मुजफ्फरपुर: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत दो दिवसीय दौरे पर मुजफ्फरपुर पहुंचे हैं | उनके इस प्रवास से उत्तर बिहार में संघ की गतिविधियों को नई ऊर्जा मिलने की उम्मीद है | डॉ. भागवत रविवार 25 जनवरी को मुजफ्फरपुर पहुंचे और पहले दिन एक महत्वपूर्ण गोष्ठी को संबोधित किया. यह दौरा बिहार में संघ के संगठन विस्तार और सामाजिक परिवर्तन के प्रयासों का हिस्सा माना जा रहा है |
आज एक रिसोर्ट सामाजिक सद्भाव विचार गोष्टी सह संवाद को संबोधित करते हुए कहा कि अपना देश आगे बढ़े, दुनिया का सिरमौर बने इसकी परिस्थिति भी बन रही है। लेकिन चुनौती भी कम नहीं है, कुछ देशों को भारत का आगे बढ़ना अच्छा नहीं लग रहा है, उन्हें अपनी दुकान बंद होने का खतरा दिख रहा है, जिससे वे आगे बढ़ने के मार्ग में बाधा खड़ी करने में लगे हुए हैं। उत्तर बिहार के सभी जिलों से शिक्षा, सामाजिक सेवा, उद्योग और अन्य क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने इसमें भाग लिया. कार्यक्रम में करीब 300 प्रबुद्धजन शामिल हुए, जिन्होंने समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में विचार-विमर्श किया |
हिन्दू समाज को तीन बच्चे पैदा करने से किसी ने रोका नहीं
जनसंख्या नियंत्रण के सवाल पर कहा कि हिन्दू समाज को तीन बच्चे पैदा करने से किसी ने रोका तो नहीं है। सरकार भी 2.1 बच्चे पैदा करने को कहती है। उन्होंने कहा कि देश को हिन्दू राष्ट्र घोषित करने की जरूरत नहीं है। यह हिन्दू राष्ट्र ही है। समाज में विविधता है, अलगाव नहीं है। अंग्रेजों ने अलगाव को चौड़ा कर शासन किया। उस अलगाव को दूर कर हिन्दू समाज को एकजुट करना है।
आज मोहन भागवत मुजफ्फरपुर-दरभंगा फोरलेन स्थित गरहां के एक रिसॉर्ट में आयोजित एक विशेष ‘सामाजिक सद्भाव गोष्ठी’ में शामिल हुवे । इस गोष्ठी का मुख्य उद्देश्य समाज के विभिन्न वर्गों के बीच संवाद स्थापित करना और राष्ट्र निर्माण में सबकी सहभागिता बनाना है। संघ प्रमुख इस दौरान ‘समाज परिवर्तन में सज्जन शक्ति की भूमिका’ विषय पर अपना उद्बोधन दिया ।
