विजया नाम की एकादशी वेदों में वर्णित
(हरिप्रसाद शर्मा) पुष्कर/ अजमेर/ज्योतिष पंचांग खगोल विज्ञान के अनुसार फाल्गुन कृष्ण पक्ष एकादशी शुक्रवार 13 फरवरी सन 2026 को विजया नाम की एकादशी वेदों में वर्णित है शास्त्र में रामायण विष्णु पुराण में वर्णित है कि विजया एकादशी का व्रत भगवान श्री राम ने वानर से ना के साथ त्रेता युग में समुद्र के किनारे लंका जाने के लिए मार्ग नहीं मिलने पर इस व्रत को निराहार फलाहार लेकर किया।
यह जानकारी देते हुए पंडित कैलाश नाथ दाधीच ने बताया कि जिससे भगवान श्री राम एवं सेना को मार्ग समुद्र में मिलाए ओर श्री रामेश्वरम की स्थापना हुई ,समुद्र पर पुलिया का निर्माण हुआ एवं लंका पर भगवान की विजय श्री प्रधान हुई ।यह एकादशी विजया के पुण्य प्रताप से मिली । पंडित दाधीच के अनुसार इस एकादशी के व्रत करने मात्र से शत्रुओं का विनाश एवं पापों का नाश होता है। घर परिवार में सुख समृद्धि शांति एवं विजय श्री प्राप्त होती है ।सभी कार्यों में विजय श्री प्रदान होती है ।कठिन से कठिन कार्य भी सुलभ प्रताप की ओर योग बनता है ।वैष्णव संप्रदाय, निंबार्क सम्प्रदाय,
गृहस्थ सम्प्रदाय सभी के लिए एक ही एकादशी है ।
महाशिवरात्रि पर्व
फाल्गुन कृष्ण त्रयोदशी रविवार 15 फरवरी सन 2026 को अमृत योग ,सर्वार्थ सिद्धि योग, व्यतिपात योग ,मकर राशि के चंद्रमा में उच्च राशि के मंगल में शिवरात्रि का योग बना है ।जो सर्वश्रेष्ठ योग है इस दिन पाताल लोक की भद्र रहेगी ।जो महाशिवरात्रि पर्व के लिए एवं जिनकी जन्मपत्री वर्ष पत्रि मैं कालसर्प योग नीच राशि का चंद्रमा राहु केतु अशुभ योग को निवारण के लिए यह दिन नक्षत्र वार योग श्रेष्ठ बन रहा है ।चार पहर की पूजा एवं दिन-रात की पूजा करने से रुद्राभिषेक नमक चमक का पाठ शिव चालीसा महामृत्युंजय जाप करने से शुभ योग बनता है ।दूध में केसर चंदन कपूर मिलाकर अभिषेक करने से मनोकामना परिपूर्ण होती है ।दूध में शहद मिलाकर पूजा करने से व्यापार वृद्धि का योग एवं पंचामृत स्नान करने से परिवार में सुख समृद्धि तीर्थ के जल के स्नान करवाने से अक्षय गुना फल मिलता है ।इस बार महाशिवरात्रि पर्व सर्वश्रेष्ठ योग में आगमन हुआ है जो विश्व के लिए भारत के लिए जनमानस के लिए सुख समृद्धि सूचक है ।बिल्लू पत्र ,आंकड़ा ,धतूरा, सुगंधित पुष्प, इत्र ,परफ्यूम अर्पित करने से महादेव प्रसन्न होते हैं ।सन्यासी की सेवा संत की सेवा गौ माता की सेवा करने से अनंत गुना फल प्राप्त होता है ।जागरण नृत्य गान भजन कीर्तन ओम नमः शिवाय की धुन लगाने से मानसिक शांति एवं मोक्ष गति प्राप्त होती है। पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है ।
