जमुई: डीएम ने टी.बी. मुक्त भारत अभियान को लेकर किया समीक्षा। जिले में आगामी 14 अगस्त तक 1.72 लाख स्क्रीनिंग का बड़ा लक्ष्य निर्धारित।

Rakesh Gupta
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मृगांक शेखर सिंह: जमुई

जमुई जिले को पूरी तरह से टी.बी. मुक्त बनाने और स्वास्थ्य सेवाओं को जमीनी स्तर तक सुदृढ़ करने के उद्देश्य से समाहरणालय स्थित संवाद कक्ष में जिला पदाधिकारी की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक का आयोजन किया गया। इस महत्वपूर्ण बैठक में जिलाधिकारी ने ‘टी.बी. मुक्त भारत अभियान’ के तहत अब तक की प्रगति का गहन विश्लेषण किया और स्पष्ट निर्देश दिया कि जिले में इस अभियान को पूरी गंभीरता के साथ मिशन मोड में चलाया जाए। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय प्राथमिकताओं को ध्यान में रखते हुए जिले के स्वास्थ्य ढांचे को पूरी तरह सक्रिय होना होगा, ताकि समय सीमा के भीतर हर चिन्हित नागरिक तक स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुँच सुनिश्चित की जा सके।

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बैठक में जिलाधिकारी ने राज्य सरकार द्वारा जमुई जिला के लिए निर्धारित लक्ष्य और समय-सीमा के बारे में जानकारी देते हुए उपस्थित सभी पदाधिकारी को कहा कि जिले के लिए कुल 1 लाख 72 हजार स्क्रीनिंग का एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया। उन्होंने सिविल सर्जन को कड़े लहजे में निर्देशित किया कि आगामी 14 अगस्त 2026 तक इस निर्धारित लक्ष्य को हर हाल में प्राप्त करना सुनिश्चित करें, जिसके लिए संपूर्ण जिले में टी.बी. जाँच की गति को तत्काल प्रभाव से बढ़ाया जाए। समीक्षा के दौरान जिले की वर्तमान तकनीकी क्षमता को रेखांकित करते हुए बताया गया कि वर्तमान में उपलब्ध संसाधनों से प्रतिदिन औसतन 250 से 300 मरीजों की जाँच की जा सकती है। इस क्षमता का शत-प्रतिशत लाभ उठाने के लिए जिले में 200 विशेष केंद्रों की व्यवस्था कर उनके माध्यम से वेरिफिकेशन और स्क्रीनिंग की संख्या की निरंतर मॉनिटरिंग करने की रणनीति बनाई गई है। इसके साथ ही सुदूर ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की सहूलियत के लिए मोबाइल जाँच व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ व क्रियाशील करने का आदेश दिया गया है।


अभियान के विकेंद्रीकरण पर जोर देते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि प्रखंड स्तर से लेकर सभी स्वास्थ्य एवं वेलनेस सेंटरों पर स्क्रीनिंग की ऐसी व्यवस्था की जाए जिससे प्राथमिक स्तर पर ही मरीजों की सटीक पहचान हो सके। वर्तमान कार्यक्षमता को बढ़ाने के लिए विभाग में उपलब्ध मानव बल (मैनपावर) की समीक्षा कर उसे भी सुव्यवस्थित किया जा रहा है। जिलाधिकारी ने इस लड़ाई को केवल स्वास्थ्य विभाग तक सीमित न रखकर एक सामूहिक जन-आंदोलन बनाने की बात कही। उन्होंने शिक्षा विभाग और जीविका समूहों को इस अभियान से जोड़ते हुए आपसी बेहतर समन्वय के साथ कार्य करने का निर्देश दिया ताकि समाज के अंतिम व्यक्ति तक स्क्रीनिंग की प्रक्रिया सुलभ हो सके।इसके अतिरिक्त, ग्रामीण क्षेत्रों में इस व्यवस्था को पूरी तरह चुस्त-दुरुस्त करने के उद्देश्य से विद्यालयों, आंगनवाड़ी केंद्रों और गाँवों में विशेष ध्यान केंद्रित करने की बात कही गई।


जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि धरातल पर काम कर रहीं आशा कार्यकर्ताओं के कार्यों की नियमित रूप से समीक्षा की जाएगी ताकि उनकी सक्रियता और जवाबदेही बनी रहे। इस महत्वपूर्ण बैठक में उप विकास आयुक्त, अपर समाहर्ता, सिविल सर्जन, सभी प्रखंड विकास पदाधिकारी पदाधिकारी, तथा अन्य संबंधित जिला स्तरीय पदाधिकारी उपस्थित थे, जिन्होंने इस अभियान को तय समय में सफल बनाने का सामूहिक संकल्प लिया।

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