(हरिप्रसाद शर्मा) पुष्कर/ अजमेर: पंचांग एवं ज्योतिष की गणित विज्ञान के आधार से सन 2026 की प्रथम पूर्णिमा माघ मास के पुण्य स्नान से प्रारंभ होगी भले ही यह पूर्णिमा मलमास में है मगर माघ मास को धर्मशास्त्र में सर्वश्रेष्ठ बताया गया है । पंडित कैलाश नाथ दाधीच के अनुसार इस दिन तीर्थ में नदियों में स्नान करने, से ब्रह्म सरोवर ब्रह्मा की नगरी में स्नान ,दान पुण्य, हवन पूजन का करोडो गुना फल लिखा है ।
माघ मास पूर्णिमा के दिन स्वयं नारायण एवं लक्ष्मी तीर्थ में ब्रह्म सरोवर में निवास करते हैं । इस दिन हवन पूजन का विशेष महत्वहै ।
पंडित दाधीच के अनुसार वेद एवं शास्त्र के अनुसार जिनकी जन्म पत्री वर्ष पत्रि मैं चंद्रमा नीच राशि का छठे घर में आठवें घर में द्वादश भाव में हो एवं अशुभ है ।चंद्रमा की महादशा चल रही है या कुंडली में चंद्रमा शुभ ग्रह शुभ स्थान पर नहीं है उनको पूर्णिमा के दिन चंद्रमा की पूजन सफेद वस्तु का दान एवं शंकर की उपासना चांदी का चंद्रमा मोती लगाकर शंकर भगवान के अर्पित करना चाहिए ।जिससे चंद्रमा का अशुभ दृष्टि और अशुभ योग निवारण होता है चंद्रमा की दृष्टि से मानसिक शारीरिक पारिवारिक आर्थिक परेशानियां होती है एवं दांपत्य जीवन में कष्ट कारक योग बनता है पुत्र एवं पुत्री संतान से मानसिक संताप एवं कष्ट होता है ।चंद्र मंत्र का जाप रुद्री का पाठ शिव महिमन एवं शंकर भगवान के कच्चे दूध में शहद ,हल्दी, केसर ,कपूर, शक्कर मिलाकर अभिषेक करने से चंद्र दोष का निवारण एवं कष्ट निवारण होता है ।इसी दिन से पुण्य पवित्र मास धर्म दान पुण्य का मांस माघ मास प्रारंभ होता है।
