतानगंज: अजगैवीनाथ साहित्य मंच सुलतानगंज के तत्वावधान में कवि-गोष्ठी सह सम्मान समारोह का आयोजन स्थानीय अशोका ग्रांट होटल में रविवार को सोशल डिस्टेंस का पालन करते हुए मंच के संस्थापक सदस्य डॉ श्यामसुंदर आर्य की अध्यक्षता में आयोजित की गयी. कवि – गोष्ठी की शुरुआत रामस्वरूप मस्ताना के एक प्रेरणादायक गीत से हुई. उन्होंने कहा सीखो-सीखो हो भाय,अपनो परिवार मे,प्रेम बढ़ाय,गुरू- माय -बाप के गोड़ लागो हो भाय.

कवि मनीष कुमार गूंज ने मानवीय सत्ता की बात करते हुए कहा आदमी है चीज क्या बता ऐ आदमी,आदमी से आज क्यूं डरता है आदमी.वहीं नयी कविता के संवाद वाहक कवि रौशन भारती ने ने कहा जन- जन की आवाज उठाता हूं,रोड़े अटकाये जाते हैं, तलवार नहीं कलम उठाता हूं,पन्ने बदल दिये जाते हैं. वरिष्ठ कवि श्यामसुंदर आर्य ने कहा आप के किस्से हमें यार से मालुम हुए,स्वाद कैसा है नमक का खार से मालुम हुए. कवि अमरेंद्र कुमार ने प्रेम की प्रभा से अचंभित होकर कहा प्यार कौन सी बला है,दशरथ मांझी को पर्वत पुरूष बना दिया,कलिया को कालीदास बना दिया.

वहीं मंच के अध्यक्ष साहित्यकार भावानंद सिंह प्रशांत ने कहा जीएसटी तुम कितना लोगे,मौत का धंधा करता हूं,कफन के लिए लाश पड़ी है,बोलो चंदा करता हूँ.वरिष्ठ कवि देवकांत मिश्रा ने राष्ट्र प्रेम से ओतप्रोत रचना से मन के अंदर राष्ट्रीय चेतना का संचार कर दिया.मैं हूँ भारतवासी प्रतिदिन,भारत के गुण गाऊँ. मातृभूमि से नेह लगाकर,इसका मान बढ़ाऊं. वहीं युवा कवि एम सलमान बी ने धरती पुत्र किसान की समस्याओं से आहत अवाम से प्रश्न करता है कि एक प्रश्न करू इस महफिल से जो मुझको बड़ा सताता है. देश को जो खिलाते हैं.वो फांसी क्यूं चढ़ जाता है. कुणाल कनौजिया ने अपनी गजल में कहा याद है आज भी वो मुस्कुराना तेरा मिलाके नजर,नजर चुराना तेरा. छोटी कवियित्री दिव्यांशिका गुप्ता ने अपनी कविता से सबको अचंभित किया लहरों से डरकर नौका पार नहीं होती,संघर्षों के बिना संसार नहीं होती. युवा कवि समीर सिंह राठौर ने अपनी गजल में कहा मैं सहूँगा तुम्हारी हरेक आफतें,तू बहाना बनाने की कोशिश न कर.
कार्यक्रम में सम्मानित हो रहे कवि शत्रु आर्य ने अपनी रचना से एक गरीब की दुर्दशा को रेखांकित किया लिए चोरवत्ती में दौड़ लगाई,उस समय थी दंगा आयी. कुछ दूर पर लोग खड़े थे,गिरजा ऐसे मरे पड़े थे.अंगिका के सिरमौर कवि सुधीर कुमार प्रोग्रामर वर्तमान हालात से लड़ने को प्रतिबद्ध होने की बात करते हुए कहा रावण से टकराना होगा,सीधा वाण चलाना होगा. सीता हरण अभी भी होता,बनकर राम छुड़ाना होगा. वरिष्ठ गजलगो दिलीप कुमार सिंह दीपक ने अपनी गजल में कहा जिसने लूटा है मुझे देकर आवारगी , उसकी सूरत पे मरा हूं लेकर आवारगी. कवियित्री उषा किरण साहा ने बेटा-बेटी की समानता और उसकी ऊर्जा को रेखांकित किया बेटा -बेटी में भेद नै करियो,सुनो हो बाबू सुनो हो भाय. सुतलो दुनिया के दहो जगाय. नन्ही कवियित्री युक्ति गुप्ता ने कहा चीं चीं चिड़िया बोली अब मत खेलो आंख मिचौली. संचालन कवि भावानंद सिंह प्रशांत ने किया. कार्यक्रम का समन्वयन अंगिका के कवि मनीष कुमार गूंज ने किया. कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में वरिष्ठ कवियित्री उषा किरण साहा और अति विशिष्ट अतिथि के रूप में अंगिका के मूर्धन्य साहित्यकार सुधीर कुमार प्रोग्रामर उपस्थित थे. सर्वप्रथम मंच के द्वारा अंग क्षेत्र के गौरव व वरिष्ठ सहित्यकार नाटककार रंगकर्मी शत्रु आर्या को अंग वस्त्र,प्रशस्ति पत्र व अजगैवीनाथ मंदिर का मोमेंटो देकर उन्हें अंगिका के ख्याति लब्ध कवि स्व कैलाश झा किंकर सम्मान से सम्मानित किया गया.

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