ईरान-इजरायल और अमेरिका युद्ध का असर अजमेर तक, गैस किल्लत में इंडक्शन चूल्हों की बंपर बिक्री बढ़ी

Rakesh Gupta
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(हरिप्रसाद शर्मा) अजमेर/ ईरान-इजरायल के बीच चल रहे युद्ध का असर अब स्थानीय स्तर पर भी दिखाई देने लगा है। देश के कई हिस्सों की तरह अजमेर में भी रसोई गैस की किल्लत से लोग परेशान हैं। गैस सिलिंडर की आपूर्ति में देरी और बुकिंग अवधि बढ़ने के कारण लोग अब विकल्प के तौर पर इंडक्शन चूल्हों की ओर रुख कर रहे हैं। शहर के बाजारों में इन दिनों इंडक्शन चूल्हों की मांग अचानक बढ़ गई है।

अजमेर के केसरगंज स्थित इलेक्ट्रॉनिक्स बाजार के दुकानदारों के अनुसार पहले जहां महीने भर में एक या दो इंडक्शन चूल्हे ही बिकते थे, वहीं पिछले कुछ दिनों से रोजाना 20 से 25 इंडक्शन चूल्हे तक बिक रहे हैं। गैस सिलिंडर की कमी और बढ़ती कीमतों के चलते लोग अब इलेक्ट्रिक चूल्हों को बेहतर विकल्प मानने लगे हैं।

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केसरगंज के दुकानदार राजीव गोयल ने बताया कि पहले इंडक्शन चूल्हों की बिक्री बहुत कम होती थी, लेकिन गैस की किल्लत के बाद अचानक मांग बढ़ गई है। अब लोग घरेलू उपयोग के साथ-साथ कमर्शियल इंडक्शन चूल्हे भी खरीदने के लिए दुकानों पर पहुंच रहे हैं। उनका कहना है कि अगर गैस की स्थिति इसी तरह बनी रही तो आने वाले दिनों में इंडक्शन चूल्हों की मांग और बढ़ सकती है।

वहीं दुकानदार आशीष गोयल का कहना है कि ईरान–इजरायल युद्ध के बाद देशभर में गैस आपूर्ति प्रभावित होने की खबरों के बीच लोगों में चिंता बढ़ी है। गैस सिलिंडर मिलने में देरी और लंबी कतारों से बचने के लिए लोग अब इंडक्शन चूल्हे खरीदकर बिजली से खाना बनाने को मजबूर हो रहे हैं।

इंडक्शन चूल्हा खरीदने आए ग्राहक सत्यनारायण शर्मा ने बताया कि गैस सिलिंडर की बुकिंग अवधि करीब 25 दिन कर दी गई है, जिसके चलते उनके घर का गैस सिलिंडर खत्म हो गया। गैस एजेंसी पर लंबी-लंबी लाइनें लग रही हैं, इसलिए फिलहाल खाना बनाने के लिए उन्हें इंडक्शन चूल्हा खरीदना पड़ा।

गैस की कमी और बढ़ती कीमतों के बीच अजमेर में इंडक्शन चूल्हों की बढ़ती मांग यह संकेत दे रही है कि लोग अब रसोई के लिए वैकल्पिक साधनों की तलाश में जुट गए हैं। अगर गैस आपूर्ति की स्थिति जल्द सामान्य नहीं हुई तो शहर में इंडक्शन चूल्हों की बिक्री और तेजी से बढ़ सकती है।

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