श्रद्धा से खिलवाड़ या चढ़ावे का दबाव।
अर्जुन कुमार झा/धर्मविजय गुप्ता/समस्तीपुर आस्था और श्रद्धा के केंद्र माने जाने वाले समस्तीपुर के प्रसिद्ध सारी स्थिति मणिपुर मंदिर की व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। श्रद्धालुओं का आरोप है कि मंदिर में पूजा-अर्चना और प्रसाद चढ़ाने के दौरान कुछ पंडों एवं उनके सहयोगियों द्वारा चढ़ावे के लिए दबाव बनाया जाता है। चढ़ावा नहीं देने या कम राशि देने वाले श्रद्धालुओं के साथ कथित तौर पर दुर्व्यवहार किए जाने की शिकायतें भी सामने आ रही हैं।

वही बताते चले कि श्रद्धालुओं के द्वारा कहने अनुसार मणिपुर भगवती मंदिर में दर्शन और पूजा के लिए आने वाले लोगों से सहयोग अथवा चढ़ावे के नाम पर राशि मांगी जाती है।राशि देने में असमर्थता जताने पर कथित रूप से उन्हें डांट-फटकार का सामना करना पड़ता है।घंटों कतार में लगी महिला श्रद्धालु के साथ कथित दुर्व्यवहार कामामला उस समय और गंभीर हो गया।जब घंटों कतार में खड़ी एक महिला श्रद्धालु की बारी आई।तो श्रद्धालु द्वारा प्रसाद पूजा के लिए सहयोगी पंडा बिपिन झा को दिया गया। आरोप है कि पंडा ने पहले पैसे देने की बात कही।
वहीमहिला श्रद्धालु ने कथित तौर पर बताया कि पूजा कराने के लिए पैसे बाहर मौजूद व्यक्ति के पास हैं और वह पूजा के बाद राशि दे देंगी।आरोप है कि इसके बाद पंडा ने प्रसाद की पॉलीथिन भी चढ़ाने से पहले ही उन्हें डांट-फटकार कर मंदिर से बाहर जाने को कह दिया।बताया जाता है कि घटना से आहत महिला श्रद्धालु मायूस होकर वहां से निकल गई।सवाल यह है कि घंटों इंतजार के बाद भगवती माँ के दर्शन और पूजा की उम्मीद लेकर पहुंची किसी श्रद्धालु के साथ यदि ऐसा व्यवहार होता है तो उसके मन पर इसका क्या असर पड़ेगा।दस रुपये के चढ़ावे पर भी कथित तौर पर जताई नाराजगी।शिकायतकर्ता के अनुसार एक अन्य मौके पर जब मंदिर में प्रसाद के साथ महज दस रुपये का चढ़ावा दिया गया तब मुख्य पंडा सुमन झा द्वारा कथित तौर पर राशि स्वीकार करने के बजाय नाराजगी जताई गई।आरोप है कि उन्होंने पैसे को फेंकते हुए सवाल किया कि यदि पैसा नहीं है तो नारियल और लड्डू क्यों चढ़ाने आए हैं।वही श्रद्धालुओं का कहना है कि मंदिर भगवान की आस्था का स्थान है।जहां भक्त अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार चढ़ावा चढ़ाता है।ऐसे में चढ़ावे की राशि को लेकर किसी श्रद्धालु को अपमानित किया जाना आस्था की भावना को ठेस पहुंचाने वाला व्यवहार माना जा सकता है।वेतन मिलने के बावजूद चढ़ावे को लेकर सवाल।स्थानीय लोगों का यह भी दावा है कि मंदिर में कार्यरत पंडों एवं सहयोगियों को ट्रस्ट की ओर से वेतन दिया जाता है।ऐसे में श्रद्धालुओं से कथित रूप से चढ़ावे के लिए दबाव बनाए जाने की शिकायतों ने मंदिर प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।लोगों का कहना है कि मंदिर में आने वाला प्रत्येक व्यक्ति अपनी श्रद्धा और क्षमता के अनुसार पूजा करता है।किसी की आर्थिक स्थिति देखकर उसके साथ भेदभाव या कथित दुर्व्यवहार किया जाना उचित नहीं है।प्रशासन और न्यास बोर्ड से कार्रवाई की मांग किया गया है।श्रद्धालुओं एवं स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन और संबंधित न्यास बोर्ड से पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि भगवती मंदिर में दर्शन, पूजा अर्चना और प्रसाद चढ़ाने को लेकर स्पष्ट एवं पारदर्शी व्यवस्था होनी चाहिए।ताकि किसी भी श्रद्धालु को अपमान या दबाव का सामना न करना पड़े।लोगों ने मांग की है कि मंदिर परिसर में चढ़ावे और पूजा के लिए निर्धारित नियमों को सार्वजनिक किया जाए तथा यदि किसी व्यक्ति द्वारा जबरन राशि वसूलने अथवा श्रद्धालुओं के साथ दुर्व्यवहार की शिकायत सही पाई जाती है तो उसके विरुद्ध कार्रवाई की जाए।आस्था के इस पवित्र स्थल पर सवाल सिर्फ चढ़ावे का नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं के सम्मान का है। मंदिर में आने वाला भक्त आर्थिक रूप से सक्षम हो या कमजोर—उसकी श्रद्धा का मूल्य किसी राशि से नहीं आंका जाना चाहिए। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन और न्यास बोर्ड इन शिकायतों पर क्या संज्ञान लेते हैं,कि नही।जिसकी इंतजार किया जा रहा है।
