विकास, विश्वास और दूरदर्शिता का संगम: मुख्यमंत्री के नेतृत्व में समृद्धि की ओर बिहार
जनता से जुड़ाव और सुशासन की मिसाल बने मुख्यमंत्री, मंच से दिया विकास का स्पष्ट संदेश
नेतृत्व का नया मानक: मुख्यमंत्री के संकल्प, संवाद और समर्पण से मजबूत होता बिहार
मो. अयूब
छपरा। राज्य के राजनीतिक और सामाजिक परिदृश्य में एक बार फिर उस समय नई ऊर्जा और उत्साह का संचार देखने को मिला, जब मुख्यमंत्री ने समृद्ध यात्रा के तहत सारण के बिन टोलिया में आयोजित जन संवाद मंच से भव्य जनसभा को संबोधित किया। कार्यक्रम स्थल पर उमड़ी जनसैलाब और मंच पर उपस्थित जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों तथा सामाजिक कार्यकर्ताओं की मौजूदगी इस बात का प्रमाण था कि मुख्यमंत्री का नेतृत्व आज केवल सत्ता तक सीमित नहीं, बल्कि जनता के विश्वास और उम्मीद गहराई से जुड़ा हुआ है।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बिनटोलिया में आयोजित सरकारी कार्यक्रम के दौरान मंच से संबोधन करते हुए राज्य सरकार द्वारा संचालित विभिन्न विकास योजनाओं, प्रशासनिक व्यवस्थाओं और भविष्य की कार्ययोजनाओं पर विस्तार से चर्चा की। कार्यक्रम में मंत्रिमंडल के सदस्य, जनप्रतिनिधि, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी एवं बड़ी संख्या में महिलाएं एवं आम नागरिक उपस्थित रहे। आयोजन स्थल पर अभूतपूर्व सुरक्षा एवं प्रशासनिक प्रबंधन की व्यवस्था दिखी।
मुख्यमंत्री न अपने संबोधन की शुरुआत उपस्थित जनसमूह का अभिवादन करते हुए की और कहा कि सरकार की प्राथमिकता राज्य के समग्र विकास के साथ-साथ शासन व्यवस्था को मजबूत करना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विकास योजनाओं का उद्देश्य केवल घोषणाओं तक सीमित न होकर उनका वास्तविक लाभ आम जनता तक पहुँचाना है। इसके लिए प्रशासनिक स्तर पर पारदर्शिता, जवाबदेही और समयबद्ध क्रियान्वयन आवश्यक है।
विकास योजनाओं की स्थिति पर चर्चा
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में सड़क, पुल, बिजली, पेयजल, शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़ी योजनाओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आधारभूत संरचना के सुदृढ़ होने से ही सामाजिक और आर्थिक विकास संभव है। राज्य सरकार द्वारा ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में समान रूप से विकास कार्यों को आगे बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि योजनाओं की नियमित समीक्षा की जाए और किसी भी स्तर पर लापरवाही न हो।
प्रशासनिक व्यवस्था पर जोर
मुख्यमंत्री ने प्रशासनिक व्यवस्था को सरकार की रीढ़ बताते हुए कहा कि अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने स्पष्ट किया कि योजनाओं के क्रियान्वयन में विभागीय समन्वय आवश्यक है। कार्यक्रम के दौरान जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन और अन्य विभागों के अधिकारियों की उपस्थिति यह दर्शाती है कि शासन और प्रशासन एक साथ मिलकर कार्य कर रहे हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि जनता की शिकायतों का समय पर निस्तारण प्रशासन की जिम्मेदारी है। इसके लिए फील्ड स्तर पर अधिकारियों को सक्रिय रहने और जनता से संवाद बनाए रखने की आवश्यकता है।
कानून-व्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था
कार्यक्रम के दौरान कानून-व्यवस्था को लेकर भी चर्चा की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास के लिए शांतिपूर्ण माहौल आवश्यक है। पुलिस और प्रशासन को आपसी समन्वय से कार्य करने की जरूरत हैं। आयोजन स्थल पर सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे, जिससे कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।
जनसंवाद और प्रशासनिक जवाबदेही
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि सरकार जनता के प्रति जवाबदेह है। उन्होंने बताया कि विभिन्न माध्यमों से जनसंवाद को बढ़ावा दिया जा रहा है, ताकि लोगों की समस्याएं सीधे प्रशासन तक पहुँच सकें। उन्होंने उन्होंने अपने संबोधन में अधिकारियों को जनप्रतिनिधियों के साथ समन्वय बनाकर क्षेत्रीय समस्याओं का समाधान करने की आवश्यकता पर बोल दिया।
शिक्षा और स्वास्थ्य पर सरकार का फोकस
मुख्यमंत्री ने शिक्षा और स्वास्थ्य को मानव विकास का आधार बताते हुए कहा कि इन क्षेत्रों में सुधार सरकार की प्राथमिकता है। स्कूलों और स्वास्थ्य संस्थानों की बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने पर कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि सरकारी सेवाओं का लाभ पात्र व्यक्तियों तक पहुँचे।
कार्यक्रम की प्रशासनिक व्यवस्था
कार्यक्रम के दौरान मंच संचालन, बैठक व्यवस्था, यातायात नियंत्रण और सुरक्षा प्रबंधन जिला प्रशासन द्वारा किया गया। संबंधित विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों को अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपी गई थीं। कार्यक्रम स्थल पर चिकित्सा, अग्निशमन और यातायात से संबंधित व्यवस्थाएं भी उपलब…
