दरभंगा राजघराने की अंतिम महारानी महारानीधिरानी कामसुंदरी देवी का निधन, अंतिम संस्कार संपन्न

Rakesh Gupta
- Sponsored Ads-

सुभाष शर्मा/दरभंगा:दरभंगा राजघराने की अंतिम महारानी एवं स्वर्गीय महाराजाधिराज डॉ. सर कामेश्वर सिंह की धर्मपत्नी महारानीधिरानी कामसुंदरी देवी का निधन हो गया। उन्होंने 96 वर्ष की आयु में 12 जनवरी 2026 को प्रातः करीब 3 बजे दरभंगा स्थित राज परिसर के कल्याणी निवास में अंतिम सांस ली। उनके निधन से न केवल दरभंगा राजपरिवार, बल्कि पूरे मिथिलांचल में शोक की लहर दौड़ गई है।

महारानीधिरानी कामसुंदरी देवी पिछले लंबे समय से अस्वस्थ थीं और बिस्तर पर थीं। निधन के बाद उनका पार्थिव शरीर कल्याणी निवास में रखा गया, जहां मिथिलांचल के लोगों, शुभचिंतकों और गणमान्य व्यक्तियों ने अंतिम दर्शन किए।महारानी का जन्म 22 अक्टूबर 1932 को मंगरौनी में पंडित हंसमणि झा के आवास पर चौथी पुत्री के रूप में हुआ था। उनका विवाह 5 मई 1943 को महाराजाधिराज डॉ. सर कामेश्वर सिंह से हुआ।

- Sponsored Ads-

वे महाराजाधिराज की तीसरी एवं अंतिम पत्नी थीं। उनकी पूर्ववर्ती पत्नियां महारानी राजलक्ष्मी और महारानी कामेश्वरी प्रिया पहले ही दिवंगत हो चुकी थीं। इस प्रकार महारानी कामसुंदरी देवी राजपरिवार की सबसे वरिष्ठ सदस्य थीं।निधन उपरांत उनके पार्थिव शरीर को निज निवास से कामेश्वर सिंह संस्कृत विश्वविद्यालय होते हुए माधवेश्वर परिसर, श्यामा माई कैंपस लाया गया, जहां महाराजाधिराज कामेश्वर सिंह के दाहिने ओर उनका अंतिम संस्कार किया गया। शाम 4 बजकर 40 मिनट पर उन्हें मुखाग्नि उनके बड़े पौत्र कुमार रत्नेश्वर सिंह ने दी।

कुमार रत्नेश्वर सिंह महाराजाधिराज कामेश्वर सिंह के छोटे भाई राजबहादुर विश्वेश्वर सिंह के पौत्र हैं और वंश में वरिष्ठतम सदस्य हैं।महारानीधिरानी कामसुंदरी देवी सामाजिक और परोपकारी कार्यों के लिए जानी जाती थीं। उन्होंने अपने पति की स्मृति में महाराजाधिराज कामेश्वर सिंह कल्याणी फाउंडेशन की स्थापना की, जिसके माध्यम से शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सेवा के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण कार्य किए गए।

उनके अंतिम संस्कार में दरभंगा एवं आसपास के क्षेत्रों से सैकड़ों लोग शामिल हुए। राज्य सरकार की ओर से मंत्री दिलीप जायसवाल एवं मंत्री मदन सहनी ने श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके अलावा जिलाधिकारी दरभंगा, कामेश्वर सिंह संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. लक्ष्मीनिवास पाण्डेय, कुलसचिव प्रो. बी.पी. त्रिपाठी सहित पत्रकार जगत, शिक्षाविदों और समाज के विभिन्न वर्गों के गणमान्य लोगों ने भावभीनी श्रद्धांजलि दी।दरभंगा राजघराने की अंतिम महारानी के निधन के साथ ही मिथिला ने एक ऐतिहासिक युग को खो दिया है।

- Sponsored Ads-
Share This Article
Leave a Comment