छपरा:भव्य समापन के साथ संपन्न हुआ अखिल भारतीय दर्शन परिषद का 70वां अधिवेशन

Rakesh Gupta
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दार्शनिक विमर्शों में गूंजे समाज, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों के स्वर

विद्वानों ने बताया-दर्शन जीवन को दिशा देने वाला व्यवहारिक मार्गदर्शक

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छपरा। जयप्रकाश विश्वविद्यालय, छपरा में आयोजित अखिल भारतीय दर्शन परिषद के 70वें अधिवेशन का तीन दिवसीय आयोजन गुरुवार को दो महत्वपूर्ण संगोष्ठियों और भव्य समापन समारोह के साथ सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। पूरे अधिवेशन के दौरान देशभर से आए विद्वानों, शोधार्थियों और शिक्षाविदों ने दर्शन के विविध आयामों पर गंभीर मंथन किया।


समापन समारोह की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. परमेंद्र कुमार बाजपेई ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय, मोतिहारी के कुलपति प्रो. संजय श्रीवास्तव उपस्थित रहे। विशिष्ट अतिथियों में मगध विश्वविद्यालय, बोधगया के कुलपति प्रो. शशि प्रताप शाही तथा कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. लक्ष्मी निवास पांडेय शामिल थे। कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक दीप प्रज्वलन के साथ हुआ।


अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रो. बाजपेई ने कहा कि दर्शन केवल सैद्धांतिक विमर्श नहीं, बल्कि जीवन के प्रत्येक पहलू को दिशा देने वाला व्यवहारिक विज्ञान है। उन्होंने समकालीन चुनौतियों के संदर्भ में दर्शन की प्रासंगिकता को रेखांकित करते हुए इसे समाज के नैतिक और बौद्धिक विकास का आधार बताया।


मुख्य अतिथि प्रो. संजय श्रीवास्तव ने भारतीय दर्शन की वैश्विक स्वीकार्यता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह मानवता को सही दिशा दिखाने में सक्षम है। उन्होंने युवा शोधार्थियों से नवाचार, समन्वय और शोध की नई दिशाओं में आगे बढ़ने का आह्वान किया।


विशिष्ट अतिथि प्रो. शशि प्रताप शाही ने दर्शन को समाज में नैतिकता और मूल्यबोध का मूल आधार बताया। उन्होंने विश्वविद्यालय के सफल आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन शैक्षणिक वातावरण को समृद्ध बनाते हैं। वहीं प्रो. लक्ष्मी निवास पांडेय ने भारतीय संस्कृति और दर्शन के अटूट संबंध को रेखांकित करते हुए इसके संरक्षण और संवर्धन पर जोर दिया।


इस अवसर पर अखिल भारतीय दर्शन परिषद के अध्यक्ष प्रो. अंबिका दत्त शर्मा, अधिवेशन के सभापति प्रो. अमरनाथ झा, सचिव प्रो. किस्मत कुमार सिंह तथा ‘दार्शनिक त्रैमासिक’ के संपादक प्रो. शैलेश कुमार सिंह भी मंचासीन रहे। परिषद की ओर से विश्वविद्यालय के सफल आयोजन के लिए कुलपति प्रो. बाजपेई के नेतृत्व की सराहना की गई तथा आयोजन सचिव प्रो. सुशील कुमार श्रीवास्तव एवं प्रो. हरिश्चंद्र को सम्मानित किया गया।


समापन दिवस पर आयोजित प्रथम संगोष्ठी जय प्रकाश नारायण का समाज दर्शन विषय पर केंद्रित रही, जिसकी अध्यक्षता प्रो. श्रीकांत मिश्र ने की। वक्ताओं ने लोकनायक जयप्रकाश नारायण के समाजवादी विचार, ‘संपूर्ण क्रांति’ की अवधारणा तथा वर्तमान सामाजिक संदर्भों में उनकी प्रासंगिकता पर विस्तृत चर्चा की।


द्वितीय संगोष्ठी पंडित रामवतार शर्मा के दार्शनिक चिंतन के विविध आयाम” विषय पर आयोजित हुई, जिसकी अध्यक्षता प्रो. श्यामल किशोर ने की। इस सत्र में विद्वानों ने पंडित रामवतार शर्मा के दार्शनिक दृष्टिकोण, भारतीय दर्शन में उनके योगदान तथा भाषा, साहित्य और संस्कृति से उनके चिंतन के गहरे संबंधों पर गंभीर विमर्श प्रस्तुत किया।


तीन दिनों तक चले इस अधिवेशन ने न केवल दर्शन के क्षेत्र में नए विचारों को जन्म दिया, बल्कि शिक्षाविदों और शोधार्थियों के बीच संवाद और सहयोग की नई संभावनाएं भी विकसित कीं। आयोजन की सफलता ने जयप्रकाश विश्वविद्यालय को राष्ट्रीय शैक्षणिक मानचित्र पर एक नई पहचान दिलाई है।

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