सारण: टीबी मुक्त अभियान: प्रधानमंत्री के सपने को साकार करने में ठाकुड़बाड़ी महिला विकास कल्याण समिति निभा रही हैं अपनी महत्वपूर्ण भूमिका:

Rakesh Gupta
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किसी संस्था या व्यक्ति द्वारा इतनी बड़ी संख्या में टीबी मरीजों को गोद लेना अपने आप में बड़ी उपलब्धि: मंजीत सिंह

टीबी मरीजों को पोषण के साथ- साथ रोजगार के अवसर उपलब्ध करा निभा सकते हैं अपनी महत्वपूर्ण भूमिका: निक्षय मित्र

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निक्षय मित्र बनने वाले इच्छुक व्यक्ति नजदीकी अस्पताल से कर सकते है संपर्क: डीपीसी

 

बिहार न्यूज़ लाईव सारण डेस्क:  छपरा कार्यालय।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष – 2025 तक भारत से टीबी उन्मूलन का लक्ष्य रखने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान की शुरुआत की गई है। जिसके लिए टीबी मरीजों को गोद लेने के लिए अपील की जा रही है। उक्त बातें जदयू के प्रदेश सचिव सह बैकुंठपुर (गोपालगंज) के पूर्व विधायक मंजीत सिंह ने छपरा शहर स्थित साधनापुरी में ठाकुड़बाड़ी महिला विकास कल्याण समिति द्वारा आयोजित टीबी मरीजों के बीच फूड पैकेट वितरण समारोह के दौरान कही।

 

निजी संस्था की संस्थापक सचिव डॉ अंजू सिंह द्वारा आयोजित टीबी मरीजों के बीच फूड पैकेट वितरण समारोह का विधिवत उद्घाटन जदयू नेता मंजीत सिंह और संस्था की संस्थापिका सचिव डॉ अंजू सिंह के द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। जबकि इस अवसर पर सदर अस्पताल के पूर्व उपाधीक्षक डॉ अमरेंद्र कुमार सिंह, पूर्व प्राचार्य सह समाजसेवी राजवंशी सिंह, डीटीसी के डीपीसी हिमांशु शेखर, सिफार के डीपीसी धर्मेन्द्र कुमार रस्तोगी, डॉ अल्का सिंह, धुरेंद्र सिंह, सुमन सिंह, अनिशा, निधि सहित कई अन्य गणमान्य लोग उपस्थित थे। मंच का संचालन आरजे रजत ने किया जबकि आगत अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापन संस्थापक सचिव डॉ अंजू सिंह ने की। कार्यक्रम शुरू होने से पहले प्रियंका, गिरजा सहित कई अन्य बच्चियों द्वारा स्वागत गान प्रस्तुत किया गया।

किसी संस्था या व्यक्ति द्वारा इतनी बड़ी संख्या में टीबी मरीजों को गोद लेना अपने आप में बड़ी उपलब्धि: मंजीत सिंह
जदयू के प्रदेश सचिव सह पूर्व विधायक मंजीत सिंह ने टीबी मरीजों की बीच फूड पैकेट वितरण समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि महिला समाज सेवी डॉ अंजू सिंह द्वारा एक ही साथ टीबी के 30 मरीजों को गोद लिया गया है जो अपने आप में बहुत बड़ा कदम है। शायद अभी तक इतनी बड़ी संख्या में किसी संस्था या व्यक्ति के द्वारा निक्षय मित्र बनकर टीबी रोगियों को गोद नही लिया गया है। किसी संस्था या व्यक्ति के द्वारा गोद लेकर फूड पैकेट वितरण करना कही ना कही देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सपनों को साकार करने में महती भूमिका होगी। हालांकि सरकार के अलावा स्वास्थ्य विभाग भी इसके लिए प्रचार किया जा रहा है ताकि अधिक से अधिक लोग निक्षय मित्र बनकर देश से टीबी जैसी बीमारी को जड़ से मिटाया जा सके।

टीबी मरीजों को पोषण के साथ- साथ रोजगार के अवसर उपलब्ध करा निभा सकते हैं अपनी महत्वपूर्ण भूमिका: निक्षय मित्र
ठाकुड़बाड़ी महिला विकास कल्याण समिति की संस्थापिका सह सचिव डॉ अंजू सिंह ने कहा कि टीबी बीमारी से ग्रसित मरीजों के लिए सामान्य नागरिक, गैर सरकारी संस्थान एवं ज़िले के जनप्रतिनिधियों सहित अन्य लोगों को निक्षय मित्र बनने के लिए स्वास्थ्य विभाग और हमारी संस्था के द्वारा प्रेरित किया जा रहा है। हम जैसे निक्षय मित्र टीबी मरीजों को पोषण के साथ- साथ रोजगार के लिए अवसर उपलब्ध कराने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। हालांकि टीबी जैसी बीमारी का इलाज जिला से लेकर सरकारी स्वास्थ्य केंद्र में विभागीय स्तर पर किया जाता है। वैसे हमलोग भी क्षेत्र भ्रमण के दौरान टीबी मरीजों सहित कई अन्य बीमारियों से पीड़ित रोगियों से मिलकर दुःख दर्द से वाकिफ होते हैं।

इस स्थान के मरीजों के बीच किया गया फूड पैकेट वितरण: डॉ अंजू सिंह
डॉ अंजू सिंह ने बताया कि सदर प्रखंड के मगाईडीह, नेवाज़ी टोला और सांढा ढाला के अलावा बड़ा तेलपा, छोटा तेलपा, दहियावां, गांधी चौक, साहेबगंज, करीमचक, अस्पताल चौक, कटहरी बाग, मासूमगंज, गुदरी बाजार, नबीगंज, शिया मस्जिद, नारायण चौक, मखदूमगंज, मोहन नगर और योगिनियां कोठी के 30 टीबी मरीजों के बीच फूड पैकेट का वितरण किया गया है। टीबी रोगियों को पौष्टिक आहार के रूप में चना, गुड़, दाल, चावल, सोयाबीन और तेल का पैकेट दिया गया है ताकि जल्द से जल्द रोगी ठीक हो सकें।

निक्षय मित्र बनने वाले इच्छुक व्यक्ति नजदीकी अस्पताल से कर सकते है संपर्क: डीपीसी
जिला यक्ष्मा केन्द्र के जिला योजना समन्वयक (डीपीसी) हिमांशु शेखर ने कहा कि निक्षय मित्र बनने के लिए communitysupport.nikshay.in पर लॉगिन करने के बाद प्रधानमंत्री टीबी मुक्त अभियान पर क्लिक करने के बाद निक्षय मित्र के आवेदन पत्र पर क्लिक कर अपनी पूरी जानकारी देते हुए आसानी से इस अभियान के साथ जुड़ा जा सकता है। इसके अलावा भी कोई भी इच्छुक व्यक्ति या संस्था निक्षय बनने के लिए अपने नजदीकी स्वास्थ्य संस्थान या संबंधित अधिकारियों से संपर्क कर सकता है।

 

हालांकि टीबी की बीमारी कुछ वर्ष पहले तक दूसरे नज़रों से देखा जाता था लेकिन अब इसका इलाज आसानी से हो रहा है। जबकि सबसे अहम बात यह है कि सरकारी अस्‍पतालों में इस बीमारी से संबंधित उचित परामर्श, जांच, इलाज के साथ ही दवा का वितरण पूरी तरह से निःशुल्क किया जाता है।

 

 

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