रमजान के पहले जुमा पर हजारों सिर झुके सजदे में:-हाथ उठा कर मांगी देश में अमन और शांति की दुआ

Rakesh Gupta
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छपरा
रमजान माह के पहले जुमा की नमाज अदा करने के लिए मस्जिदों में रोजेदारों की खासी भीड़ उमड़ पड़ी. हजारों रोजेदारों ने नमाज अदा करके मुल्क में अमन चैन की दुआ मांगी. साहेबगंज स्थित जामा मस्जिद एवं शहर की प्रमुख मस्जिदों में वक्ता व इमाम हजरात ने कहा कि रमजान का पवित्र माह वो है जिसमें 11 माह के गुनाहों की माफी मिलती है. खुद को पाक, साफ रखना है तो दीन के बताए रास्ते पर चलो. वह काम करो जिससे खुदा खुश हो. शरीयत कहती है किसी को कष्ट मत दो, किसी से झूठ मत बोलो, किसी की अमानत में खयानत न करो.

अपने हाथ एवं जुबां से किसी को कष्ट न पहुंचाएं. चाहे वह किसी भी मजहब को मानने वाला हो. इस्लाम में तो इंसान के साथ जानवरों को भी कष्ट नहीं पहुंचाने की बात कही गई है. एक दूसरे से प्यार, मोहब्बत करें. प्रत्येक रोजेदार को ईद से पहले फितरा अवश्य निकालना चाहिए. अल्लाह ताला फितरा निकालने वालों से रोजे के दौरान हुए गुनाहों की माफी देता है. रमजान के पहले जुमा के दिन नगर निगम की ओर से मस्जिद और मुहल्लों के करीब साफ सफाई कराई गई. जुमा की नमाज अदा करने के लिए रोजेदारों के मस्जिदों में आने का क्रम दोपहर से ही शुरू हो गया.

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शहर की प्रमुख मस्जिदों में बड़ी संख्या में रोजेदारों ने नमाज अदा कर मुल्क में अमन चैन की दुआ मांगी. बड़ा तेलपा स्थित जामा मसजिद के साथ खनूआ अहले हदीस मस्जिद, मौला मस्जिद, जुमनी मस्जिद, छोटा तेलपा मस्जिद के इमामों ने कहा कि रमजान माह का पहला अशरा चल रहा है और दूसरा शुरू होने वाला है. यह असरा मगफिरत का होगा. हर रोजेदार को गुनाहों से तौबा कर अल्लाह ताला से माफी मांगनी चाहिए. एक नई जिंदगी को शुरू करने का इरादा करना चाहिए.

रमजान के माह में लोगों के साथ हमदर्दी करना रमजान का सबसे बड़ा काम है. इस माह में प्रत्येक रोजेदार को ईद से पूर्व फितरा निकालना चाहिए. प्रत्येक रोजेदार को पौने दो किलोग्राम गेहूं या उसकी कीमत, खजूर तीन किलोग्राम अथवा उसकी कीमत या किसमिस तीन किलोग्राम अथवा उसकी कीमत ईद की नमाज से पहले गरीबों को देना चाहिए. अल्लाह ताला इससे रोजे में होने वाली कमियों को पूरी करता है. वहीं गरीबों की भी ईद अच्छी होती है.

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