अजमेर :केकड़ी में हेड कॉन्स्टेबल राजेश मीणा सस्पेंड, सस्पेंशन पर सियासी मुद्दा, कांग्रेस ने लगाए ये गंभीर आरोप

Rakesh Gupta
- Sponsored Ads-

(हरिप्रसाद शर्मा) अजमेर :अजमेर जिले के केकड़ी सदर थाने में तैनात हेड कॉन्स्टेबल राजेश मीणा को सस्पेंड किए जाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। आरोप है कि मीणा ने राजकीय अस्पताल के सामने लोगों से मारपीट की, पिस्टल दिखाकर दहशत फैलायी, कार में तोड़फोड़ की और बाद में थाने में भी मारपीट की। इसी आधार पर पुलिस विभाग ने उन्हें निलंबित कर दिया।

हालांकि, हेड कॉन्स्टेबल राजेश मीणा ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे दबाव और साजिश का परिणाम बताया है। मीणा का कहना है कि वे एक दिन पहले आरोपी को एस्कॉर्ट करते हुए गुलगांव बॉर्डर तक गए और वहां से सावर पुलिस को सुपुर्द किया। इसी दौरान केकड़ी सदर थाने के एसएचओ जगदीश प्रसाद चौधरी का फोन आया और उन्हें तत्काल देवपुरा पहुंचने के निर्देश दिए गए।

- Sponsored Ads-

देवपुरा पहुंचने पर उनके साथ कॉन्स्टेबल कैलाश और चालक छोटू भी मौजूद थे। मौके पर एक तरफ करीब 60-70 लोग थे, जबकि दूसरी ओर परिवादी के साथ 25-30 लोग उपस्थित थे। इस दौरान परिवादी और उसकी पत्नी के साथ मारपीट की गई।

मीणा का दावा है कि उन्होंने पूरे घटनाक्रम की सूचना तुरंत एसएचओ और सीओ को दी। इसके बाद सावर से एएसआई दायमा मौके पर पहुंचे और फिर एसएचओ जगदीश प्रसाद चौधरी भी वहां आए। मीणा के अनुसार, एसएचओ ने उन्हें बताया कि एक एमएलए का फोन आया है और तुरंत सभी को छोड़ देने के निर्देश दिए गए। मीणा ने आरोप लगाया कि संबंधित एमएलए ने उन्हें धमकी भी दी।

हेड कॉन्स्टेबल का कहना है कि अवैध खनन से जुड़े चार डंपर, चार ट्रैक्टर और दो जेसीबी को जब्त कर थाने लाया गया था। थाने से इन्हें छुड़ाने का प्रयास किया जा रहा था, लेकिन उन्होंने नियमों के तहत कार्रवाई करते हुए वाहनों को छोड़ने से इनकार किया। इसी बात से नाराज होकर राजनीतिक दबाव बनाया गया और उन्हें सस्पेंड करा दिया गया। मीणा का कहना है कि इस मामले में उनकी कोई गलती नहीं है और उन्होंने अपना कर्तव्य निभाया है।

अजमेर जिले के केकड़ी सदर थाने में तैनात हेड कॉन्स्टेबल राजेश मीणा को सस्पेंड किए जाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। आरोप है कि मीणा ने राजकीय अस्पताल के सामने लोगों से मारपीट की, पिस्टल दिखाकर दहशत फैलायी, कार में तोड़फोड़ की और बाद में थाने में भी मारपीट की। इसी आधार पर पुलिस विभाग ने उन्हें निलंबित कर दिया।

हालांकि, हेड कॉन्स्टेबल राजेश मीणा ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे दबाव और साजिश का परिणाम बताया है। मीणा का कहना है कि वे एक दिन पहले आरोपी को एस्कॉर्ट करते हुए गुलगांव बॉर्डर तक गए और वहां से सावर पुलिस को सुपुर्द किया। इसी दौरान केकड़ी सदर थाने के एसएचओ जगदीश प्रसाद चौधरी का फोन आया और उन्हें तत्काल देवपुरा पहुंचने के निर्देश दिए गए।

देवपुरा पहुंचने पर उनके साथ कॉन्स्टेबल कैलाश और चालक छोटू भी मौजूद थे। मौके पर एक तरफ करीब 60-70 लोग थे, जबकि दूसरी ओर परिवादी के साथ 25-30 लोग उपस्थित थे। इस दौरान परिवादी और उसकी पत्नी के साथ मारपीट की गई।

मीणा का दावा है कि उन्होंने पूरे घटनाक्रम की सूचना तुरंत एसएचओ और सीओ को दी। इसके बाद सावर से एएसआई दायमा मौके पर पहुंचे और फिर एसएचओ जगदीश प्रसाद चौधरी भी वहां आए। मीणा के अनुसार, एसएचओ ने उन्हें बताया कि एक एमएलए का फोन आया है और तुरंत सभी को छोड़ देने के निर्देश दिए गए। मीणा ने आरोप लगाया कि संबंधित एमएलए ने उन्हें धमकी भी दी।

