गौरव कुमार झा समस्तीपुर विभूतिपुर प्रखंड अंतर्गत खास टभका दक्षिण पंचायत के उत्क्रमित मध्य विद्यालय, चकबिदुलिया में हुए दर्दनाक हादसे के बाद पूरा इलाका शोक में डूब गया है।
गुरुवार को तेज हवा और बारिश के बीच विद्यालय परिसर में स्थित बरगद का एक विशालकाय सूखा पेड़ गिर जाने से तीन मासूम स्कूली छात्राओं की मौत हो गई थी। पोस्टमार्टम के बाद जब शव गांव पहुंचे, तो परिजनों की चीख-पुकार से पूरा माहौल गमगीन हो गया।मृतक छात्राओं में पायल कुमारी (11 वर्ष, कक्षा 5), सपना कुमारी (10 वर्ष, कक्षा 4) और गुलनाज खातून (8 वर्ष, कक्षा 3) शामिल थीं। परिजनों के परदेश से लौटने के बाद पायल और सपना के शवों को अंतिम संस्कार के लिए बछवाड़ा स्थित झमटिया घाट ले जाया गया, जहाँ अश्रुपूरित आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दी गई।वहीं, तीसरी मासूम छात्रा गुलनाज खातून के शव को जुमे की नमाज के बाद कमराइन के निकट गोसपुर कब्रिस्तान में रीति-रिवाज के साथ सुपुर्द-ए-खाक किया गया।इन मासूमों की असामयिक मौत ने पूरे गांव को तोड़कर रख दिया है। जो बेटियां कल तक अपने माता-पिता, स्वजनों और ग्रामीणों के प्यार-दुलार में पल-बढ़ रही थीं और विद्यालय में शिक्षा प्राप्त कर देश-दुनिया में नाम रोशन करने का सपना देख रही थीं, वे प्रशासनिक लापरवाही और कुदरत के इस भीषण हादसे का शिकार हो गईं।पीड़ित परिवारों को चार-चार लाख रुपये का मुआवजा हादसे के बाद राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन की ओर से त्वरित आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई गई है।
आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से अंचलाधिकारी चंद्रशेखर ने तीनों मृतक छात्राओं के स्वजनों को चार-चार लाख रुपये के चेक सौंपे।अंचलाधिकारी ने जानकारी दी कि इससे पूर्व भी आपात राहत के तौर पर बीस-बीस हजार रुपये की पारिवारिक लाभ राशि का चेक परिजनों को प्रदान किया जा चुका है। हालांकि, ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि मुहावजे की राशि से उन मासूमों की जान और उनके परिवारों का नुकसान पूरा नहीं किया जा सकता।घटना के बाद ग्रामीणों में गोलबंदी और कड़े निर्णयतीन मासूम बेटियों की मौत के बाद ग्रामीणों का गुस्सा चरम पर है।
शुक्रवार को अनंत चतुर्दशी के कारण विद्यालय बंद रहा और परिसर में सन्नाटा पसरा रहा, लेकिन समानांतर रूप से गांव में गोलबंदी शुरू हो गई है।स्थानीय जनप्रतिनिधियों व ग्रामीणों—जिनमें वार्ड सदस्य विनय कुमार, पंच मो. यासीन, मंजय लाल सिंह, रामदेव महतो, मो. इब्राहिम, मो. मिकाइल, दिनेश ठाकुर, मो. असगर, मो. जिशान और मो. मुस्तकीम शामिल हैं—ने एकजुट होकर कहा कि हमारी तीन बेटियों की बलि व्यर्थ नहीं जाएगी।ग्रामीणों ने बैठक कर निम्नलिखित प्रमुख माँगें व भावी रणनीति तय की है। जमीन का सीमांकन: विद्यालय, सरकारी सड़क और निकट स्थित पोखर की जमीन की सरकारी मापी करवाकर अतिक्रमण और वास्तविक सीमा स्पष्ट की जाए। खतरनाक पेड़ों को हटाना: वन विभाग के समन्वय से विद्यालय परिसर व आसपास बने पीपल और अन्य जर्जर पेड़ों को अविलंब कटवाया जाए ताकि भविष्य में ऐसा हादसा न हो। 11 हजार वोल्ट बिजली तार की समस्या: विद्युत विभाग से संपर्क साधकर विद्यालय के ऊपर या पास से गुजर रहे हाई-टेंशन बिजली के तारों को तुरंत स्थानांतरित कराया जाए। चारदीवारी का निर्माण: प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों पर दबाव बनाकर विद्यालय की सुरक्षा हेतु अविलंब पक्की चारदीवारी का निर्माण कराया जाए। प्रशासनिक पहल: जमीन मापी और जांच तेजघटना के बाद बैकफुट पर आए प्रशासन ने अब विद्यालय की समस्याओं के स्थायी समाधान की दिशा में कार्रवाई शुरू की है। प्रखंड विकास पदाधिकारी सह प्रभारी बीईओ सुनील कुमार ने बताया कि विद्यालय के प्रधानाध्यापक मनोज कुमार चौधरी से विद्यालय की भूमि से संबंधित सभी कागजात तलब किए गए हैं।
आवेदन प्राप्त होते ही अंचल कार्यालय को अमीन नियुक्त कर नापी कराने का निर्देश दिया जाएगा। अंचलाधिकारी चंद्रशेखर एवं राजस्व अधिकारी कैलाश प्रसाद मंडल ने स्पष्ट किया कि आवेदन प्राप्त होते ही सरकारी सड़क, पोखर और विद्यालय की भूमि का सीमांकन कराया जाएगा।घटना से संबंधित विस्तृत व अद्यतन जांच रिपोर्ट समस्तीपुर के जिलाधिकारी को प्रेषित की जा चुकी है।
