अंकित सिंह,भरगामा(अररिया)
सांसें हो रही हैं कम,आओ पेड़ लगाएं हम। पौधे लगाओ और प्रदूषण मिटाओ। इस प्रकार के न जाने कितने कर्णप्रिय स्लोगन के माध्यम से लोगों को उत्प्रेरित करने की कवायद पर्यावरण प्रेमियों द्वारा चलाई जा रही है। वहीं दूसरी तरफ भरगामा थाना क्षेत्र के कुसमौल पंचायत के वार्ड संख्या 11 स्थित कचरा भवन के समीप से सरकारी जमीन में लगाये गये प्रतिबंधित व कीमती हरे पेड़ों की अवैध कटाई की जा रही है,इसकी भनक वन विभाग को भी नहीं है।
सरकारी भूमि पर हरे पेड़-पौधों की कटाई चिंता का विषय बना हुआ है। जी,हां। इसे प्रशासनिक सक्रियता में विफलता मान लिया जाए या फिर क्षेत्रीय लोगों द्वारा आवश्यक पहल में कमी। कौन अधिक उत्तरदायी है? यह निर्णय कर पाना थोड़ा मुश्किल हो रहा है। बताया जाता है कि दिन के उजाले में हीं सरकारी जमीन से प्रतिबंधित हरे-भरे पेड़ की कटाई हो रहा है। इस कटाई पर प्रतिबंध हो इसके लिए गांव के ग्रामीण लगातार प्रयास कर रहे हैं।
लेकिन मारपीट व झगड़ा के डर से कुछ नहीं कह पाते हैं। इस संबंध में जानकार सूत्रों की मानें तो क्षेत्र में कई ऐसे अवैध आरा मशीनें संचालित हैं,जिसकी कोई अनुज्ञप्ति तक नहीं है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार इन अवैध आरा मशीनों के संचालन में वैसे सफेदपोश लोगों का संरक्षण प्राप्त है,जिनकी छत्रछाया में यह धंधा फल-फूल रहा है। लोगों का कहना है कि वन विभाग के कर्मी इस क्षेत्र का भ्रमण नहीं करते हैं,इसलिए उन्हें भनक नहीं लगती है।
लोगों ने बताया कि अबतक इस जगह पर लगाए गए दर्जनों की तादाद में शीशम के पेड़ों की अंधाधुंध कटाई कर दी गयी है। ऐसे में लगातार पेड़ों की संख्या घट रही है। जल जीवन हरियाली मिशन को लेकर सरकार लगातार प्रयासरत हैं। जिसके लिए प्रत्येक वर्ष गांव में मनरेगा योजना एवं ग्रामीणों की मदद से सैकड़ो की संख्या में पेड़ पौधों को लगाया जा रहा है। फिर भी लोग मनमानी तरीके से इसकी कटाई कर दे रहे हैं। हरी लकड़ी कटाई को लेकर कुसमौल गांव के ग्रामीणों ने बताया कि अवैध रूप से हो रही पेड़ों की कटाई पर रोक लगना जरूरी है। इस संबंध में सीओ निरंजन कुमार मिश्र ने बताया कि अभी तक कोई सूचना प्राप्त नहीं हुई है,अगर कोई लिखित आवेदन देता है तो जांचकर पेड़ काटने वालों पर आवश्यक दण्डनात्मक कार्रवाई की जाएगी। वहीं डीएफओ संजीव रंजन ने बताया कि मामले की जांच जारी है। दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।