डिजिटल होगा इतिहास, पर्यटन बनेगा रोजगार का साधन: डीएम की अध्यक्षता में सांस्कृतिक स्थलों के विकास पर बड़ा निर्णय
छपरा। जिले की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों को संरक्षित करने तथा उन्हें आधुनिक स्वरूप देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। जिलाधिकारी की अध्यक्षता में आयोजित समीक्षा बैठक में चिरांद सहित जिले के प्रमुख पुरातात्विक, धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थलों के संरक्षण और विकास को लेकर कई अहम निर्णय लिए गए।
बैठक में स्पष्ट किया गया कि विश्व प्रसिद्ध पुरातात्विक स्थल चिरांद को गंगा कटाव से बचाने के लिए बोल्डर पिचिंग एवं रिटेनिंग वॉल का निर्माण किया जाएगा। साथ ही बफर जोन के लिए आवश्यक भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया भी प्रारंभ की जाएगी, ताकि ऐतिहासिक धरोहर को दीर्घकालिक सुरक्षा मिल सके।
डिजिटल होगा छपरा का इतिहास
“ज्ञान भारतम” योजना के अंतर्गत जिले के पुराने मठों, मंदिरों, मदरसों और धार्मिक स्थलों में मौजूद दुर्लभ पांडुलिपियों, दस्तावेजों एवं ऐतिहासिक सामग्री का डिजिटाइजेशन किया जाएगा। इससे न केवल विरासत संरक्षित होगी, बल्कि शोधार्थियों और नई पीढ़ी को डिजिटल माध्यम से इतिहास से जुड़ने का अवसर मिलेगा।
ढाई आखर की जगह बनेगा अत्याधुनिक VR सेंटर
छपरा संग्रहालय परिसर में स्थित जर्जर ‘ढाई आखर’ भवन को हटाकर वहां अत्याधुनिक वर्चुअल रियलिटी (VR) सेंटर स्थापित किया जाएगा। इस केंद्र में लोग वर्चुअल माध्यम से छपरा, चिरांद और आसपास के ऐतिहासिक स्थलों के गौरवशाली अतीत को देख और अनुभव कर सकेंगे।
पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
करिंगा स्थित डच मकबरे के समीप एम्फीथियेटर, फूड कोर्ट और एक्टिविटी सेंटर विकसित करने की योजना पर भी सहमति बनी। इससे यह क्षेत्र एक प्रमुख पर्यटन हब के रूप में विकसित होगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे।
शैक्षणिक भ्रमण में शामिल होंगे ऐतिहासिक स्थल
जिले के विद्यालयों के शैक्षणिक भ्रमण कार्यक्रम में अब चिरांद एवं छपरा संग्रहालय को भी शामिल किया जाएगा, ताकि छात्र-छात्राएं पुस्तकीय ज्ञान के साथ-साथ अपनी सांस्कृतिक विरासत को प्रत्यक्ष रूप से समझ सकें।जिलाधिकारी ने संबंधित विभागों को निर्देश दिया कि सभी योजनाओं का क्रियान्वयन वैज्ञानिक क्लीयरेंस, विशेषज्ञों के समन्वय और समयबद्ध तरीके से सुनिश्चित किया जाए, जिससे छपरा की ऐतिहासिक पहचान को नई ऊँचाई मिल सके।
