(हरिप्रसाद शर्मा ) अजमेर:अजमेर की ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह परिसर में शिव मंदिर होने के दावे को लेकर चल रहे विवाद पर शनिवार को सिविल कोर्ट में अहम सुनवाई हुई। इस दौरान भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (एएसआई) और अल्पसंख्यक विभाग की ओर से दाखिल किए गए प्रार्थना पत्रों पर बहस हुई। अदालत ने फिलहाल अपना निर्णय सुरक्षित रखते हुए दरगाह कमेटी की ओर से लगाए गए प्रार्थना पत्र पर सुनवाई की अगली तारीख छह सितंबर तय की है।
याचिका की प्रक्रिया पर उठे सवालमामले से जुड़े वकीलों ने बताया कि याचिकाकर्ता विष्णु गुप्ता की ओर से दाखिल याचिका में नोटिस की प्रक्रिया और सरकार को पक्षकार बनाने के नियमों का पालन सही ढंग से नहीं किया गया। इस पर अदालत में आपत्ति दर्ज कराई गई। दूसरी ओर गुप्ता के अधिवक्ता संदीप ने तर्क देते हुए कहा कि यह विषय पूरी तरह से ज्यूरिडिक्शन (अधिकार क्षेत्र) से जुड़ा है और ऐसे मामलों में प्रार्थना पत्र की बाध्यता नहीं होती। उनका कहना था कि याचिका का मूल मुद्दा ऐतिहासिक और धार्मिक तथ्यों से संबंधित है।
जिस पर अदालत को निर्णय लेना होगा।दरगाह कमेटी की याचिका पर भी सुनवाई स्थगित*दरगाह कमेटी की ओर से याचिका खारिज करने के लिए जो प्रार्थना पत्र लगाया गया था, उस पर भी शनिवार को सुनवाई होनी थी। हालांकि अदालत ने इसे स्थगित करते हुए अगली तारीख छह सितंबर को सुनवाई तय की।
अदालत ने इस दौरान दोनों पक्षों को स्पष्ट निर्देश दिए कि अगली तारीख पर वे अपने-अपने पक्ष विस्तार से प्रस्तुत करें। *अदालत परिसर में कड़ी सुरक्षामामले की संवेदनशीलता को देखते हुए शनिवार को अदालत परिसर और आसपास सिविल लाइन थाना पुलिस की मौजूदगी बढ़ाई गई। अतिरिक्त पुलिस जाब्ता भी तैनात किया गया, ताकि किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति उत्पन्न न हो।