जेपीयू में सांकृत्यायन जयंती: ज्ञान, भाषा और विचार की विरासत को सहेजने की जरूरत: कुलपति

Rakesh Gupta
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छपरा। राहुल सांकृत्यायन की जयंती के अवसर पर जयप्रकाश विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में एक गरिमामय कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में वक्ताओं ने सांकृत्यायन के बहुआयामी व्यक्तित्व एवं उनके विशाल कृतित्व पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए उन्हें भारतीय बौद्धिक परंपरा का अद्वितीय स्तंभ बताया।


इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. परमेंद्र कुमार बाजपेई ने राहुल सांकृत्यायन को महान भाषाविद, चिंतक और ज्ञान-यात्री बताते हुए कहा कि उनकी रचनात्मक विरासत आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने विश्वविद्यालय पुस्तकालय में सांकृत्यायन की समग्र ग्रंथावली उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया और विद्यार्थियों से नियमित रूप से पुस्तकालय जाने की अपील की।

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कार्यक्रम का बीज वक्तव्य हिंदी विभाग के प्रो. अजय कुमार ने प्रस्तुत किया। उन्होंने राहुल सांकृत्यायन के साहित्य, इतिहास, दर्शन और समाज पर पड़े गहरे प्रभाव को रेखांकित किया। जबकि अंग्रेजी विभाग के प्रो. गजेंद्र ने सांकृत्यायन के व्यक्तित्व निर्माण में छपरा की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए स्थानीय सांस्कृतिक परिवेश की महत्ता को रेखांकित किया। वहीं प्रो. अमरनाथ ने उनके नाटकों के महत्व और भोजपुरी भाषा के प्रति उनके विशेष लगाव को उजागर किया।


दर्शनशास्त्र विभाग के अध्यक्ष प्रो. सुशील कुमार श्रीवास्तव ने अपने संबोधन में सांकृत्यायन के दार्शनिक दृष्टिकोण को समकालीन संदर्भों में प्रासंगिक बताया, जबकि उर्दू विभाग के प्रो. शमी अहमद ने उनके कृतित्व को भारतीय भाषाई समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण बताया।
कार्यक्रम में कुलसचिव प्रो. नारायण दास सहित विभिन्न विभागों के अनेक प्राध्यापक उपस्थित रहे। हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू एवं दर्शनशास्त्र विभाग के शिक्षकों ने अपने विचार साझा किए और सांकृत्यायन के साहित्यिक योगदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने पर बल दिया।


कार्यक्रम का संचालन प्रो. सिद्धार्थ शंकर ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन प्रो. हरिश्चंद ने किया। इस अवसर पर हिंदी एवं दर्शनशास्त्र विभाग के विद्यार्थियों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही, जिसने कार्यक्रम को जीवंत और प्रेरणादायी बना दिया।

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