किसान पंजीकरण महाअभियान में सम्पूर्ण राज्य में प्रथम स्थान पर रहा वैशाली जिला

Rakesh Gupta
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-डॉ० संजय (हाजीपुर)-
बिहार सरकार द्वारा संचालित किसान पंजीकरण महाअभियान का समापन वैशाली जिले में गर्वपूर्ण उपलब्धि के साथ हुआ। *अभियान के अंतिम दिन 11,332 किसानों का पंजीकरण कर वैशाली ने पूरे राज्य में प्रथम स्थान प्राप्त किया। यह उपलब्धि न केवल आँकड़ों की जीत है, बल्कि उस सोच की विजय है जिसमें प्रशासन स्वयं *किसानों के दरवाज़े पहुँचने की अपनी प्रतिबद्धता और निष्पादन क्षमता का सशक्त प्रमाण देता है।

यद्यपि अभियान के दौरान जिले की समग्र रैंकिंग शीर्ष पाँच में क्रमशः ऊपर-नीचे होती रही, किंतु समापन राज्य में सर्वोच्च स्थान के साथ हुआ। यह स्पष्ट करता है कि वैशाली ने निरंतरता, रणनीति और अंतिम क्षणों तक पूर्ण समर्पण के बल पर निर्णायक बढ़त हासिल की।

पंजीकरण से सशक्तिकरण तक: महाभियान का उद्देश्य

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किसान पंजीकरण अभियान को केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया न मानते हुए किसानों के सशक्तिकरण की दिशा में एक सुनियोजित पहल के रूप में दो चरणों में संचालित किया गया।प्रथम चरण (महाअभियान) दिनांक 06 जनवरी से 11 जनवरी 2026 तक चला, जिसमें व्यापक जनभागीदारी के माध्यम से अभियान की सुदृढ़ नींव रखी गई। इस चरण में भगवानपुर प्रखंड ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए अग्रणी भूमिका निभाई।

इसके पश्चात द्वितीय चरण में अभियान ने और अधिक गति, विस्तार एवं प्रभावशीलता प्राप्त की। इस चरण में पातेपुर प्रखंड ने नेतृत्व करते हुए पंजीकरण की रफ्तार को नई ऊँचाई दी। दोनों चरणों की संयुक्त ऊर्जा, रणनीति एवं जनसहभागिता ने इस अभियान को एक साधारण पंजीकरण कार्यक्रम से आगे बढ़ाकर किसान सशक्तिकरण की एक प्रभावी मुहिम में परिवर्तित कर दिया।

आँकड़े क्या कहते हैं?

अभियान के दौरान जिले में 1,42,681 किसान पंजीकरण, 2,21,328 e-KYC तथा 2,14,562 PM-Kisan पंजीकरण पूर्ण किए गए जिससे कुल किसान पंजीकरण 66 प्रतिशत तक पहुँचा। ये आँकड़े इस बात का प्रमाण हैं कि जिला प्रशासन ने योजनाओं को कागज़ से आगे बढ़ाकर वास्तविक लाभार्थियों तक प्रभावी ढंग से पहुँचाया।

जब प्रशासन ने कहा — कोई किसान छूटे नहीं

  • जिलाधिकारी, वैशाली,वर्षा सिंह (भा.प्र.से.) के नेतृत्व में यह अभियान केवल पंजीकरण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि किसान के साथ खड़े प्रशासन की पहचान बन गया। शुरुआत से ही संदेश साफ़ था— कोई भी पात्र किसान पीछे नहीं रहेगा चाहे उसकी राह भौगोलिक रूप से कठिन हो, सामाजिक रूप से उपेक्षित हो या तकनीकी रूप से जटिल।

इसी सोच के साथ प्रशासन ने महादलित टोले में विशेष शिविर लगाए ताकि योजना खुद चलकर किसान तक पहुँचे। मौसम ने जब चुनौती दी तब भी काम नहीं रुका— अलाव जलाकर स्वतः किसानों को इकट्ठा किया गया ताकि प्रतिकूलता किसी किसान को अधिकार से वंचित न कर सके।

इस अभियान की असली ताक़त बनी महिलाओं की भागीदारी। स्वयं जिलाधिकारी के नेतृत्व में महिलाओं को आगे लाया गया—जिला से लेकर प्रखंड और फील्ड तक। नतीजा यह रहा कि *फेशियल रिकग्निशन आधारित पंजीकरण को लेकर महिलाओं की झिझक टूटी और बड़ी संख्या में महिला किसान इस अभियान का चेहरा बनीं।

कैंप के हर दिन प्रशासनिक टीम ने सुबह 6 बजे से रात 9 बजे तक फील्ड में रहकर काम किया। जिलाधिकारी द्वारा लगातार रणनीति बैठकें, फील्ड से सीधा फीडबैक और त्वरित निर्णय यह सुनिश्चित करते रहे कि तकनीकी हो या सामाजिक—हर अड़चन मौके पर ही हल हो।

अभियान में तकनीक का उपयोग बेहद प्रभावी और सृजनात्मक ढंग से किया गया। केंद्रीकृत नियंत्रण कक्ष (IC3- Integrated Control and Command Centre) के माध्यम से पंजीकरण से जुड़ी तकनीकी समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित किया गया। व्हाट्सएप आधारित समन्वय, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग, डोर-टू-डोर किसान पंजीकरण एवं ई-केवाईसी तथा पंचायत भवन, सीएससी और वसुधा केंद्रों जैसे स्थानीय संसाधनों के समुचित उपयोग ने किसान पंजीकरण प्रक्रिया को सरल, तेज़ और भरोसेमंद बनाया। तकनीक ने इस अभियान में किसान और व्यवस्था के बीच की दूरी को समाप्त करने में निर्णायक भूमिका निभाई।

प्रशासन: एक तंत्र

जिला पदाधिकारी, वैशाली से इस उपलब्धि के मुख्य स्तंभ क्या रहें पृच्छा करने पर ये बताया गया कि किसान पंजीकरण महाअभियान के दौरान वैशाली में प्रशासन ने एक संगठित और सक्रिय तंत्र के रूप में कार्य किया। जिला से लेकर फील्ड स्तर तक हर स्तर पर स्पष्ट जिम्मेदारी, तेज़ निर्णय और ज़मीनी उपस्थिति दिखाई दी। जहाँ आवश्यकता पड़ी वहाँ …

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