दिल्ली :यूजीसी पर सवर्णों के लिए राहत भरी खबर गुरुवार को कोर्ट के द्वारा आया है।सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) की ओर से जारी किए गए नए नियमों को फिलहाल लागू करने से रोक दिया है।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉय माल्या की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि इन नियमों में कई बातें स्पष्ट रूप से परिभाषित नहीं हैं और इस वजह से इनके गलत इस्तेमाल की संभावना बनी रहती है।बेंच ने केंद्र सरकार से कहा कि वह इन गाइडलाइंस का मसौदा दोबारा तैयार करे और नियमों को ज्यादा पारदर्शी और सहज बनाए। यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) ने जनवरी 2026 में अपने नए Equity in Higher Education Institutions Regulations जारी किए. इनका उद्देश्य था-कैंपसों में जाति-आधारित भेदभाव को खत्म करना और छात्रों, शिक्षकों और स्टाफ के लिए एक सुरक्षित व सम्मानजनक माहौल बनाना, लेकिन नियम जारी होते ही देशभर में एक सवाल तेजी से उठने लगा-क्या भेदभाव रोकने के लिए भारत में पहले से ही कानून, कोर्ट आदेश और संस्थागत सिस्टम मौजूद नहीं हैं?
भारत के संविधान में भेदभाव पर पहले से ही सख्त प्रावधान मौजूद हैं. अनुच्छेद 14, 15 और 17 समानता का अधिकार देते हैं और जाति के आधार पर किसी भी तरह के भेदभाव को पूरी तरह प्रतिबंधित करते हैं।
इसके अलावा SC/ST अत्याचार निवारण अधिनियम, सेवा नियम, विश्वविद्यालयों की अपनी स्टैच्यूट्स तथा कई तरह की एंटी-रैगिंग, Equal Opportunity Cells, इंटरनल कंप्लेंट्स कमेटियां और ऑनलाइन शिकायत पोर्टल पहले से चल रहे हैं।सुप्रीम कोर्ट भी कैंपस भेदभाव और छात्र आत्महत्या जैसे मामलों में कई बार विश्वविद्यालयों को पारदर्शी और निष्पक्ष जांच करने के निर्देश दे चुका है।
