हिन्दू वैवाहिक संस्कार का गहरा संबंध है नृत्य गीत संगीत से
डॉ.विद्या भूषण श्रीवास्तव
छपरा कार्यालय। हिन्दू रीति रिवाज के तहत होने वाले वैवाहिक कार्यक्रम से गीत संगीत का संबंध काफी पुराना है।शादी में लड़का और लड़की दोनों पक्षों में एक महीने पहले से ही गीत संगीत घरों में गूंजने लगते हैं।वर -वधू के घरों में वह खुशनुमा पल तब होता है जब हल्दी कलश का दिन होता है।गांवों में इसे हल्दी कुटाई का रस्म कहा जाता है।इसका दिन भी शुभ घड़ी देख कर किया जाता है।पं. कौशलेंद्र मिश्रा कहते हैं कि हल्दी कुटने का दिन मांगलिक बेला में शास्त्र सम्मत माना जाता है इसलिए इसे शुभ घड़ी में प्रारंभ किया जाता है।
मिश्रा के अनुसार शास्त्रों में देवलोक में हरिद्रा लेपन के विधान की चर्चा आता है।पुरे टोला मोहल्ले की महिला में इकठ्ठा होकर हल्दी कुटाई का रस्म सम्पन्न कराती हैं।आज के दिन से ही गीत संगीत व नृत्य के बीच विवाह समारोह शुरू हो जाता है।रोजाना नियम पूर्वक सांझा पराती गीत गायन शुरू हो जाता।वर और वधु को हल्दी का उबटन शादी के दिन तक लगाया जाता है और पारम्परिक गीत गाये जाते हैं। पीस हो माई धीरे धीरे हल्दी के गांठ हो….. जैसे गीतों से घर मुहल्ला गूंज उठता है।जैसे जैसे रात बीतती है घर के लोग खाना पीना से निपट जाते हैं तो नृत्य के महिला में ढ़ोलक पर गायन करते हैं नृत्य करती है।
खास कर माटी कोड़ाई के बाद लौटने के क्रम में महिलायें में जो सामुहिक नृत्य गीत झूम झूम कर करती हैं वह बड़ी मनोरम लगता है।इस अवसर गाये जाने वाले झूमर गीतों में बहे के पुरूआ रामा बह गईले पछुआ गीत आदि गीत बहुत ही प्रसिद्ध रहे हैं।वर पक्ष के यहां बारात जाने के बाद डोमकच नृत्य नाटिका गीत संगीत के साथ महिलायें करती हैं जिसका प्रचलन काफी पुराना है। हालांकि आज के दौर में इस परम्परा को औपचारिकता वश निर्वहन किया जा रहा है फिर भी,जो भी रस्म की जा रही है वह पाश्चात्य संस्कृति एवं सभ्यता भी दिखती है भले ही ,अब समय की कमी अवश्य है,मगर दो दिनों के अंदर सभी रस्में पूरी की जा रही है। ऐसी झलक एक शादी विवाह में दिखा।
शांभवी एवं निशांत की शादी विवाह की रस्म अदायगी के बीच महिलाओं से लेकर पुरुषों एवं बच्चे नृत्य संगीत डूबे रहे।बच्चे एवं मित्र दोस्त जमकर थिरकते रहे वहीं हल्दी की रस्म अदायगी भी एक रीति रिवाज के तहत हुई।बहरहाल नृत्य संगीत एवं अन्य रस्मे आज भी जीवित है और इस परम्परा को आज के दौर में भी युवा पीढ़ी भी निर्वहन कर रहे है जो एक अच्छी बात है ।
शनिवार को संपन्न हुए नृत्य संगीत से हल्दी चढ़ाने की परम्पर में शिरकत करने वालों में शामिल दुर्गेश कुमार श्रीवास्तव,रमा श्रीवास्तव,राजन श्रीवास्तव,दीपक कुमार श्रीवास्तव,मोहिनी श्रीवास्तव,,गोविंद श्रीवास्तव,नीलम श्रीवास्ता,अविका श्रीवास्तव,किट्टू,अवध बिहारी शरण पप्पू कुमार मनीष ,शरद चंद्र,आदि प्रमुख रूप से थे जिसे सभी नाते रिश्तेदारों की भागीदारी कर इस पुरानी परम्परा की जीवंतता प्रदान की है।
