(हरिप्रसाद शर्मा) पुष्कर/ अजमेर/ धार्मिक नगरी पुष्कर में गुरुवार को गऊ घाट पर महात्मा गांधी स्मृति समिति के बैनर तले गाँधी की भस्मी विसर्जन स्थल पर बापू को श्रद्धा दिवस मनाया ।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय के डीन डॉक्टर नगेन्द्र सिंह मानवता पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि परीक्षा में अंक पाना ही लक्ष्य नहीं है ।उन्होंने कहा कि गाँधी की शिक्षा को समझने वाले हिंसा की प्रवृति पर क़ाबू पाकर अहिंसा की ओर आना मानवतावाद है । यह भी कहा कि गांधी कोई साधारण व्यक्ति नहीं थे ।
कृष्ण ने भी गाँधी जी पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि कई वर्षों बाद आज भी यह कथन गाँधीवाद का जीवन दिखाई दे रहा है । दाड़ी मार्च, भारत छोड़ो आन्दोलन है ।कृष्णा ने वैष्णव भजन “जन तो तेने कहिए जे पीड़ पराई जाण् रे “गाकर सभी को श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया ।
साध्वी अर्पणा दीदी ने कहा कि सत्य अहिंसा से ही वसुधैव कुटुंबकम- मन में शांति लाई जा सकती हैं । गायत्री कन्या महाविद्यालय के प्राचार्य डाक्टर सुरेश वैष्णव ने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि श्रीराम शर्मा ने भी महात्मा गाँधी के साथ स्वतंत्रता आन्दोलन में अपना योगदान दिया ।
कार्यक्रम के आयोजक गांधीवादी चिन्तक एवं लेखक जनार्दन शर्मा ने शांति पाठ के साथ कार्यक्रम की शुरुआत की सच्चाई , अच्छाई एवं नैतिकता की ओर गाँधी है,भोतिकता की ओर नहीं अहिंसा की ओर है। उन्होंने कहा कि मशीन ओर युद्ध संयुक्त राष्ट्र संघ ने द्वितीय युद्ध के बाद कह युद्ध नहीं होना चाहिए । अन्तर्राष्ट्रीय जो मतभेद है वह युद्ध से नहीं होगा । अहिंसावाद से ही युद्ध को रोका जा सकता है ।समिति की ओर से मानवता बाद पर निबन्ध प्रतियोगिता में प्रथम, द्वितीय ,तृतीय आने वालों को पुरस्कार देकर सम्मानित किया ।
सामाजिक कार्यकर्ता अरूण पाराशर ने अपने विचारों में दुःख व्यक्त करते हुए कहा कि आज भी देश मे कुछ ऐसे तत्व हैं जो गाँधी को नहीं गोड़से को पूजने वाले हैंदिव्यांग विघालय के दिव्यांग छात्रों ने बापू के बंदर तीन का चित्रण किया ।कार्यक्रम में रिटायर्ड वरिष्ठ नर्सिंग आफ़िसर मोहनलाल शर्मा, भंवरलालशर्मा अशोक पाराशर , दिव्यांग विघालय के प्रीतम सचिन पाराशर, हरिप्रसाद शर्मा, एवं विद्यार्थी थे। कार्यक्रम का संचालन समिति के सेक्रेटरी रिटायर्ड प्रिंसिपल डाक्टर भगवती टांक ने किया गया ।
