डॉo संजय (हाजीपुर)-किसानों को आधुनिक एवं वैज्ञानिक कृषि तकनीकों से जोड़ने तथा फसल में कीट-व्याधियों के प्रभावी एवं पर्यावरण अनुकूल प्रबंधन के उद्देश्य से कृषि विभाग द्वारा किसान खेत पाठशाला का आयोजन किया गया। राजापाकर प्रखंड के ग्राम जाफरपट्टी में खरीफ 2026-27 के लिए आयोजित किसान खेत पाठशाला प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रखंड कृषि पदाधिकारी, राजापाकर द्वारा की गई।किसान पाठशाला में किसानों को मक्का फसल में लगने वाले प्रमुख कीट एवं व्याधियों की पहचान, उनके जीवन-चक्र, प्रकोप एवं फसल को होने वाले नुकसान के संबंध में विस्तार से जानकारी दी गई। विशेष रूप से फॉल आर्मीवर्म की पहचान, उसके प्रकोप की निगरानी तथा आर्थिक क्षति स्तर के आधार पर उचित प्रबंधन उपाय अपनाने पर जोर दिया गया।
किसानों को बताया गया कि कीट प्रकोप की नियमित निगरानी करते हुए आवश्यकता के अनुरूप ही कीटनाशकों का प्रयोग किया जाए, ताकि अनावश्यक लागत के साथ-साथ पर्यावरण एवं मित्र कीटों पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभाव को कम किया जा सके।प्रशिक्षण के दौरान समेकित कीट प्रबंधन की विभिन्न विधियों के बारे में व्यवहारिक जानकारी दी गई। इसमें गर्मी की गहरी जुताई, स्वस्थ एवं प्रमाणित बीज का प्रयोग, बीज एवं मिट्टी उपचार, समय पर बुआई, फसल चक्र, खेत की नियमित निगरानी, फेरोमोन ट्रैप, पीला एवं नीला चिपचिपा ट्रैप तथा लाइट ट्रैप के उपयोग के साथ-साथ मित्र कीटों की पहचान, जैविक नियंत्रण एवं वानस्पतिक कीटनाशकों के महत्व और उपयोग की जानकारी दी गई।
आवश्यकता पड़ने पर अनुशंसित रासायनिक कीटनाशकों के सही मात्रा, उचित समय एवं सुरक्षित छिड़काव तकनीक के बारे में भी किसानों को जागरूक किया गया।यह किसान खेत पाठशाला 14 सप्ताह तक संचालित की जाएगी जिसके माध्यम से किसानों को विभिन्न फसलों में लगने वाले कीट एवं व्याधियों की पहचान तथा उनके वैज्ञानिक एवं समेकित प्रबंधन की व्यवहारिक जानकारी दी जाएगी। भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत केंद्रीय एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन केंद्र, पटना के विशेषज्ञों एवं कृषि विभाग के पदाधिकारियों द्वारा किसानों को प्रशिक्षण एवं तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान किया जाएगा। प्रशिक्षण के दौरान किसानों की समस्याओं एवं जिज्ञासाओं का समाधान भी किया जाएगा।कृषि विशेषज्ञों ने किसानों से अपील की कि वे फसल की नियमित निगरानी करें तथा कीट प्रकोप की स्थिति में कृषि विभाग अथवा कृषि विशेषज्ञों से सलाह लेकर ही कीटनाशकों का प्रयोग करें।
समेकित कीट प्रबंधन तकनीक को अपनाकर कीटनाशकों के अनावश्यक उपयोग एवं लागत में कमी, मित्र कीटों एवं पर्यावरण का संरक्षण तथा सुरक्षित, टिकाऊ एवं लाभकारी मक्का उत्पादन को बढ़ावा दिया जा सकता है।