हेड कॉन्स्टेबल का कहना है कि अवैध खनन से जुड़े चार डंपर, चार ट्रैक्टर और दो जेसीबी को जब्त कर थाने लाया गया था। थाने से इन्हें छुड़ाने का प्रयास किया जा रहा था, लेकिन उन्होंने नियमों के तहत कार्रवाई करते हुए वाहनों को छोड़ने से इनकार किया। इसी बात से नाराज होकर राजनीतिक दबाव बनाया गया और उन्हें सस्पेंड करा दिया गया। मीणा का कहना है कि इस मामले में उनकी कोई गलती नहीं है और उन्होंने अपना कर्तव्य निभाया है।

अजमेर जिले के केकड़ी सदर थाने में तैनात हेड कॉन्स्टेबल राजेश मीणा को सस्पेंड किए जाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। आरोप है कि मीणा ने राजकीय अस्पताल के सामने लोगों से मारपीट की, पिस्टल दिखाकर दहशत फैलायी, कार में तोड़फोड़ की और बाद में थाने में भी मारपीट की। इसी आधार पर पुलिस विभाग ने उन्हें निलंबित कर दिया।

हालांकि, हेड कॉन्स्टेबल राजेश मीणा ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे दबाव और साजिश का परिणाम बताया है। मीणा का कहना है कि वे एक दिन पहले आरोपी को एस्कॉर्ट करते हुए गुलगांव बॉर्डर तक गए और वहां से सावर पुलिस को सुपुर्द किया। इसी दौरान केकड़ी सदर थाने के एसएचओ जगदीश प्रसाद चौधरी का फोन आया और उन्हें तत्काल देवपुरा पहुंचने के निर्देश दिए गए।

देवपुरा पहुंचने पर उनके साथ कॉन्स्टेबल कैलाश और चालक छोटू भी मौजूद थे। मौके पर एक तरफ करीब 60-70 लोग थे, जबकि दूसरी ओर परिवादी के साथ 25-30 लोग उपस्थित थे। इस दौरान परिवादी और उसकी पत्नी के साथ मारपीट की गई।

मीणा का दावा है कि उन्होंने पूरे घटनाक्रम की सूचना तुरंत एसएचओ और सीओ को दी। इसके बाद सावर से एएसआई दायमा मौके पर पहुंचे और फिर एसएचओ जगदीश प्रसाद चौधरी भी वहां आए। मीणा के अनुसार, एसएचओ ने उन्हें बताया कि एक एमएलए का फोन आया है और तुरंत सभी को छोड़ देने के निर्देश दिए गए। मीणा ने आरोप लगाया कि संबंधित एमएलए ने उन्हें धमकी भी दी।

हेड कॉन्स्टेबल का कहना है कि अवैध खनन से जुड़े चार डंपर, चार ट्रैक्टर और दो जेसीबी को जब्त कर थाने लाया गया था। थाने से इन्हें छुड़ाने का प्रयास किया जा रहा था, लेकिन उन्होंने नियमों के तहत कार्रवाई करते हुए वाहनों को छोड़ने से इनकार किया। इसी बात से नाराज होकर राजनीतिक दबाव बनाया गया और उन्हें सस्पेंड करा दिया गया। मीणा का कहना है कि इस मामले में उनकी कोई गलती नहीं है और उन्होंने अपना कर्तव्य निभाया है।
इस पूरे घटनाक्रम पर कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा कि केकड़ी सदर थाने में तैनात एएसआई राजेश मीणा को अवैध खनन रोकने पर बुरी तरह पीटा गया और इनाम के तौर पर उन्हें विभाग से सस्पेंशन मिला। डोटासरा ने आरोप लगाया कि भाजपा नेताओं के संरक्षण में अवैध खनन चल रहा है और कर्तव्यनिष्ठ पुलिसकर्मियों को प्रताड़ित किया जा रहा है।

डोटासरा ने इसे केवल एक पुलिसकर्मी पर हमला नहीं, बल्कि कानून के राज पर सीधा हमला बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा नेताओं और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की मिलीभगत से अपराधियों को संरक्षण दिया जा रहा है, जबकि ईमानदार पुलिसकर्मियों को अपमानित किया जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या भाजपा सरकार अवैध खनन के आगे पूरी तरह समर्पण कर चुकी है। फिलहाल, राजेश मीणा के निलंबन के बाद यह मामला राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है। सभी की नजरें अब आगे की कार्रवाई और प्रशासनिक जांच पर टिकी हुई हैं।

- Sponsored Ads-
Share This Article
Leave a Comment