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वाराणसी: समाज के लिए उल्लेखनीय कार्य करने वालों को मिथिला रत्न, मिथिला विभूति और मिथिला यूथ आईकान से सम्मानित किया गया*

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*काशी में होना चाहिए मैथिल सगमम- मंत्री रविंद्र जयसवाल

*समाज के लिए उल्लेखनीय कार्य करने वालों को मिथिला रत्न, मिथिला विभूति और मिथिला यूथ आईकान से सम्मानित किया गया*

*मैथिली सुगम संगीत की हूई मनोहारी प्रस्तुति*

*लोकनृत झिझिया, जट-जटिन ने लोगों को मोहा*

वाराणसी, 18 दिसम्बर मिथिला संस्कृति के प्रतीक हिन्दी व मैथिली भाषा के प्रथम कवि, कवि कोकिल महाकवि विद्यापति महोत्सव ख्यात साहित्यकार पूर्व जीएम पूर्वोत्तर रेलवे आर आर झाक्षकी अध्यक्षता में नागरी प्रचारिणी सभा, काशी में धूमधाम से सम्पन्न हुआ।

सर्वप्रथम संस्था के संस्थापक / अध्यक्ष निरसन कुमार झा, एडवोकेट ने समारोह के मुख्य अतिथि पूर्व मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश सरकार माननीय राज्य मंत्री रविन्द्र जायसवाल को मिथिला संस्कृति के प्रतीक पाग, दुपट्टा, रुद्राक्ष की माला और महाकवि विद्यापति का चित्र भेंट कर सम्मानित किया।

 

मुख्य अतिथि पद से बोलते हुए माननीय मंत्री रविन्द्र जायसवाल उ0प्र0 सरकार ने कहा कि महाकवि विद्यापति हिन्दी साहित्य के प्रथम कवि होने के साथ- साथ मैथिली भाषा साहित्य के भी प्रथम कवि थे। मैथिली काव्य के माध्यम से विद्यापति ने मैथिल समाज को जोड़ने का काम किया। विद्यापति जी का कव्य मिथिला के घर घर में गाया व सुनाया जाता है। मैथिल समाज को विद्यापति जी को आदर्श मानकर जीवन के हर क्षेत्र में संगठित होना चाहिये, जैसे तमिल संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए काशी के धरती पर तमिल संगमम हुआ वैसे ही कम से कम सात दिन का मैथिल संगमम होना चाहिए जिससे कि काशी कि जनता भी मैथिली संस्कृति से परिचित हो सके।

 

समारोह में मुख्य वक्ता समाजसेवी एनआरआई अजय झा ने कहा कि सुदूर मिथिला (बिहार) से आकर काशी में विद्यापति महोत्सव के माध्यम से अपनी कला, संस्कृति को बनाये रखना एक महान कार्य है। विद्यापति जी की रचनायें सभी जातियों, धर्मों के लोगों में समान रूप से प्रिय हैं, चाहे वो ब्राह्मण हो, ठाकुर हो, हरिजन हो, विद्यापति सभी में प्रिय थे। ऐसे महान् विभूति के काव्य से सीख लेते हुए मिथिलावासियों को एकता के सूत्र में बंधना होगा।

समारोह के विशिष्ट अतिथि उ0प्र0 सरकार के स्टाम्प, निबंधन राज्यमंत्री माननीय श्री रविन्द्र जायसवाल ने कहा कि धन्य है मिथिला की भूमि जहाँ विद्यापति जैसे महाकवि पैदा हुए, विद्यापति ने अपनी रचनाओं के माध्यम से न केवल हिन्दी साहित्य बल्कि बंग्ला और मैथिली साहित्य को समृद्ध किया, बल्कि अपने काव्य के माध्यम से विद्यापति ने समाज को भी जोड़ने काम किया है। मनुष्य के जीवन का कोई ऐसा क्षेत्र नहीं है, जिसको विद्यापति के काव्य ने न हुआ हो। ऐसे महाकवि के चरणों में शत् शत् नमन।

अतिविशिष्ट अतिथि के रूप में माननीय डा0 नीलकंठ तिवारी, यू.बी.आई. के जी. एम. श्री गिरीशचन्द्र जोशी, पंजाब नैशनल बैंक के क्षेत्र प्रमुख श्री राजेश कुमार, बैंक आफ बड़ौदा के क्षेत्र प्रमुख नीलमणि, बड़ौदा यू.पी. बैंक के क्षेत्र प्रमुख मनोज कुमार झा, केन्द्रीय जल आयोग के अधीक्षण अभियन्ता अखिलेश कुमार झा,
वाणिज्य कर कमिश्नर अमित पाठक,अधीक्षण अभियन्ता श्री विजय कुमार, भारतीय रेल चिकित्सा सेवा के डा0 चन्द्रशेखर झा और पूर्व डीआरएम आरआर झा ने भी समारोह को सम्बोधित किया।

उक्त अवसर पर समारोह में यू.बी.आई. के जी.एम. श्री गिरीशचन्द्र जोशी, पंजाब नैशनल बैंक के क्षेत्र प्रमुख श्री राजेश कुमार को “पं0 लक्ष्मीकांत झा अर्थशास्त्री गौरव सम्मान’ से सम्मानित किया गया।

ख्यात समाजसेवी एनआरआई अजय झा को मिथिला रत्न, डा अन्शू सिंह को मिथिला विभूति,राष्ट्रीय अध्यक्ष नेशनल जर्नलिस्ट एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष राकेश कुमार, मणिकान्त,डा राहुल मनहर, दिल्ली के ख्यात डा पुनीत सिंह और मृत्युंजय सिंह को मिथिला यूथ आईकान से सम्मानित किया गया|

समारोह के अन्त में सुप्रसिद्ध पार्श्व गायक विजय कपूर ने समारोह में उपस्थित लोगों को विद्यापति जी द्वारा लिखे गीतों –

(1) पुंज भवन संनिकसल रे रोकल गिरधारी …

(2) सुनु सुन रसिया आब नै बजावूं ….

सुप्रसिद्ध डा इन्द्रदेव चौधरी ने

(1) गे माय चंद्रमुखी सम गौरी हमर (2) पिया मोर बालक हम तरुनी गे

ख्यात गायक निर्मोहन झा ने

(1) मिथिला के माटी को करूं सब प्रणाम यो

(2) जय जय मिथिला धाम

ख्यात नृत्यांगना डा ममता टण्डन, डा रवि शंकर और विदिशा झा ने कथक पर मनोहारी प्रस्तुति दी|

नन्दिनी सिंह के नृत्य निर्देशन में मिथिला का लोकनृत्य समा-चकेता, जट-जटिन, झिझिया पर कलाकारों ने भावपूर्ण प्रस्तुति दी।

समारोह का संचालन व संयोजन गौतम कुमार झा ने किया, सह-संयोजक डा० कमलेश झा ने किया व स्वागत निरसन कुमार झा, एडवोकेट ने किया । धन्यवाद ज्ञापन सचिव दास पुष्कर ने किया। समारोह में मुख्य रूप से सुधीर चौधरी, नटवर झा, भोगेन्द्र झा, सभाजीत शुक्ल,ब्रृजेशचन्द पाण्डेय, डा० आशुतोष यादव, प्रो आरआर सिंह, डा अशोक सिंह,
आदि ने किया।

 

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