छपरा में राज्य आयोग की बैठक: आर्थिक रूप से पिछड़े सवर्णों के सशक्तिकरण के लिए बनेगी नई कार्ययोजना

Rakesh Gupta
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ईडब्ल्यूएस सर्टिफिकेट की दिक्कतों पर आयोग सख्त, पात्र व्यक्तियों को ही लाभ देने का निर्देश

छपरा में राज्य आयोग की बैठक: आर्थिक रूप से पिछड़े सवर्णों के सशक्तिकरण के लिए बनेगी नई कार्ययोजना


छपरा। बिहार राज्य के उच्च जातियों के विकास के लिए गठित राज्य आयोग के अध्यक्ष डॉ महाचंद्र प्रसाद सिंह ने अधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक आज सारण प्रमंडल में आयोजित की गई। आयोग के अध्यक्ष डॉ. महाचन्द्र प्रसाद सिंह की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में सवर्ण समाज के आर्थिक रूप से पिछड़े परिवारों के उत्थान और उनके कल्याण के लिए चल रही योजनाओं की समीक्षा की गई।


उच्च जातियां के विकास के लिए गठित आयोग के अध्यक्ष डॉ महाचंद्र प्रसाद सिंह ने सर्किट हाउस में प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए कहा कि राज्य सरकार उच्च जातियों के सर्वांगीण विकास के लिए पूरी तरह संकल्पित है। इस दौरान प्रमंडल के विभिन्न जिलों के अधिकारियों, समाजसेवियों और बुद्धिजीवियों के साथ गहन विचार-विमर्श किया गया। उन्होंने बैठक में दिए गए निर्णय के आलोक में कहा कि सर्टिफिकेट जारी करने में ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अध्यक्ष ने कहा कि इडब्लूएस-आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के प्रमाण-पत्र निर्गत करने में आ रही कठिनाइयों की लगातार शिकायतें मिल रही हैं। उन्होंने प्रमंडलीय आयुक्त को निर्देश दिया कि वे इसकी समीक्षा करें और समस्याओं का तत्काल निराकरण सुनिश्चित करें।

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आयोग के अध्यक्ष ने भी कहा कि पात्रता मानदंडों का कड़ाई से पालन होना चाहिए। बैठक में यह मुद्दा उठा कि कई जगहों पर निर्धारित मानकों
यथा शहरी क्षेत्र में 100/200 वर्ग फीट और ग्रामीण स्तर पर 5 एकड़ जमीन का सही ढंग से पालन नहीं हो रहा है, जिससे अपात्र लोग भी लाभ उठा रहे हैं।आयोग प्रमंडलवार भ्रमण कर सवर्ण समाज की वर्तमान स्थिति का आकलन कर रहा है ताकि भविष्य के लिए एक ठोस सशक्तिकरण योजना तैयार की जा सके।


इस बैठक में आयोग के उपाध्यक्ष सह जदयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद, आयोग के सदस्य जय कृष्ण झा ने प्रेस मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि इडब्लूएस प्रमाणपत्रों और उनके लाभों से संबंधित अटकी फाइलो और प्रमंडल के सभी अंचलों को लंबित आवेदनों के त्वरित निष्पादन का निर्देश दिया गया है।


उन्होंने आयुक्त के सचिव को निर्देशित किया गया है कि वर्ष 2025 में इडब्लूएस प्रमाणपत्र से संबंधित जितने भी आवेदन निर्गत, अस्वीकृत या लंबित हैं, उनकी अंचलवार सूची तैयार कर एक पक्ष (15 दिन) के भीतर आयोग को उपलब्ध कराई जाए।बैठक में स्पष्ट किया गया कि इडब्लूएस प्रमाणपत्र की वैधता इसके निर्गत होने की तिथि से एक वर्ष तक मान्य होगी। इस संबंध में सभी जिला नियोजन इकाइयों को अनुपालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है।


पात्रता नियमों में संशोधन का प्रस्ताव
बैठक के दौरान बुद्धिजीवियों और जनप्रतिनिधियों ने इडब्लूएस प्रमाणपत्र के लिए तय राज्य सरकार के वर्तमान मापदंडों में बदलाव का सुझाव दिया है। वर्तमान में ग्रामीण क्षेत्रों में 5 एकड़ तक की भूमि की सीमा को शिथिल कर 3 एकड़ करने का प्रस्ताव रखा गया है, ताकि अधिक पात्र लोगों को इसका लाभ मिल सके। प्रेस कंपनी के दौरान आयोग के उपाध्यक्ष एवं सदस्य ने प्राइवेट स्कूलों में आरक्षण, शिक्षा के अधिकार के तहत निजी स्कूलों में अन्य आरक्षित वर्गों की तरह ही इडब्लूएस वर्ग के बच्चों को भी समान रूप से सीटों और फीस में लाभ प्रदान करने की वकालत की गई है। उपाध्यक्ष एवं सदस्य ने कहा कि अनुसूचित जाति/जनजाति और पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग की तर्ज पर ‘उच्च जातियों के विकास’ के लिए एक समर्पित राज्य स्तरीय विभाग गठित करने और सभी जिलों में संबंधित पदाधिकारियों की नियुक्ति करने की आवश्यकता है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में आयोग के निदेशक शैलेंद्र झा,भाजपा के जिला अध्यक्ष रंजीत कुमार सिंह, कार्यालय मंत्री अर्द्धेन्दु शेखर, महिला नेत्री कुसुम देवी, एनडीए नेता अशोक सिंह सहित सहित जिले के वरिष्ठ पदाधिकारी और जन-प्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में एनडीए कार्यकर्ता और पदाधिकारी उपस्थित थे।

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